रंगभेद एक ऐसा मुद्दा है, जिससे पूरी तरह हम अभी भी छुटकारा नहीं पा सके हैं. आज भी कई लोगों के दिमाग में रंग को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं. अमेरिका में भी आज कल कुछ ऐसा ही हाल चल रहा है. वहां ‘ऑल्ट राइट’ नाम की एक मुहिम चल रही है, जो रंग भेद का समर्थन करती है. यही वजह है कि इस मामले में संख्या बढ़ती जा रही है, जो मानवता के लिहाज से शुभ संकेत नहीं है.

तो आईये आज इससे जुड़े हुए तमाम पहलुओं को जानने की कोशिश करते हैं:

क्या है ‘ऑल्ट राइट’?

अल्ट राइट एक मुहिम का नाम है, जो अमेरिका के कुछ नौजवानों ने शुरू की थी. सड़कों पर इसका आना तो अभी हाल ही में हुआ है, लेकिन इंटरनेट पर यह अपनी पहचान पहले ही दर्ज करा चुका है. 2008 (Link In English) में स्पेंसर नाम के एक व्यक्ति ने ‘अल्ट राइट’ को दुनिया के सामने लाने का काम किया था. यह मुहिम इसलिए शुरु की गई थी, क्योंकि इससे जुड़े नौजवानों के हिसाब से अमेरिका में सिर्फ सफ़ेद लोगों को ही रहना चाहिए. जबकि, अमेरिका में कई तरह के अप्रवासी सालों से रह रहें हैं. फिर चाहे वह मैक्सिकन हों या फिर अफ्रीकन या फिर यहूदी नागरिक.

इंटरनेट ने इस मुहिम को लोगों तक पहुंचाने में ख़ासा मदद की. इन्होंने शुरुआत में तो काले लोगों पर जुबानी हमले किए फिर धीरे-धीरे उग्र होते चले गये.

अब आलम यह है कि इसका स्वरुप बड़ा हो चुका है. कहते हैं कि अल्ट राइट के लोगों का मानना है कि उन्हें अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी मुहिम को मजबूत करने के लिए नारीवाद, लिंगवाद से भी जोड़ने का काम करेंगे. ‘ऑल्ट राइट’ की इस सोच के चलते अब काले लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.

Everything About Alt Right (Pic: wikipedia.org)

ट्रम्प पर सपोर्ट का आरोप!

माना जाता है कि अल्ट राइट की इस मुहिम को ट्रम्प से काफी सहारा मिला है. डोनाल्ड ट्रम्प (Link In English) ने अपने चुनावी कैंपेन के दौरान ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा दिया था. उनके इस नारे को रंग भेद से जोड़कर देखा गया था. बाद में कई बार ट्रम्प पर और ऑल्ट राइट के एक साथ होने की बातें भी उठती रहीं. हिलेरी क्लिंटन ने खुले तौर पर ट्रम्प पर आरोप लगाया था कि वह ‘अल्ट राइट को सपोर्ट कर रहे हैं. हालांकि, ट्रम्प ने इस आरोप को नकार दिया था. उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि मुझे इससे कोई मतलब नहीं है.

ट्रम्प और अल्ट राइट के साथ की बात को एक बार फिर हवा तब लगी जब ट्रम्प ने अपना नया रणनीतिज्ञ चुना था. अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ट्रम्प ने अपनी टीम में काफी फेर बदल किए. इसी कड़ी में उन्होंने स्टेफेन बेनन को अपना मुख्य रणनीतिज्ञ चुन्ना. बताते चलें कि स्टेफेन एक न्यूज़ वेबसाइट ब्रिटबार्ट को चालते थे. माना जाता है कि वह अल्ट राइट और रंग भेदी बातों को बढ़ावा दिया करते थे. ट्रम्प के इस फैसले की लोगों ने काफी आलोचनाएं की थी. लोगों का मानना था की स्टेफेन ‘सफ़ेद राष्ट्रवादी’ हैं.

इतना ही नहीं स्टेफेन पर अपनी वेबसाइट पर लिंगवाद और नस्लवादी चीजों को दिखाने के लिए भी लोग उन पर भड़के थे. स्टेफेन इस बात को तो स्वीकारती हैं कि वह राष्ट्रवादी हैं, लेकिन सफ़ेद राष्ट्रवादी बिल्कुल नहीं हैं. स्टेफेन से भले ही यह कहकर इस मामले से अलग होने की कोशिश करती दिखी, लेकिन शक की सुई हमेशा उनके आस-पास घूमती रहती है.

Everything About Alt Right (Pic: roboticsbusinessreview.com)

यह नाज़ीवाद का उदय तो नहीं?

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के अंदर नाज़ीवाद की भावना थी. इसी कारण उसने हज़ारों-लाखों यहूदियों को मार दिया था. जिस तरह नाज़ीवाद ने हिटलर की सोच को मार डाला था, उसी तरह ‘अल्ट राइट’ के साथ होने का भी डर बन रहा है. यह माना जाता है कि ऑल्ट राइट को यूरोपीय देशों से भी सहयोग मिल रहा है. हाल ही में ‘अल्ट राइट’ की एक बड़ी बैठक की खबर आई थी. बताया गया था कि इस मीटिंग में इसका खोजकर्ता स्पेंसर भी मौजूद था. उसने सभी सफ़ेद राष्ट्रवादियों को संबोधित किया था. कुछ पत्रकारों ने उस गुप्त मीटिंग में जाकर वहां होने वाली सभी गतिविधियों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया था. बाद में जब वह वीडियो सामने आया, तो हर कोई हैरान रह गया था. वीडियो में स्पेंसर साफ तौर पर कहते सुना गया कि अमेरिका उनका है और सिर्फ उन्हीं का हक उस पर रहेगा.

असली परेशान करने वाली बात तो वीडियों के अंत का हिस्सा था. अपने भाषण को खत्म करते हुए स्पेंसर ने जोश के साथ कहा ‘हेल ट्रम्प’ (Link In English). हेल एक जर्मन शब्द है, जिसका मतलब है ‘जय हो’. जिस तरह इसका इस्तेमाल किया गया, बिल्कुल ऐसे ही हिटलर के लिए भी नाज़ी सेना किया करती थी. इसके बाद स्पेंसर और मीटिंग में आए सभी लोगों ने नाज़ी सेना की तरह सलाम करते हुए ‘हेल ट्रम्प’ कहा. इस बात ने अल्ट राइट के मुद्दे को और गंभीर कर दिया.

Everything About Alt Right (Pic: cnn.com)

सड़कों तक पहुंच चुका है ‘ऑल्ट राइट’

ऑल्ट राइट अब इंटरनेट से बाहर आकर सड़कों तक आ चुका है. हाल ही में इन्होंने अमेरिका के चार्लोट्सविले (Link In English) में एक बड़ी रैली निकाली थी. दूसरी तरफ ‘ऑल्ट लेफ्ट’ जैसी संस्थाओं ने भी आकार ले लिया है. यह काले और अप्रवासी लोगों का संगठन है. रैली के दौरान ही दोनों पक्षों का टकराव हो गया. देखते ही देखते दोनों एक-दूसरे से लड़ने लगे और चार्लोट्सविले जंग का अखाड़ा बन गया. मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा. जैसे-तैसे मामले पर काबू पाया गया. यहां तक तो ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह चौंकाने वाला था.

इस घटना की जानकारी जब डोनाल्ड ट्रम्प को हुई, तो वह ‘ऑल्ट राइट’ का साथ निभाते दिखे. ट्रम्प ने कहा असली गलती ‘ऑल्ट लेफ्ट’ की थी, क्योंकि उन्होंने पहल की थी. किसने किसको मारा यह किसी को समझ नहीं आया, लेकिन यह तो तय है कि यह आग जल्दी ठंडी नहीं होने वाली है.

Everything About Alt Right (Pic: conservativereview.com)

अमेरिका में भड़की रंग भेदभाव को हल्के में लेना सही नहीं होगा. भले ही यह मामला अभी छोटा दिख रहा हो, लेकिन यह कब बड़ी ज्वाला बन जाए यह कोई नहीं जानता. ऐसे में देखना होगा कि इस मामले का हल ट्रम्प कैसे निकालते हैं और उस हल पर तमाम उदारवादियों का क्या रूख रहता है.

Web Title: Everything About Alt Right, Hindi Article

Keywords: America, USA, Donald Trump, Communist, White Supremacy, White Nationalist, Hilary Clinton, President, Richard Spencer, Reddit, Online Harassment, Black Lives Matter, Alt Right, Alt Left, Immigrants, Jews, Hitler, Nazi, German, Social Networking, Everything About Alt Right, Hindi Article

Featured image credit / Facebook open graph: nypost.com