गर्मी की छुट्टियों के लिए जब कभी आप अपने परिजनों और मित्रों के साथ कोई प्लान करते हैं, तो मनाली, कश्मीर आदि पर्यटन स्थलों के नाम आपके सामने घूमने लगते हैं. ऐसे में अगर हम कहें कि “कहां पड़े हो चक्कर में कोई नहीं है गांवों की टक्कर में”, तो शायद आपके मुंह से हंसी फूट पड़े, लेकिन यकीन मानिए, गांवों से बेहतर कोई और जगह गर्मियों की छुट्टियों के लिए हो ही नहीं सकती, तो आइये चलते है गांवों की सैर पर:

दादी के घर में आनंद की डुबकी

शहरों की चमक से खुद को थोड़ा सा दूर करते हुए, अगर आप बचपन की यादों में लौटने का प्रयास करें, तो पायेंगे कि बचपन में गर्मी की छुट्टी की बात सुनकर ही आपके मन में तुरंत दादी के घर का दृश्य उतर आता होगा. शायद आपको इस दिन का बेसब्री से इंतजार भी रहता होगा कि कब छुट्टियां शुरू हों और आपको गांव जाने का मौका मिले. चूंकि

आप छुट्टियों का मजा लेने के लिए गांव जाते थे, इसलिए किताबें ले जाने का तो कोई मतलब ही नहीं. हां आप अपने साथ कैरमबोर्ड, बैडमिंटन जैसे कई आधुनिक खिलौने जरुर साथ ले गए होंगे, ताकि उनका वहां सही प्रयोग हो सके, लेकिन वहां जाने के बाद भी वो बेकार ही रह जाते होंगे.

चूंकि वहां हाथ से बनाए गए मिट्टी के खिलौने, पुरवे से बनाया गया तबला, ताश के खेल और गिट्टियों से खेलना ज्यादा दिलचस्प होता था. निश्चित रुप से आपको गांव में ऐसा लगता होगा कि मानो चैन और सुकून कहीं है, तो वो बस यहीं है. इसलिए सुकून को यहां-वहां मत खोजिए. उठिए, तैयार होइये और निकल पड़िये अपने-अपने गांवों की ओर..

Summer Vacations in Village (Pic: eyeem.com)

खेतों में यारों के साथ धमा-चौकड़ी

राम खेलावन, छुट्टन, बड़के, इन नामों से कुछ याद आता है आपको. नहीं आता तो ज़रा सा जोर डालिए अपनी स्मृतियों पर. निश्चित तौर पर ऐसे ही कुछ नाम रहे होंगे, जो भरी दोपहरी में आपके साथ हुड़दंग के लिए साथ हो लिया करते थे. घर के आसपास आपका यह हुड़दंग सजा का कारण बन सकता था, इसलिए हाथों में नमक की पुड़िया लेकर

आप अक्सर खेतों में मौजूद आम के बगीचों की ओर दौड़ पड़ते होंगे. जहां गांव के दोस्त पेड़ से अमिया तोड़ने में आपकी मदद करते होंगे. कई बार तो आपको बगीचे की रखवाली में लगे किसी सुमेर दादा ने दौड़ाया भी होगा, लेकिन आप कहां मानते होंगे. थोड़ी देर बाद फिर चुपके से आकर आखिर अमिया तोड़ ही लेते होंगे.

इतना ही नहीं साथ लाए नमक के साथ इसका आंनद लेने में भी देरी नहीं करते होंगे. इससे इतर दूसरों के खेतों से तोड़े टमाटर और जामुन से जब आपकी थैलियां भर जाती होंगी तो आपके चेहरों पर आनंद की चमक देखने लायक होती होगी. निश्चित रूप से यह ख़ुशी पैसों से भरा पर्स देखकर भी आपको नहीं मिलती होगी. पूरे दिन की धमा-चौकड़ी के बाद दिनभर घूमकर जब आप घर पहुंचते होंगे तो आपका भेष देखकर मम्मी का पारा चढ़ जाता होगा, जिससे बचने के लिए अक्सर आप दादी की ओर भाग जाते होंगे और दादी आपकी मम्मी से कहती होगी, बहू हाथ लगाया तो समझ लेना. इस सबका आंनद अभी भी लिया जा सकता है. बस आपको इतना करना है कि गांव जाने का मन बनाना है. अपने बच्चों के साथ बच्चे बनने का सही समय यही है. क्या कहते हो?

देशी पकवान का जायका

अगर आप कभी भी गांव गए होंगे तो, निश्चित रुप से आपको किसी भी पांच सितारा होटल तक के खाने में वो स्वाद नहीं मिला होगा जो गांव के खाने में होता है. चने के साग के साथ मक्के की रोटी का असली जायका भला गावों के अलावा और कहां है? आपको गांव का गुड़, गन्ना, कोल्हू, खान-पान, साग-रोटी, मट्ठा, दूध, दही आदि और कहां मिलेंगे. गांव के खानपान का टेस्ट जब कहीं और नहीं, तो कहीं और जाने के बारे में क्या सोचना, चलिए गांव की ओर चलते हैं.

Summer Vacations in Village (Pic: tarladalal.com)

खेतों में क्रिकेट टूर्नामेंटों की खुमारी

अगर आप क्रिकेट प्रेमी है तो गांवों में होने वाले टूर्नामेंट से बेहतर क्रिकेट का रोमांच आपको कहीं और नहीं मिल सकता. अगर आप गांव गए होंगे तो आपने देखा होगा कि गर्मियों में बैल से जुते खेत में अक्सर क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है. आसपास के गांव की टीमें रंग-बिरंगे परिधानों में आपके गांव आती होंगी. किसी पेड़ के नीचे कमेन्टरी के लिए लाए गए साउंड सिस्टम को तो आपने देखा ही होगा, जिसका सुर एक बार बिगड़ जाए तो सुधारने में सभी दिग्गजों को लगना पड़ जाता था. इसके अलावा खाने के लिए पूड़ी-सब्जी का भी पूरा इंतजाम. अब सोचिए ऐसा रोमांच आपको गांवों से बाहर कहीं मिल सकता है. बिलकुल नहीं, क्योंकि यह गांव की संस्कृति है. जिसको पाने के लिए गांव ही जाना होता है.

एसी को मात देने वाली ठंडी बयार

आपको शायद एहसास नहीं होगा कि आपके गर्मियों की छुट्टियों से पहले आपकी दादी आपके लिए पूरी तैयारी कर लेती होगी. तभी तो आपको पहुंचने पर सत्तू, लाई, अचार सब एकदम तैयार मिल जाता होगा. आपकी दादी को पता होता होगा कि उन्हें दो महीने तक शैतानियों के बादशाहों को झेलना है. शायद आपके गांव में बिजली भी नहीं होती होगी, लेकिन एसी को मात देने वाली पेड़ की ठंडी बयार जरुर होती होगी. शाम होते ही आपको चारों तरफ उड़ते जुगनु भी दिखाई देते होंगे, जिनका प्रकाश पांच सितारा होटल के प्रकाश से ज्यादा रोमांचिक करने वाला होता होगा.

आपने छत पर अपनी पंसदीदा जगह पर सोने के लिए झगड़ा भी किया होगा और जगह न मिलने पर नानी की गोद में सिर रखकर सो जाते होंगे. हालांकि नींद जल्दी नहीं आती होगी, क्योंकि खुले आसमान के तले लेटकर तारों को टिमटिमाते देखने का मौका रोज-रोज कहां मिलता होगा आपको.

तो क्यों न आप इस बार गर्मियों की छुट्टियों में गांव चले जाएं, ताकि फिर से आपको आसमान के तारों को गिनते-गिनते सो जाने का एहसास मिल सके.

कुल मिलाकर गर्मियों की छुटिटयों को गांव में बिताना रोमांचकारी हो सकता है. साथ ही आपके बच्चों और दोस्तों को उन चीजों को महसूस करने का मौका मिलेगा, जिसे कोई भी अन्य पर्यटक स्थल नहीं दे सकता. कुल्लू मनाली आदि सौंदर्यता से पटे हो सकते हैं, लेकिन दादी की गोद, सुमेर दादा और बागों से चुराकर अमिया खाने का आनंद आपको वहां नहीं मिलेगा. तो क्या कहते हैं जायेंगे इस बार गांव… आपका तो पता नहीं लेकिन मैं तो जा रहा हूं.

Summer Vacations in Village (Pic: myclassdays)

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