इस समय भारत के केरल राज्य में मौत की लहर चल रही है. हर कोई खौफ से भरा हुआ है. कोई नहीं जनता कि आखिर अगली मौत किसकी होगी. इस डर का कारण है 'निपाह' नाम का एक अनजान और खतरनाक वायरस, जो धीरे धीरे लोगों की जान ले रहा है!

निपाह नाम का यह वायरस बहुत ही खतरनाक माना जा रहा है. अचानक ही इसकी शुरुआत केरल में हुई जिसके कारण करीब दर्जन भर से ज्यादा लोगों की मौत अब तक हो चुकी है. जहां आम जनता अब डर के साए में जी रही है. वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग इस बात से परेशान हैं कि आखिर इसे फैलने से कैसे रोका जाए...

तो चलिए आज जानते हैं इस खतरनाक वायरस के बारे में–

मलेशिया बना सबसे पहला शिकार...

अधिकांश दुनिया ने निपाह वायरस के बारे में अभी हाल ही में सुना है. जब केरल में लोगों की मौत हुई, तो यह वायरस एक मुख्य खबर बनके सामने आया. हालांकि यह निपाह वायरस बहुत पहले ही वजूद में आ गया था. यह कब से शुरू है यह, तो कोई भी पूरी तरह से नहीं जानता है. हालांकि इसका सबसे पहला केस 1999 में सामने आया था.

निपाह के फ़ैलाने की शुरुआत मलेशिया के सूअर पालने वाले किसानों के साथ हुई थी. वहां पर कुछ किसानों में यह वायरस देखने को मिला था. हालांकि कहते हैं कि इसके बाद वहां कोई और केस सामने नहीं आया. इसलिए यह वायरस की बात हर किसी के ज़हन से निकल गई.

थोड़े समय बाद जाकर थोड़ी बहुत जानकारी लग पाई उन किसानों के बारे में. डॉक्टरों को थोड़ा सा अंदाजा हुआ था कि यह एक तरह का वायरस है मगर कोई भी पक्के तौर पर इसके बारे में नहीं जान पाया.

हालांकि दो साल बाद 2001 में बांग्लादेश में निपाह के लक्षण देखे गए. माना जाता है कि उस दिन के बाद से हर साल बांग्लादेश में निपाह के कुछ केस दिख ही जाते हैं. इस साल जैसे ही भारत में इस वायरस की खबर आई, तो यह अचानक ही विश्व भर में प्रसिद्ध हो गया.

Nipah Virus First Showed In Malaysian Pig Farmer (Representative Pic: japantimes)

चमगादड़ हैं इसकी सबसे बड़ी वजह!

विशेषज्ञों की माने, तो निपाह एक ज़ूनोसिस वायरस है. आसान भाषा में कहा जाए, तो यह एक ऐसा वायरस है, जो जंगली जीवों से इंसानों और बाद में इंसानों से दूसरे इंसानों तक फ़ैल सकता है. माना जाता है कि इसे सबसे ज्यादा एक ख़ास प्रकार के चमगादड़ फैलाते हैं, जो फलों को खाते हैं.

इन चमगादड़ों को फ्रूट बैट के नाम से जाना जाता है. इन चमगादड़ों में टेरोपस जीन्स वाले ही इस वायरस को फैला पाते हैं. यही इस निपाह वायरस को फैलाने के मुख्य कारण हैं. अगर यह चमगादड़ किसी फल को खाते हैं और कोई इंसान या जानवर उस फल के संपर्क में आ गया तब यह उसपर भी हावी हो जाएगा.

यह इंसान से दूसरे इंसान तक आसानी से फ़ैल सकता है. इसलिए यह बहुत ज्यादा घातक बन जाता है. यह वायरस आसानी से हवा के जरिए भी फ़ैल सकता है. यही कारण है कि यह दिन ब दिन फैलता जा रहा है और किसी को कोई खबर भी नहीं है.

Fruit Bat Spread The Virus (Pic: picanimal)

आसानी से पकड़ में नहीं आता 'निपाह'

निपाह वायरस को आसानी से नहीं पकड़ा जाता. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके सभी लक्षण किसी आम बीमारी की तरह होते हैं. बुखार, सिर दर्द, गला दर्द, उलटी होना और शरीर में दर्द होना यह सब इसके लक्षण हैं.

हालांकि सबसे अहम् बात यह है कि यह सब बहुत आम हैं. बदलते मौसम के साथ अगर कोई बीमार पड़ता है, तो उसे इन सब चीजों का सामना करना पड़ता है. यही कारण है कि निपाह के शुरूआती समय में लोग इसको गंभीरता से नहीं लेते हैं.

हालांकि जब यह चीजें लंबे समय तक जारी रहती हैं, तब लोगों को अंदाजा होता है कि कोई दिक्कत है. यही कारण है कि अभी तक भारत में इसके कारण इतनी मौत हो चुकी हैं.

Its Really Hard To Caught Nipah Virus (Pic: time)

अब तक नहीं है कोई इलाज!

निपाह वायरस को जो चीज सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है वह यह है कि इसका कोई इलाज नहीं है! मेडिकल साइंस में अभी तक इसपर इतनी रिसर्च हो ही नहीं पाई है कि कोई इसकी दवा बना पाए.

ये चीज इस वायरस को और भी ज्यादा खतरनाक बना देती है. भारत में फैलने के बाद अब दूसरे देशों में लोग इसके नाम से ही कांपने लगे हैं. हर कोई इसका इलाज ढूंढनें में लगा हुआ है.

माना जा रहा है कि अगर इसे रोका नहीं गया, तो यह एक बहुत बड़ी परेशानी बनकर दुनिया के सामने आएगा. कहा जा रहा है कि निपाह बिलकुल इबोला वायरस जैसा है. इबोला ने भी ऐसे ही दुनिया भर में अपन कहर बरपाय था और निपाह भी उसी कगार पर है.

वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात से भी चिंतित हैं कि निपाह वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत होने के करीब 75 प्रतिशत चांस होते हैं. ऐसे में समय पर इलाज मिल गया तो ठीक, वरना मौत तैय है...

There Is No Cure For Nipah Virus (Representative Pic: wired)

नज़रंदाजी घातक हो सकती है...

निपाह वायरस की दवा भले ही नहीं है मगर हम अपनी सूझ भूझ से भी खुद को इससे दूर रख सकते हैं. इसे बचने के लिए बस थोड़ा सचेत होने की जरूरत है. इसमें सबसे पहला कदम है कि अगर आप अचानक ही बीमार या कमोजर महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत ही डॉक्टर को इसकी सूचना दें.

छोटी मोटी बीमारी समझकर इसे न टालें. पेड़ों के पास जाना या फिर भीड़ भरी जगह पर जाने से बचें. निपाह वायरस से बचने के लिए सफाई बहुत जरूरी है. यह जानवरों और इंसान दोनों से ही फ़ैल सकता है. इलसिए अपने आस पास की सफाई बहुत ध्यान से करें.

अपने जानवरों को भी घर के अंदर रखें ताकि वह बाहर इस वायरस की चपेट में न आ जाए. इन छोटी छोटी चीजों को ध्यान में रखकर आप खुद को निपाह के प्रकोप से बचा सकते हैं.

Hygiene Is Important To Prevent Nipah (Pic: cdac)

मौजूदा समय में निपाह और इबोला जैसी बीमारियाँ पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. माना जाता है कि वैज्ञानिक बहुत पहले से ऐसे वायरस से बचने के लिए दुनिया को सचेत कर रहे थे. हालांकि कहीं न कहीं नजरंदाजी रही जिसके कारण इस ओर कुछ खास काम नहीं हो सका.

हालांकि अब दुनिया इसे बहुत अहमियत देने लगी है. यही कारण है कि अमेरिका जैसे देशों ने ज़ूनोसिस बीमारीओं की खोज पर काम करना शुरू कर दिया है. उम्मीद है कि जल्द ही इन वायरस की दवा खोजी जाएगी और इसे फैलने से रोका जा सकेगा.  

Web Title: Everything About Nipah Virus, Hindi Article

Feature Image Credit: narayanahealth