प्रत्येक ‘मदर्स डे’ पर सोशल साइट्स पर मां के नाम ढ़ेर सारे पैगाम देखने और पढ़ने को मिलते हैं. किसी को मां के हाथ की भिंडी याद आती है, तो किसी को मां की लोरियां. कुछ संदेश तो ऐसे होते हैं, जिन्हें पढ़कर मन रुआसा सा हो जाता है. इन सबके बीच मन में एक सवाल है कि मां के लिए सिर्फ एक दिन मुक़र्रर कैसे हो सकता है. मां तो हर दिन, हर घंटे और हर पल के लिए मां है. खैर, ऐसे सवालों के जवाब बाद में ढ़ूढेंगे, फिलहाल आईये पढ़ते है मां पर बहुत कुछ लिखने वाले मुन्नवर राना साहब के कुछ शेर…

चाहे जिस इलाक़े की ज़बां बच्चे समझते हैं
सगी है या कि सौतेली है माँ बच्चे समझते हैं

मुझे बस इस लिए अच्छी बहार लगती है
ये भी माँ की तरह ख़ुशगवार लगती है

ज़रा-सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये,
दिये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

Best Quotes on Maa by Munawwar Rana (Pic: gendermatters.in)

मुनव्वर‘ मां के आगे यूं कभी खुलकर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊं

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में गज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है

बुलंदियों का बड़े से बड़ा निशान छुआ
उठाया गोद में मां ने तब आसमान छुआ

घेर लेने को मुझे जब भी बलाएं आ गईं
ढाल बनकर सामने मां की दुआएं आ गईं

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

जब तक रहा हूं धूप में चादर बना रहा
मैं अपनी मां का आखिरी ज़ेवर बना रहा

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

ऐ अंधेरे! देख ले मुंह तेरा काला हो गया
मां ने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

हादसों की गर्द से ख़ुद को बचाने के लिए
माँ ! हम अपने साथ बस तेरी दुआ ले जायेंगे

ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम अभी बूढ़ा नहीं होने देंगे

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊं

Best Quotes on Maa by Munawwar Rana (Pic: pinterest.com)

यहीं रहूंगा कहीं उम्र भर न जाउंगा
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊंगा

अभी ज़िन्दा है मां मेरी मुझे कु्छ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है

कुछ नहीं होगा तो आंचल में छुपा लेगी मुझे
माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी

जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई
देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई

दुआएं मां की पहुंचाने को मीलों मील जाती हैं
जब परदेस जाने के लिए बेटा निकलता है

दिया है मां ने मुझे दूध भी वज़ू करके
महाज़े-जंग से मैं लौट कर न जाऊंगा

बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
मां सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है

मुक़द्दस मुस्कुराहट मां के होंठों पर लरज़ती है
किसी बच्चे का जब पहला सिपारा ख़त्म होता है

खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी हैं गांव से
बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही

बहन का प्यार, मां की ममता, दो चीखती आंखें
यही तोहफ़े थे वो जिनको मैं अक्सर याद करता था

मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़—ए—माँ रहने दिया

मां के आगे यूं कभी खुल कर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता
जब तक जागती रहती है मां मैं घर नहीं जाता

मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है
किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है

आंखों से मांगने लगे पानी वज़ू का हम
काग़ज़ पे जब भी देख लिया मां लिखा हुआ

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,
मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी मां सज़दे में रहती है

मेरे चेहरे पे ममता की फ़रावानी चमकती है
मैं बूढ़ा हो रहा हूँ फिर भी पेशानी चमकती है

चलती फिरती आंखों से अज़ां देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

Best Quotes on Maa by Munawwar Rana (Pic: thestorypedia.com)

मुन्नवर राना के यह सारे शेर पढ़कर लगता है, मानो उन्होंने मां के अलफाज ही नहीं बल्कि हमारा और आपका कलेजा निकाल कर रख दिया है. उन्हीं के अलफाजों में कहा जाये तो..मुन्नवर भाई

अपनी मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए,
बदनाम ग़ज़ल को कोठे से मां तक घसीट लाए।।

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