जब से दिल्ली में रहना हुआ है, तब से हर महीने किसी न किसी जगह वीकेंड पर जाने का प्लान बन ही जाता है. इस बार भी हम सभी साथी शाम की चाय पर साथ थे. अचानक कहीं बाहर ट्रिप प्लान करने की बात उठी तो मैंने तुरंत जयपुर चलने का प्रस्ताव रख दिया. कुछ साथी मुझसे सहमत थे, तो कुछ अजमेर और पुष्कर की रट लगाए हुए थे. अंतत: तय हुआ कि हम तीन दिन की ट्रिप पर निकलेंगे और तीनों जगहों को एक-एक करके कवर करेंगे.

जयपुर-अजमेर व पुष्कर एक साथ क्यों?

जयपुर-अजमेर व पुष्कर की सैर पर एक साथ निकलने के दो बड़े कारण थे. पहला यह है कि हमारे ग्रुप की अलग-अलग राय थी और दूसरा यह है कि दिल्ली से यह महज 450-500 किमी के आसपास थे. इनको हम आसानी से कम समय में देख सकते थे. हम गुरुवार की रात को दिल्ली छोड़कर, शुक्रवार की सुबह आसानी से जयपुर निकल सकते थे, जिसके बाद सुबह का नाश्ता लेकर हम कुछ देर आराम करके आगे के दिन को जयपुर की सुंदरता का दीदार कर सकते थे. फिर वहां से शुक्रवार की रात में सफर करके शनिवार को पहले अजमेर और बाद में पुष्कर की सैर कर सकते थे.

साथ ही वहां से हम रविवार को दिल्ली पहुंचकर आराम कर सकते थे, ताकि हमारे अगले दिन का वर्किंग-डे खराब न हो, इसलिए हमने जयपुर-अजमेर व पुष्कर को एक साथ घूमने का प्लान किया था. वैसे भी बार-बार कहां निकलना हो पाता है, इसलिए सोचा एक साथ तीनों को निपटा लेते हैं.

Weekend in Jaipur, Ajmer and Pushkar With 4100 Rupees (Pic: mensxp.com)

सफर के लिए कैब हायर करने की वजह

दिल्ली से जयपुर-अजमेर व पुष्कर तीनों की ही दूरी कम थी, इसलिए हमने समय की बचत के लिए दिल्ली से एक टैक्सी हायर कर ली. इसके पीछे दूसरा कारण यह भी था कि हम अपने टाइम को अपने हिसाब से मैनेज करना चाहते थे. साथ ही अपनी डेस्टिनेशन पर पहुंचने पर अलग से गाड़ी करने के झंझट से भी बचना चाहते थे. इस ट्रिप के लिए हायर की गई टैक्सी के लिए हमें 10 रुपए प्रति किमी. के हिसाब से पे करना था. स्टेट टैक्स और टोल अतिरिक्त. चूंकि हम संख्या में 6 थे, इसलिए हमारी जेब पर ज्यादा बोझ पड़ने वाला नहीं था.

हम सब इस यात्रा के लिए बहुत उत्साहित थे. यह उत्साह वाजिब भी था. असल में भोर होते ही हम उन शहरों की सैर पर निकलने वाले थे, जिनके बारे में हमने अभी तक सिर्फ सुना था. जयपुर के शाही महल, अजमेर की ख्वाजा मुइन-उद दीन चिश्ती दरगाह और पुष्कर के मंदिर को अपनी आंखों में लेकर कब हमारी आंख लग गई पता ही नहीं चला. रात के लगभग 1 बजे कैब चालक मनोज के फोन ने हमारी नींद तोड़ी. वह अपने समय से पिक अप पॉइंट अक्षरधाम पहुंच चुका था.

नींद में पहुंचे हम ‘गुलाबी शहर’ जयपुर

जैसे-तैसे हम अपने सामान के साथ गाड़ी तक पहुंचे और अपने बैग्स को लोड किया. हम नींद में थे इसलिए बिना बात किए हुए गाड़ी में सवार हो गए. हमें इल्म था कि जयपुर पहुंचने में हमें लगभग 5 घंटे लगेंगे, इसलिए हमने सोना उचित समझा, ताकि सुबह नई ताजगी के साथ हम जयपुर का दीदार कर सकें. योजना के तहत हम सुबह सवेरे ही जयपुर लगभग 6 बजे पहुंच चुके थे. अब हमारे सामने चुनौती थी कि हम कहां ठहरें? फिलहाल, हमने सड़क के किनारे बन रही गरम-गरम चाय की चुसकियां लेना उचित समझा.

इसी दौरान हमने तय किया कि हम एक-दो घंटे के लिए कहीं ठहरने के लिए कोई जगह लेंगे, ताकि फ्रेश होकर जयपुर के गुलाबी रंग का दीदार कर सकें. साथ ही हमारे ड्राईवर बाबू को भी तो कुछ घंटे आराम करना था. देर न करते हुए हमने 500 रुपए के हिसाब से तीन कमरे बुक किए. वहां 3-4 घंटे आराम किया, फिर सुबह का नाश्ता करके हम निकल पड़े जयपुर के सैर सपाटे पर…

Weekend in Jaipur (Pic: zemsib.com)

राजस्थानी भोजन व ई-रिक्शा की सवारी

शाम के 6-7 बजते-बजते हम आमेर किला, जल महल, नाहरगढ़ और हवा महल को देख चुके थे. सच में हवा महल का दीदार करना अद्भु्त था. यहां की ठंडी हवा के सामने हमारा एसी भी शर्मा जाता. खैर, जयपुर में अभी भी बहुत कुुुछ बचा हुआ था देखने के लिए, लेकिन हम दिनभर घूमकर थक चुके थे. ऊपर से दोपहर का खाना न खाने के कारण हमारे पेट में चूहे कूद रहे थे. हमने तय किया कि भाई पहले कुछ खायेंगे उसके बाद देखेंगे कि क्या करना है. स्थानीय लोगों की मदद से जल्दी ही हम एक ढाबे में पहुंच गये. ढाबा इसलिए, क्योंकि हम राजस्थानी थाली का असली स्वाद चखना चाहते थे. सच कहे उस दिन खाये गये खाने का स्वाद अभी तक जुबान से नहीं गया. खाना खाते-खाते हमें रात के नौ बज गये थे.

कृत्रिम दूधिया लाइट से पटा गुलाबी जयपुर बहुत शानदार लग रहा था. रात में फिर से ड्राईवर बाबू को गाड़ी चलानी थी, इसलिए हमने उन्हें कुछ देर आराम करने को कहा. हम सोच रहे थे इस बीच हम क्या करेंगे, तभी एक बैटरी वाले रिक्शे पर हमारी नजर पड़ी, हमने सोचा क्यों न खुली हवा में जयपुर की सड़कों का जायजा लिया जाये. हम निकल पड़े दो बैटरी रिक्शों में घूमने के लिए. 200 -200 के हिसाब से हमने 3 घंटे के लिए रिक्शे बुक कर लिए. रिक्शे वाले जिंदादिल थे. उन्होंने जयपुर म्यूजियम रोड से लेकर हर उस चौड़ी सड़क पर घुमाया, जहां भीड़-भाड़ बिल्कुल न थी. सभी नजारे शानदार थे. देखते ही देखते कब वक्त बीत गया हमें पता ही नहीं चला.

देर रात निकल पड़े अजमेर क्योंकि…

देर रात हमने 1 बजे के आसपास फिर से चाय की चुस्कियां लीं और निकल पड़े अजमेर की ओर. जयपुर से अजमेर ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए गाड़ी वाले भाई साहब से धीरे-धीरे आगे बढ़ने को कहा. खुली खिड़कियों से आने वाली हवा और किशोर दा के गानों के बीच कब हम सबकी आंखे कब लग गईं कि पता ही नहीं चला. सुबह सवेरे 4 बजे के आसपास आंख खुली तो हम अजमेर में थे. जयपुर की तरह यहां भी हमने कुछ घंटों के लिए 400-400 रुपये के तीन कमरे बुक किए और कुछ घंटे वहां आराम किया. होटल से निकलकर सबसे पहले हमने खाना खाया, फिर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शरीफ की ओर रुख किया.

यहां के बारे में जितना सुना था, यह उससे भी ज्यादा सुंदर स्थान था. पूरा परिसर सफेद संगमरमर से पटा पड़ा था. वहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि इस दरगाह में सच्चे मन से मांगी जाने वाली दुआ जरुर कबूल हो जाती है. सच क्या है भगवान जाने, लेकिन हमने वहां नतमस्तक होकर बेहतर भविष्य की दुआ जरुर मांगी थी.

यहां से निकलकर हमने यहां के म्यूज़ियम, लाल पत्थर का जैन मंदिर और अनसागर झील का भी आनंद लिया. सच कहें तो हमें यहां जयपुर से ज्यादा आनंद आ रहा था. अब आप कहेंगे कैसे? तो सुनिए, असल में अजमेर इतना सुंदर होगा हमने कभी सोचा नहीं था. हमने सिर्फ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शरीफ के बारे में सुना था, लेकिन यहां की कृत्रिम अनसागर झील ने हमारा मन मोह लिया था.

Weekend in Jaipur, Ajmer (Pic: mapsofindia.com)

दूसरे दिन की शाम पुष्कर के नाम

चार बजे के आसपास हम पुष्कर के लिए निकल पड़े. असल में हम वहां के मंदिरों में शाम के समय में होने वाली आरती में शामिल होना चाहते थे. ड्राईवर बाबू को अजमेर से पुष्कर की लगभग 16 किमी. (Link in English) की दूरी तय करने में ज्यादा वक्त नहीं लगा. हम 5:30 के आसपास पुष्कर में थे. वहां हमने रात के लिए 1000-1000 के हिसाब से तीन रूम लिए. जल्दी से अपने-अपने कमरों में पहुंच कर स्नान लिया और शाम की आरती के लिए मंदिर जा पहुंचे. आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करते हुए हमने तय किया होटल में आराम करेंगे और सुबह उठकर बाकी मंदिरों के दर्शन करते हुए दिल्ली लौट चलेंगे.

इच्छा तो बहुत थी रात में पुष्कर को निहारने की, किन्तु हम थक चुके थे. बाहर जाने की हिम्मत हमारे अंदर नहीं थी. खाने तक के लिए हम बाहर नहीं गये. हमारी आंख कब लग गई हमें पता ही नहीं चला. रविवार की सुबह हम जल्दी उठ गए, क्योंकि हमें पहले पुष्कर को देखना था और फिर दिल्ली वापस जाना था. ब्रह्मा मंदिर को देखते हुए हम ऊंट की सवारी के लिए गए. इस सब में दोपहर हो चुकी थी, इसलिए हमने पुष्कर में ही दोपहर का खाना खाया और दिल्ली के लिए वापस अपनी गाड़ी में सवार हो गये.

ट्रिप की कुल लागत

  • खर्च 3 रात की लागत (प्रति व्यक्ति): होटल, लगभग 1900 रुपये
  • दिल्ली से आने-जाने में खर्च (प्रति व्यक्ति) : 1700 रुपये
  • खाने में खर्च (प्रति व्यक्ति): 500 रुपये

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कुल खर्च: लगभग 4100 रुपए
(*यह खर्च अलग-अलग जगहों और टैरिफ के हिसाब से बदल सकता है)

Weekend in Pushkar (Pic: triposo.com)

रात 9 बजे हम सारे साथी दिल्ली के उसी फ्लैट में बैठकर चाय पर चर्चा कर रहे थे, जैसे इस यात्रा पर जाने से पहले. बस फर्क इतना था कि उस दिन हम ट्रिप पर जाने के लिए लड़ रहे थे और आज ट्रिप की यादों की चर्चा कर रहे थे. सच मानिए इस ट्रिप को कई हफ्ते बीत गये हैं, लेकिन यादें आज भी ताजा हैं.

Web Title: Weekend in Jaipur, Ajmer and Pushkar With 4100 Rupees, Hindi Article

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