मदर टेरेसा एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें दुनिया बड़े ही सम्मान से याद करती है. जिस तरह से मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन सामाजिक कार्यों में झोंक दिया, उससे किसी और की तुलना नहीं की जा सकती. मदर टेरेसा को गरीबों की मसीहा के रुप में भी जाना जाता है. उनके उल्लेखनीय कार्यों की कितनी भी चर्चा की जाये, वह कम ही होगी. इसलिए आईये इस सबसे इतर उनके बचपन के अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश करते हैं:

मदर टेरेसा नहीं, एग्नेस था बचपन का नाम

26 अगस्त 1910 को मदर टेरेसा ने मेसिडोनिया (Link in English) में अपनी आंखें खोली थीं. माता-पिता ने उनका नाम एग्नेस रखा था. वह अपने परिवार में सबसे छोटी थीं. इस कारण वह परिवार की लाडली रहीं. वह सभी के लिए किसी परी से कम नहीं थीं. चूंकि, मदर टेरेसा एक कैथोलिक (Link in English)  परिवार से वास्ता रखती थीं, इसलिए चर्च जाकर जीजस की पूजा करना उनकी दिनचर्या में था.

इसके अलावा उनकी मां की रुचि धार्मिक कार्यों में बहुत थी. शायद ही कोई धार्मिक कार्य होगा, जहां उनकी मां की उपस्थिति न रहती हों. धर्म के प्रति मां के इस प्रेम ने उन्हें भी जीजस के करीब ला दिया. अपने मांं के रास्ते पर उन्होंंने चलना शुरु कर दिया. उनकी उम्र बहुत कम थी, लेकिन धर्म के प्रति उनका लगाव किसी बड़े-बुजुर्ग से कम नहीं था.

पूरा परिवार हंस-खेल रहा था, तभी…

मदर टेरेसा एक समृद्ध परिवार से थीं. उनके पिता एक सफल कारोबारी थे. इस लिहाज से आर्थिक रुप से उन्हें कभी पैसों की दिक्कत नहीं हुई. उनकी निजी ज़िन्दगी के साथ-साथ उनका परिवार हंसी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहा था. उनके आसपास के लोग कहते थे कि जीजस सभी को इनके जैसा परिवार दे. तभी एक दिन अचानक उन्हें खबर मिली कि उनके पिता नहीं रहे. यह खबर उनके साथ-साथ उनके परिवार को झकझोर देने वाली थी.

मदर टेरेसा इस समय महज आठ साल की रही होंगी. उनके लिए पिता (Link in English) का साथ यूं छूट जाना किसी काले सपने जैसा था. मदर टेरेसा के पिता एकमात्र सहारा थे, जिनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी.

Early Life Of Mother Teresa (Representative Pic: brainchildmag.com)

मुश्किलों भरा रहा आगे का जीवन, लेकिन…

पिता की मौत के बाद परिवार जैसे टूट सा गया था. किसी का भी किसी काम में दिल ही नहीं लग रहा था. जब तक पिता थे, जरूरत की हर चीज मदर टेरेसा के पास होती थी. अब पिता नहीं रहे थे, तो पूरा जीवन मानो बदल सा गया था. आसान जीवन व्यतीत करने वाली मदर टेरेसा के ऊपर मुश्किलों (Link in English) का पहाड़ टूट पड़ा था. पैसों की क्या कीमत होती है? मुश्किलें क्या होती हैं? नन्हीं सी उमर में मदर टेरेसा को एहसास होने लगा था. खैर, मां ने आगे बढ़कर पिता की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर उठाया. उन्होंने जीवन यापन के लिए कपड़े का व्यवसाय शुरु कर दिया था. काम मुश्किल था, लेकिन मजबूत इरादों ने आसान कर दिया.

मदर टेरेसा हरदम मांं के साथ रहती थीं. ज़िन्दगी को देखने का उनका नजरिया बदल सा गया था. वह पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गई थीं. कहा जाता है कि यही वह समय था, जब उन्हें अपने आसपास गरीब लोगों को देखकर उनके दर्द का एहसास होने लगा था. वह कोशिश में रहती थीं कि आगे बढ़कर गरीबों की मदद कर सकें. कई बार तो वह मां से छिपाकर गरीबों को खाना आदि तक दे आती थीं.

महज बारह की उम्र में धर्म का रास्ता अपनाया

पिता के जाने बाद मदर टेरेसा धर्म के और करीब चली गई थीं. 12 साल की मदर टेरेसा को जीजस के प्रति स्नेह देखकर धर्मगुरु अक्सर उनसे बात करते रहते थे. कहते हैं कि यही वह उम्र थी, जब उन्होंंने तय कर लिया था कि वह अपनी पूरी जिंदगी धर्म और परोपकार के कामों में लगायेंगी. अब वह एक अलग सोच के साथ चर्च जाने लगी थीं. उन्होंने अपना लक्ष्य (Link in English) तय कर लिया था. वह जान गई थीं कि यही वह काम है, जो उन्हें शान्ति दे सकता है. आगे वक्त के साथ-साथ उनका इरादा और दृढ़ होता चला गया.

इस सफर में वह अब 18 साल की हो चुकी थीं. एक दिन उनको बैठे-बैठे लगा कि धर्म के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित करने के लिए उन्हें घर छोड़ने की जरुरत है, तो उन्होंने एक झटके में घर त्याग दिया. घर छोड़ने के बाद वह आयरलैण्ड की ओर निकल गईं. वहां उन्होंने ‘नन बनने के लिए प्रक्रिया शुरु कर दी.

Early Life Of Mother Teresa (Representative Pic: occupiedpalestine)

‘नन बन अपनी दुनिया पाई

वह नन बनने के बाद रोज स्कूल जाने लगीं. यहीं उन्होंने इंग्लिश भी सीखी. वह अपनी पढ़ाई में इस तरह डूबी रहती थीं कि शिक्षक उनकी मिसाल दिया करते थे. पढ़ाई पूरे होते ही उन्हें भारत (Link in English) में काम करने को मौका दिया गया. यहां करीब उन्होंने दस साल से भी ज्यादा वक़्त बच्चों को पढ़ाने में लगा दिया. स्कूल से जो भी टाइम बचता था, उसे वह गरीबों की देखभाल में लगा देती थीं. कहते हैं कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी गरीब उनके दर से निराश होकर नहीं जाता था.

माना जाता है कि मदर टेरेसा कहती थीं कि उनके जीजस उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करते हैं. आगे चलकर गरीबों के लिए किए गये इन्हीं उल्लेखनीय कार्यों के चलते उन्हें भारत की ओर से पद्मश्री और भारत रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया. इसके साथ उन्हें विश्व के सबसे बड़े पुरस्कार ‘नोबेल’ से भी सम्मानित किया गया.

Early Life Of Mother Teresa (Pic: reference.com)

मदर टेरेसा का नाम इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज है. दुनिया में उनके जैसे बहुत कम ही लोग हैं, जिन्हें हर कोई पसंद करता हो. गरीबों की मददगार मदर टेरेसा आज की दुनिया के उन लोगों के लिए मिसाल हैं, जो कहते हैं कि एक औरत कुछ नहीं कर सकती. उनका व्यक्तित्व खत्म होती उन संवेदनाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जिनके लिए इंसानों का जीवन कोई महत्व नहीं रखता.

Web Title: Early Life Of Mother Teresa, Hindi Article

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