लद्दाख अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर है. जम्मू-कश्मीर के उत्तर-पूर्व में बसी हुई इस जगह की खूबसूरती का जितना बखान किया जाए, उतना ही कम है.

यहाँ पर मौजूद चट्टान को देखकर मानो ऐसे लगता है जैसे आसमान को छू रहे हों. लद्दाख में बहने वाली हवाएं और शांति इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं.

यहाँ का परिदृश्य देखकर लगता है जैसे वाकई में कुदरत यहाँ बसता है. यहाँ का परिदृश्य है ही इतना जादुई सा.

इस सुंदर परिदृश्य में फुक्तल मोनेस्ट्री नाम की एक ऐसी अनोखी जगह है, जिसे देखकर आप का मन बाग-बाग हो जाएगा. साथ ही, आप इस ढाँचे को देखकर हैरान भी हो जायेंगे.

अगर आप इन छुट्टियों घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो, फुक्तल मोनेस्ट्री एक बेहतर जगह है.

तो आइये चलते हैं, जम्मू और कश्मीर में मौजूद इस सुंदर ‘फुक्तल मोनेस्ट्री’ के सफर पर-

मधुमक्खी के छत्ते की तरह लटकता सा होता है प्रतीत

फुक्तल मोनेस्ट्री किसी भी यात्री के लिए बहुत रोमांचित करने वाली जगह है. यहाँ लोगों की भीड़भाड़ से दूर आपको एक अलग तरह का अनुभव मिलेगा.

यह मधुमक्खी के छत्ते की तरह पहाड़ों पर बना हुआ है. यह बिलकुल गुफाओं के मुंह पर ही बना हुआ है. इसे देखकर आप बिल्कुल हैरान रह जाएंगे.

इसका ढांचा बेहद शानदार है. इस मोनेस्ट्री का इतनी खतरनाक जगह पर होना, इसे और भी ज्यादा खास बनाता है.

लोग इसकी लोकेशन को जब देखते हैं तो, दांतों तले उंगली दबा लेते हैं. लेकिन, यह बहुत अफसोस की बात है कि इतने नायाब ढांचे और मोनेस्ट्री को इतनी ख्याति नहीं मिली.

Phugtal Monastery Is One Of The Unique Monastery Of India (Pic: adventure)

प्राकृतिक गुफाओं पर बनी है ये मोनेस्ट्री

लद्दाख में बंजर जैसा दिखने वाला यह परिदृश्य टूरिस्टों को अपनी और बहुत आकर्षित करता है. आप जरा कल्पना कीजिए, आप ऊँची पहाड़ियों पर, पथरीले रास्तों पर पहाड़ी रास्तों पर ट्रेकिंग कर रहे हैं. कितना रोमांचकारी होगा न!

ऐसे में इस जगह को और करीब से जानने की कोशिश करते हैं.

पहाड़ियों पर मौजूद यह मधुमक्खी के छत्ते जैसा डेस्टिनेशन. यह मोनेस्ट्री ऐसी लगती है मानो पहाड़ों पर लटक रही हो.

यह लद्दाख की लग्न घाटी पर स्थित है. आज यहाँ जो मोनेस्ट्री मौजूद है उसे प्राकृतिक गुफाओं पर बनाया गया.

माना जाता है कि इन गुफाओं में बौध भिक्षु अपना ध्यान लगाया करते थे. इन गुफाओं को बहुत पवित्र माना गया. यहाँ बौध भिक्षु शान्ति की खोज में आये.

माना जाता है कि यहाँ ये प्राकृतिक गुफाएं लगभग 2,500 साल पहले से मौजूद थी. जिसके बाद यहाँ मोनेस्ट्री का निर्माण हुआ. बौध भिक्षु, संत और स्कॉलर, इस जगह को मैडिटेशन के लिए सबसे उपयुक्त जगह मानते रहे हैं. कहते है कि यह स्थान आध्यात्मिक ज्ञान के लिए सबसे उपयुक्त है.

पैदल या घोड़े की सवारी द्वारा ही यहाँ पहुंचा जा सकता है

इस जगह को फुक्तल मोनेस्ट्री या फिर फुगतल मोनेस्ट्री के नाम से जाना जाता है. लद्दाख की लोकल भाषा ज़नस्कारी कहलाती है.

वहां ‘फुक’ का मतलब गुफा होता है और ‘थल’ का मतलब खाली समय होता है. फुक्तल को शांति और अध्यात्म के अहसास के लिए एक छिपी हुई जगह माना जाता था.

फुक्तल मोनेस्ट्री में जाने के साधन के बारे में आप सुनेंगे तो, आप और भी ज्यादा उत्साहित हो जाएंगे.

पहाड़ी के रास्ते द्वारा उस स्थान तक पहुँचने के लिए आप के पास दो विकल्प हैं. यह जाने के लिए या तो आप पैदल जाएँ यह फिर गधे, खच्चर या फिर घोड़े की सवारी करते हुए जाएँ.

यह सवारी बहुत मजेदार होती है. इसके जरिये अपने गंतव्य तक पहुँचने की तो बात ही कुछ और है.

A Beautiful View From The Natural Caves Of Phuktal (Pic: chetan)

दो बहुत खूबसूरत गाँव भी इसके पास मौजूद

इस जगह से जुड़ी हुई एक ख़ास बात ये भी है कि यहाँ दो बहुत खूबसूरत गाँव बसे हुए हैं. इन गाँवों का नाम चा औए अनु है. यह हरी धरती इतनी हरी भरी है कि इसे देखते ही मन मोह जाता है.

घाटी में मौजूद इस गाँव का दृश्य बिलकुल किसी पेंटिंग की सीनरी जैसा दिखाई पड़ता है. ऐसा लगता है मानो इसे जगह पर वाकई में खुदा की रहमत है. 

इसकी सुन्दरता कुछ ऐसी नजर आती है कि एक तरफ मोनेस्ट्री बंजर जैसी दिखाई देती है. वहीं दूसरी ओर यह गाँव हरा-भरा.

रास्ते में मौजूद हैं कई सारे स्तूप और शिलालेख

14वीं शताब्दी में जन्ग्सेम शेरप जंगपो ने फुक्तल मोनेस्ट्री की स्थापना की थी. यह बौध धर्म के गेलुग विद्यालय से संबंधित है. यह विद्यालय तिब्बत में नया है, जो बुद्ध की सीख पर ही आधारित है.

पहाड़ों में मौजूद यह यह परिदृश्य आपको एक अलग ही दुनिया की सैर करवाएगा.

अनोखी बात तो यह है कि फुक्तल तक पहुँचने का रास्ता ही अपने आप में एक तोहफा है. इसके रास्ते में ही कई सारे स्तूप और शिलालेख हैं, जो अपनेआप में अद्भुत है.

यहाँ की अनोखी और रंग-बिरंगी दीवारों के पैटर्न भी बेहद सुंदर हैं. बता दें, फुक्तल मोनेस्ट्री ज़न्सकर घाटी पर है. जो कि वहां का एक रिमोट एरिया है.

इसके अलावा, यह भारत की सबसे अनोखी जगहों में से भी एक है.  

Inscriptions Which Are There On The Way To Phuktal Monastery (Pic: sandeep)

गुफा में मौजूद है पुस्तकालय, रसोईघर और...

यह मोनेस्ट्री में मंदिर, पुस्तकालय, धार्मिक ग्रंथ, रसोई घर, शिक्षा सम्बन्धी सुविधाएं, प्राथना घर, रहने के लिए कमरे हैं.

माना जाता है कि साल 1826-1827 के दौरान, एलेग्जेंडर क्सोमा डे कोरोस भी यहाँ आकर कुछ दिनों तक रहे थे. यह हंगरी का एक फिलोजिस्ट थे.

यहाँ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद उन्होंने एक डिक्शनरी लिखी थी. यह पहली इंग्लिश-तिब्बती डिक्शनरी है.

अब आप सोच रहे होंगे कि यहाँ तक पहुंचा कैसे जाए?

तो इसकी टेंशन बिलकुल नहीं ले. मोनेस्ट्री तक पहुँचने के लिए आपको पदुम के रास्ते होकर जाना पड़ेगा. दरअसल, पदुम फुक्तल मोनेस्ट्री और हिमाचल के दर्चा के रास्ते को जोड़ता है.

इसके अलावा, ऐचेर ब्रिज के जरिये भी अनु चा गाँव तक पहुंचा जा सकता है. 

A Beautiful Zansken Valley (Pic: Sandeep)

तो आपने देखा कि यह जगह कितनी सुंदर और अनोखी है. इसके साथ ही, मोनेस्ट्री को वो ख्याति नहीं प्राप्त है, जिसकी यह हक़दार है. आपको भी अगर कुछ ऐसी जगहों के बारे में पता है तो हमारे साथ कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें.

Web Title: Phuktal Monastery , Which Looks Like A Honeycomb, Hindi Article

Feature Image Credit: todayshomepage