भारत यूं तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यहां लोगों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार बनती है, लेकिन सत्ता की राजनीति कुछ यूं घूमती है कि ‘भ्रष्टाचार’ की दलदल में ‘जन प्रतिनिधि’ फंस ही जाते हैं. कई लोगों को अपने राजनेता होने पर अचानक से गुमान उभर जाता है. वह सोचने लगते हैं कि ‘राजनेता’ बनते ही उन्हें हर किस्म की सीमाएं लांघने का लाइसेंस मिल जाता है! पर जब कानून का डंडा चलता है तो फिर यही राजनेता ‘जेल की सलाखों’ के पीछे नज़र आते हैं. भ्रष्टाचार, दंगों और हत्या जैसे कई अन्य मामलों में तमाम ‘राजनेता’ समय-समय पर जेल जाते रहे हैं. नेता शक्तिशाली होते हैं और गलत होने पर अगर कानून उन्हें भी सजा देता है तो आम-ओ-खास सभी का कानून पर विश्वास मजबूत हो जाता है. आइये, अतीत में चलकर एक सूची तैयार करते हैं, जब कई पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और बड़े नेताओं को उनकी कारगुजारियों के लिए ‘जेल’ जाना पड़ा:

शशिकला नटराजन

विवेकानंदन श्रीकृष्णावेनी शशिकला! जी हाँ, हाल-फिलहाल यह नाम सर्वाधिक चर्चा बटोर रहा है. जयललिता की मृत्यु के बाद ‘एआईएडीएमके’ पर अपना हक जताकर तमिलनाडु के सीएम पद पर दावा ठोकने वाली नेता शशिकला को अधिक संपत्ति के 21 साल पुराने मामले में हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने उऩके रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण समेत चार साल की सजा सुनाई है. मतलब अब शशिकला जेल में रहेंगी और उनका सीएम बनने का सपना एक तरह से समाप्त हो गया है.

जयललिता जयराम की मृत्यु के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में शशिकला बेहद मजबूत होकर उभरीं, किन्तु कानून का डंडा भी उतनी ही तेजी से उन पर चल गया. कानून के सामने शशिकला ‘कुछ और वक्त’ के लिए गिड़गिड़ाती रह गयीं, किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ज़रा भी रियायत नहीं बरती और शशिकला को जेल जाना ही पड़ा.

यह बात अलग है कि जेल जाते-जाते भी शशिकला ने अपने विश्वस्त ‘पलानीसामी’ को तमिलनाडु का सीएम तो अपने भतीजे दिनाकरन को पार्टी में न. दो की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर सत्ता की चाभी अपने पास ही रखी है.

जे. जयललिता

जयललिता भले ही आज दुनिया में नहीं है, लेकिन आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनका जेल जाना कम से कम तमिलनाडु तो नहीं ही भूलेगा. बेंगलुरु की विशेष अदालत ने 2014 में उन्हें दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई थी. उन पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इस फैसले ने जयललिता से उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी भी छीन ली थी. हालाँकि, जयललिता ने ओ. पन्नीरसेल्वम के रूप में अपने विश्वस्त को गद्दी पर बिठा दिया. खैर, सजा के बाद उन्हें बेंगलुरु की पारापन्ना अग्रहारा जेल ले जाया गया. हालांकि कुछ वक्त बाद उन्हें जमानत ज़रूर मिल गई थी, किन्तु कानून के ‘डंडे’ का ज़ोर बतलाने के लिए उनका उदाहरण आगे भी दिया जाता रहेगा.

लालू प्रसाद यादव

Corrupt Politician and Indian Laws, Lalu Prasad Yadav (Pic: oneindia.com)

पिछले कई दशकों का इतिहास उठाकर देखा जाए तो लालू प्रसाद यादव जैसा चर्चित नेता शायद ही कोई और हुआ हो! जेपी आंदोलन से निकलकर राजनीति में अपनी साख जमाने वाले लालू यादव सालों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं. लालू यादव का नाम भ्रष्टाचार के कई मामलों से जुड़ा, लेकिन ‘चारा घोटाला’ उन्हें ले डूबा. उन्हें इसके चलते जेल जाना पड़ा और अपना पद छोड़ना पड़ा. ये मामला चाइबासा कोषागार से 37.7 करोड़ रुपए निकालने का था. चाइबासा तब अविभाजित बिहार का हिस्सा था. इस घोटाले के सन्दर्भ में साल 1996 से सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की थी. अपराध साबित होने के कारण उन पर पिछला चुनाव लड़ने पर रोक लग गई. हालाँकि, इस समय वे जमानत पर बाहर हैं और अपनी पार्टी के सर्वेसर्वा भी हैं, किन्तु हमारे भारतीय कानून की इस मामले में दाद तो देनी ही चाहिए, जो तमाम विपरीत चुनौतियों के बावजूद लालू जैसे राजनेताओं को जेल भेजने में आज भी सक्षम है.

बीएस येदियुरप्पा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को 2008 में बीजेपी को इस दक्षिण भारतीय प्रांत में पहली बार सत्ता में लाने का श्रेय दिया जाता है. लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने परिवारवाद शुरू कर दिया और अपने बच्चों को जमीन के अलॉटमेंट में कथित रूप से पक्षपात किया. संभवतः इसी कारण वह मीडिया में सुर्खियों में रहे. अंततः भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें न सिर्फ़ जेल जाना पड़ा, बल्कि अपने पद से भी हाथ धोना पड़ा. काफी दिनों तक भाजपा से वनवास झेलने के पश्चात् अब वह पुनः भाजपा में शामिल कर लिए गए हैं.

Corrupt Politician and Indian Laws, BS Yeddyurappa (Pic: bhatkallys.com)

ए. राजा

कांग्रेसनीत गठबंधन यूपीए-2 के समय हो रहे घोटालों के प्रमुख चेहरे के रूप में यह नेता कुख्यात हुआ और फिर इस पर बुरी तरह कानून का डंडा चला, जिससे यह नेता बाद तक बिलबिलाता रहा. गौरतलब है कि चार बार संसद सदस्य और दो बार भारत के संचार मंत्री रहे ए. राजा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियुक्त हैं. इस पूरे मामले की जांच कर रही सीबीआई का कहना है कि 3000 करोड़ के इस घोटाले में मनपसंद लोगों को स्पेक्ट्रम के लाइसेंस दिए गए. 2011 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन 2012 से वह जमानत पर बाहर हैं.

सुरेश कलमाड़ी

हाल ही में तब फिर बड़ा बवाल हुआ था, जब सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन अध्यक्ष नामित करने की खबर आयी. जनता और केंद्रीय खेल मंत्रालय के विरोध के बाद, यह नियुक्तियां रद्द तो हो गयीं, किन्तु अनायास ही सुरेश कलमाड़ी याद आ गए. कांग्रेस पार्टी के प्रमुख राजनीतिज्ञ के अलावा सुरेश कलमाड़ी देश के प्रमुख खेल अधिकारी भी रहे हैं, वह भी काफी लंबे समय तक! गौरतलब है कि उनका नाम भारत में कॉमनवेल्थ कराने से जुड़ा है, तो उसके आयोजन में हजारों करोड़ के घोटाले के साथ भी वही सुरेश कलमाड़ी जुड़े हैं. कलमाड़ी और उनके सहयोगियों को धांधली के आरोप में गिरफ्तार किया गया और इस समय मामला अदालत में है.

कनिमोझी

राजनीतिक भ्रष्टाचार की एक और प्रतीक! कनिमोझी डीएमके नेता एम करुणानिधि की बेटी हैं और उन पर यह आरोप है कि उनकी कंपनी कलाइनार टीवी में ए. राजा की वजह से स्पेक्ट्रम लाइसेंस पाने वाले कारोबारियों का पैसा आया. इसकी वजह से उन्हें जेल जाने की हवा खानी पड़ी. यूपीए 2 के घोटालों में जो नाम सर्वाधिक चर्चित रहे हैं, उनमें कनिमोझी का नाम टॉप 5 में लिया जा सकता है.

पी.वी. नरसिंह राव

यूं तो भ्रष्टाचार के आरोप प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी लगे, लेकिन नरसिंह राव भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन पर प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए गए और इसमें उन्हें सह अभियुक्त भी बनाया गया था. यह मामला घूस से जुड़ा हुआ था.

ओमप्रकाश चौटाला

दिल्ली की एक अदालत ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे समेत 53 लोगों को तीन हज़ार अध्यापकों को ग़ैर क़ानूनी भर्ती करने का दोषी क़रार दिया था. चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को 10-10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई. आरोप है कि 1999-2000 के दौरान हरियाणा में 3,032 लोगों को अध्यापक के तौर पर भर्ती किया गया था. आरोप था कि इनमें से हर एक से तीन से चार लाख रुपये की रिश्वत ली गई थी. जाहिर है, अपनी तरह का यह सनसनीखेज मामला है और कानून के सक्रिय होने और ताकतवर लोगों के जेल जाने का उदाहरण भी बिरला ही है.

जगन्नाथ मिश्रा

जगन्नाथ मिश्रा बिहार के आख़िरी कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे. दिलचस्प है कि उनके चुनाव में हारने के बाद कांग्रेस कभी बिहार में सत्ता में अपने दम पर वापसी नहीं कर पाई. जगन्नाथ मिश्रा को भी चारा घोटाले के सिलसिले में जेल जाना पड़ा है. वे भी चाइबासा कोषागार से 37.7 करोड़ रुपए निकालने के मामले में दोषी पाए गए थे. गौरतलब है कि उन्हें इस मामले में अभियुक्त तब बनाया गया था जब वे विधानसभा में विपक्ष के नेता थे.

रशीद मसूद

पिछली साल कांग्रेस सांसद रशीद मसूद को सीबीआई की विशेष अदालत ने एमबीबीएस सीट आवंटन मामले में चार साल जेल की सज़ा सुनाई थी. मसूद साल 1990 और 1991 के बीच केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री थे. केंद्रीय पूल से देश भर के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले के लिए त्रिपुरा को आवंटित एमबीबीएस सीटों पर धोखाधड़ी से अयोग्य उम्मीदवारों को नामित करने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था. मसूद पहले समाजवादी पार्टी में थे लेकिन बीते विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे.

माया कोडनानी

नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री रही माया कोडनानी गुजरात दंगों में दोषी हैं. उन्हें एक विशेष अदालत ने 28 साल की सज़ा सुनाई है. साल 2002 में नरोदा पाटिया में हुए दंगों में 97 मुसलमानों की मौत हो गई थी. 28 फ़रवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद हुई इस घटना के लिए 32 लोगों को दोषी पाया गया था. आरोप है कि इस भीड़ का नेतृत्व कोडनानी ने किया था. कानून का डंडा यहाँ भी चला और आरोपी जेल के अंदर चक्की पीसने को मजबूर है.

मधु कोड़ा

Corrupt Politician and Indian Laws, Madhu Koda (Pic: letuspublish.com)

गरीब आदिवासी परिवार से आए झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के बारे में कहा जाता है कि वह राजनीति की वजह से करोड़पति बन गए. बताया जाता है कि उनकी दिलचस्पी सिर्फ अपने प्रांत में होने वाले खनन में ही नहीं थी, बल्कि अफ्रीकी देशों में भी उनका हस्तक्षेप था. उनपर 4000 करोड़ की संपत्ति रखने का आरोप लगा, जो प्रांत के बजट का एक चौथाई था. वह जेल भी गए, किन्तु इस समय वह जमानत पर हैं.

सुखराम

पूर्व संचार मंत्री सुखराम को वर्ष 1996 में एक कंपनी को ठेका देने के बदले तीन लाख रूपए की घूस लने के आरोप में तीन साल की सज़ा मिली. हालांकि बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई और उनकी ज़मानत अवधि को सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया था. गौरतलब है कि वे नरसिंह राव सरकार में संचार मंत्री रहे.

यह सारे नाम जहाँ स्पष्ट करते हैं कि भारतीय राजनीति में ‘भ्रष्टाचार’ समेत दूसरी बुराइयां विराजमान हैं, जिसको अपना हथियार बनाकर राजनेता बुलंदियों पर पहुंचते हैं. लेकिन तेजी से बढ़ने के चक्कर में वो भूल जाते हैं कि ऊंचाई पर तभी टिका जा सकता है, जब आपके पास चारित्रिक बल हो. हाँ, अगर कोई इस बेसिक तथ्य को अनदेखा करने की भूल करता है तो मान लीजिये कि भारतीय कानून का डंडा उस पर आज या कल चलेगा ही! हाँ, इसमें थोड़ी देर अवश्य हो सकती है, किन्तु अंधेर कतई नहीं है.

Web Title: Corrupt Politician and Indian Laws, Hindi Article

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