कुछ लोग इसे धरती का वैकुण्ठ कहते हैं, कुछ लोग ‘तिरुवरंगम तिरुपति’, तो कुछ लोग ‘पेरियाकोइल’. लगभग 156 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव मंदिर माना जाता है.

जी हां मैं बात कर रहा हूं तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में मौजूद रंगनाथस्वामी मंदिर की.

यूं तो बंगाल की खाड़ी के तट पर बसा तमिलनाडु एक खूबसूरत प्रदेश है. यहां पर्यटन के लिहाज से देखने को बहुत कुछ है. इतिहास की एक से बढ़कर एक नायाब धरोहर वहां आपको देखने को मिल जायेंगी. लेकिन, फिर आपको वहां अपना पूरा दिन रंगनाथ स्वामी मंदिर को देना चाहिए. ताकि आप जान सकें कि इसे क्यों कहा जाता है धरती का वैकुण्ठ. क्या हैं इससे जुड़ी मान्यताएं और पर्यटन के लिए यहां क्या-क्या है खास. आईये जानते हैं:

मान्यता के अनुसार गोदावरी तट पर सदियों पहले गौतम ऋषि का आश्रम हुआ करता था. उन्होंने यहां पर गोदावरी नदी को देव लोक से बुलाया था, जिस कारण चहुंओर उनकी जय-जय कार होने लगी थी. उनकी बढ़ती प्रसिद्धी से अन्य कई ऋषि उनसे जलने लगे थे. वह उन्हें सभी की नज़रों में गिराना चाहते थे. इसलिए उन्होंने एक साजिश के चलते ऋषि गौतम पर गौ हत्या का आरोप लगाते हुए उन्हें आश्रम से निकाला दिया था.

History of Sri Ranganathaswamy Temple (Pic: historiesindia)

गौतम ऋषि इस घटना से बहुत आहत थे, इसलिए उन्होंने श्रीरंगम आकर भगवान विष्णु की तपस्या शुरु कर दी. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर रंगनाथ स्वामी के रूप में उन्हें यहीं पर अपने दर्शन दिए. इस लिहाज से इस जगह को धार्मिक माना गया और फिर धीरे-धीरे यहां रंगनाथ स्वामी मंदिर का निर्माण हुआ, जो आज एक विशाल परिसर में फैला हुआ है.

इस मंदिर का निर्माण किसने कराया यह एक बड़ा प्रश्न है, जिसका सटीक जवाब नहीं मिलता. मान्यता के अनुसार चोल वंश के एक राजा को यहां मौजूद भगवान विष्णु की मूर्ति घने जंगल में एक तोते का पीछा करते हुए मिली थी, और उन्होंने ही इसका निर्माण कराया था.

वहीं दूसरी तरफ मंदिर में मौजूद शिलालेखों में चोल, पाण्ड्य, होयसल और विजयनगर राजवंशों के समय की छटा देखने को मिलती है. इसलिए माना जाता है कि दक्षिण भारत में शासन करने वाले अधिकांश राजवंशों द्वारा इस मंदिर का निर्माण और विस्तार कराया गया होगा.

चूंकि यह मंदिर मैसूर से ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए कहा जाता है कि टीपू सुल्तान की भी इस मंदिर के प्रति अपनी रुचि थी. कहते हैं वह यहां के पुजारियों का सम्मान करता था. यही नहीं अंग्रेजों के साथ हुए एक युद्ध में मिली जीत का श्रेय उसने यहां के ज्योतिषों को दिया था. उसका मानना था कि उनकी सलाह के कारण ही ऐसा हो सका. इसके लिए ज्योतिषियों के सम्मान के साथ-साथ मंदिर को आर्थिक रुप से सहयोग भी दिया था.

यह तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में स्थित बेस्ट टूरिस्ट स्पाट में से एक है. यही कारण है कि यहां भगवान रंगनाथ के दर्शन के लिए देशभर से ही नहीं, बल्कि विश्व के कोने-कोने से एक बड़ी संख्या में यहां सैलानी आते हैं. यह मंदिर इतना बड़ा है कि आप अपना पूरा दिन यहां बिता सकते हैं. यह 21 गोपुरमों से मिलकर बना हुआ है.

Mini Gopuram, Sri Ranganathaswamy Temple (Pic: anubimb.com)

यहां मौजूद 236 फ़ीट ऊंचा मंदिर का मुख्य गोपुरम आकर्षण का केंद्र माना जाता है. इसे ‘राजगोपुरम’ कहा जाता है. यहां आप देखेंगे कि मंदिर का ऊपरी भाग पूरी तरह से सोने से जड़ा हुआ है. मंदिर में आपको भगवान विष्णु की अद्भुत मूर्ति देखने को मिलेगी. वह शायन की मुद्रा में है. उनके इस स्वरूप को ही ‘श्री रंगनाथ’ के नाम से पूजा जाता है. इसके अलावा यहां आपको अन्य देवी-देवताओं को समर्पित देवालय भी देखने का मिलेंगे. वास्तु कला की बात की जाये तो यहां आपको तमिल शैली की बहुलता मिलेगी.

आसपास घूमने लायक 5 अन्य स्थल

  • भारतीय पैनोरमा: 1.4 किमी दूर स्थित है.
  • जंबुकेश्वर मंदिर: 1.6 किमी दूरी पर मौजूद है.
  • श्री रंगम रंग नाथर मंदिर: 1.7 किमी दूर स्थित है.
  • रॉकफोर्ट यूसीची पिल्लार मंदिर: 4.5 किमी दूर है.
  • श्रीरंगम मेलूर अय्यर मंदिर: 1.7 किमी दूर ‘मेलूर’ में है.

यह सारे स्थल ‘श्री रंगनाथस्वामी मंदिर’ से महज कुछ दूरी पर स्थित हैं इसलिए इन तक आसानी से पहुंचा जा सकता है.

ट्रिप की संभावित लागत

  • कैसे पहुंचे: ट्रेन से दिल्ली से तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की दूरी लगभग 2525 किमी. है. चूंकि यह एक लम्बी दूरी है, इसलिए कम बजट के लिहाज से ट्रेन का सफर ज्यादा आसान रहेगा. दिल्ली से आप लगभग 3225 रुपये के सेकेंड एसी के टिकट के साथ पहुंच सकते हैं. आगे मंदिर तक पहुंचने के लिए आप वहां से लोकल टैक्सी आदि का प्रयोग कर सकते हैं, जिसके लिए आपको नार्मल भुगतान करना होगा.
  • कहां ठहरें: तमिलनाडु का तिरुचिरापल्ली, मुंबई जैसे मंहगा नहीं है. यहां आप अपनी सुविधा अनुसार 2000 से 4000 तक के बजट का कोई होटल प्रतिदिन के हिसाब से ले सकते हैं.
  • क्या खाएं: वैसे तो जब तक आप होटल में रहेंगे, तब तक आपके लिए वहां खाने का सारा इंतजाम होगा. फिर भी आप साउथ इंडियन खाने के विभिन्न व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं. बताते चलें कि केले के पत्ते को थाली के रुप में देखना आपके लिए अदभुत हो सकता है, खासकर नार्थ इंडियन लोगों के लिए.

Enjoy Foods (Pic: mygreedy)

उम्मीद है कि आप भी ‘रंगनाथ स्वामी मंदिर’ में जाने का मन बना चुके हैं. तो देर किस बात की फट से टिकट बुक करिये और घूम के आईये. हां नीचे दिए कमेंट बॉक्स में प्रतिक्रिया देना मत भूलियेगा.

Web Title: History of Sri Ranganathaswamy Temple, Hindi Article

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