18 जून के रविवार का भारत में लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतज़ार रहा है. एक तो छुट्टी का दिन ऊपर से भारत पाकिस्तान का क्रिकेट मैच. हर तरफ बस इसी बात की चर्चा! इन सब बातों के बीच हम एक चीज़ भूल गए हैं या कहें कि हमने कभी उसे याद रखने की कोशिश ही नहीं की है. यह दिन ‘फादर्स डे’ का भी है. मदर्स डे, वैलेंटाइन डे आदि ऐसे और दिन तो हम सबको याद रहते हैं पर फादर्स डे क्यों नहीं…

माँ और पिता में ‘फर्क’ क्यों

जब माँ की बात आती है तो हमारे ज़हन में जो तस्वीर आती है वह एक ऐसी औरत की है जो निस्वार्थ हमारे लिए भला करती है. पिता के मामले में यह थोड़ा अलग है. जब हम पिता के बारे में सोचते हैं तो याद आता है एक उम्रदराज व्यक्ति जो कुर्सी पर बैठा हुआ है और अख़बार में आँखे गडाए है. जिसे हम थोडा खडूस समझते हैं और जो हमारे सारे प्लान को मना कर देता है. पर उस आदमी की हमारे जीवन में क्या अहमियत है, क्या हम इस बात को समझते हैं? माँ के लिए तो शायर से लेकर कवि, हर किसी ने लिख-लिख कर कलम की सियाही ख़तम कर दी है. वहीं पिता पर ऐसा कुछ देखने को मिलता नहीं है. पर यकीन मानिये, मदर्स डे से कम महत्त्व का दिन नहीं है यह!

फादर्स डे आखिर क्यों जरूरी है इसे समझने के लिए हमे इससे जुड़े कुछ पहलुओं को समझना पड़ेगा.

पिता का सम्मान जरूरी होता है…

फादर्स डे का आईडिया कौन लाया, यह किसी को नहीं पता पर इसकी स्थापना के पीछे सोनोरा दौड़ नाम की एक लड़की थी, यह माना जाता है. सोनोरा अपने माता पिता के साथ अमेरिका में एक अच्छी जिंदगी बिता रही थी. अपने छह भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी थी. जब सोनोरा 16 साल की हुई तो एक हादसे के कारण उनकी माँ की मौत हो गई. पूरे परिवार की जिम्मेदारी अब उनके पिता के कन्धों पर आ गई थी. उनके पिता भले ही अकेले थे पर वह अपने परिवार को किसी तरह कि कोई परेशानी नहीं होने दिया करते थे.

Fathers Day Importance (Pic: pinterest.com)

सोनोरा समझदार थी. पिता के परिश्रम को देख उनकी आँखें भर आती थी. अब उनके पिता ही उनकी माँ की भूमिका भी निभा रहे थे. एक बार मदर्स डे के दिन उन्होंने देखा कि कैसे लोग अपनी माँ के लिए यह दिन ख़ास बना रहे थे. यह देख सोनोरा के मन में एक ख्याल आया कि सिर्फ माँ ही क्यों पिता के लिए कोई एसा खास दिन क्यों नहीं है. सोनोरा ने एक मुहीम शुरू कर दी. उन्होंने सबको बताना शुरू कर दिया कि पिताओं के लिए भी एक ख़ास दिन सुनिश्चित होना चाहिए. उनकी इस मुहीम के लिए काफी लोग उनके साथ हुए तो काफी उनके खिलाफ भी पर वह डंटी रही.  धीरे-धीरे लोग भी उनके साथ जुड़ने लगे. आखिर कार 19 जून 1910 में पहला फादर्स डे मनाने में सोनोरा कामयाब हो गई.

विदेशों में आज भी हैं हालात बढ़िया पर…

विदेशों में अभी भी फादर्स के मायने हैं. ब्रिटेन में लोग फादर्स डे के दिन अपने पिता को सुबह-सुबह नाश्ता करवाते हैं व उनके साथ वक़्त गुजारते हैं. अमेरिका में भी यह काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है. अधिकतर पश्चिमी देशों में तो यह एक त्यौहार की तरह है पर भारत में क्या हाल हैं इसके. भारत में कभी नहीं देखा गया कि फादर्स दे को इस उत्साह से कोई मना रहा हो. जबसे इंटरनेट का चलन शुरू हुआ है तबसे तो सब जैसे बदल ही गया है. अधिकतर लोग पिता के साथ फोटो शेयर करते हैं. इनमे से ज्यादातर लोग बस इसलिए ऐसा करते हैं ताकि वह बाकियों से अलग न लगे. असल में तो काफी लोगों का अपने पिता के प्रति प्यार बस उस पोस्ट तक ही सीमित रह जाता है. यह बात भले ही काफी लोगों को चुभे पर यही आज का सच है.

हालाँकि, किसी जमाने में भारतवर्ष का उदाहरण दिया जाता था रिश्तों को निभाने में, पर सवाल तो आज का है.

पिता की कठोर छवि बनी हुई है, जबकि…

पिता घर के वह सदस्य हैं जिसके ऊपर पूरे परिवार को चलाने की जिम्मेदारी होती है. वह अपने लड़के के लिए एक आदर्श होते हैं तो अपनी बेटी के रक्षक. पिता परिवार को बनाए रखते हैं अगर वह बिखर जाएँ तो परिवार बिखर सकता है. इसलिए अधिकतर समय हम अपने पिता को गंभीर देखते हैं. पिता की यही छवि हमारे जहन में बस चुकी है. बचपन तक तो पिता का यह रूप हमें कोई परेशानी नहीं देता पर जवानी की उम्र में पिता के साथ हमारा के रिश्ता कुछ सही नहीं रहता.

हम आज कल आजाद जिंदगी जीने के लिए इतने उतावले रहते हैं कि पिता की बताई राह पर चलना छोड़ देते हैं. हमारे दिमाग में यह बस जाता है कि पिता हमारे हित में कुछ सोचते ही नहीं हैं.

असल में पिता की छवि इससे कहीं अलग है. पिता एक नारियल कि तरह होते हैं. बाहर से भले ही वह सख्त हो पर अन्दर से वह बहुत नर्म होते हैं. लड़की की विदाई के समय पिता ही है जिनकी आँखों से अश्क रोके नहीं रुकते. पिता हर कदम हर मोड़ पर हमारे साथ ही होते हैं बस इस बात का हमे एहसास नहीं होने देते. पिताओं के प्रति हमे अपना यह नजरिया बदलने की बहुत जरूरत है.

Fathers Day Importance (Pic: scoopwhoop.com)

बॉलीवुड में ‘पिता का प्यार’

सिंगल पैरेंट बनना अपने में एक ऐसी चीज है जिसे अभी तक बस सुष्मिता सेन जैसी अदाकाराओं ने ही अपनाया था पर अब काफी और एक्टर भी इस अपना रहे हैं. अभी हाल ही में तुषार कपूर का सरोगेसी के माध्यम से एक लड़का हुआ है. तुषार भी पिता बनने का सुख लेना चाहते थे. इस घटना के बाद तुषार की थोड़ी आलोचनाएं भी हुई कि ‘कोई अकेला आदमी कैसे बच्चों को ख्याल रख सकता है’ पर उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ा. तुषार की यह बात के बाद एक बार फिर सिंगल फादर का किस्सा सामने आया. करन जोहर भी हाल ही में सरोगेसी के माध्यम से दो बच्चों के पिता बने हैं. लोगों का मानना है कि सिर्फ माँ ही बच्चों का सही खयाल रख सकती है पिता नहीं. यह बात को बदलने के लिए इन दोनों की तरफ से उठाया कदम एक बहुत ही बड़ा बदलाव ला सकती है.

समझिये पिता की अहमियत!

हमारे इस लेख का एक मात्र मकसद यह नहीं है कि आप बस फादर्स डे पर अपने पिता के साथ स्पेशल ट्रीटमेंट करे. हम चाहते हैं कि आप सिर्फ एक दिन हमारे बोलने पर नहीं बल्कि अपने मन से हर रोज अपने पिता को उतनी ही अहमियत और स्नेह दे जितना अपनी माँ को देते हैं. वैसे वर्तमान में कई लोग ‘माँ’ को भी कहाँ प्यार देते हैं!

खैर, फादर्स डे का मौका आ रहा है अपने इस बदलाव को लेन का इससे आच्छा वक़्त और कभी नहीं हो सकता. कुछ एक तरीके आपको बताना चाहेंगे अपनी ओर से कि कैसे इस दिन को अपने पिता के लिए ख़ास बना सकते हैं.

  • चैंपिंयस ट्रॉफी के सुरूर में इस समय हर कोई है. सबसे बढ़िया बात जो है वह यह है कि इंडिया-पाकिस्तान का फाइनल मैच है. यह एक बहुत ही सवाभाविक बात है पिता का क्रिकेट के प्रति प्रेम. कोशिश करें कि मैच के बहाने ही सही आप उनके साथ वक़्त गुजारे.
  • आज के युग में हम अपने हर स्वर्णिम पल को अपने फ़ोन में कैद कर लेते हैं. इस बार आपको ऐसा कुछ नहीं करना बल्कि पिता के साथ बिताए उन पलों को कैमरा में संजो के रखने कि बजाए उस लम्हे को खुल कर जियें.
  • अपने पिता को आप इस ख़ास दिन पर कोई तोहफा भी दे सकते हैं. पुरुषों के लिए एक जो सबसे बढ़िया तोहफा है, वह है घड़ी. घड़ी आखिर किसे पसंद नहीं आती. आपकी दी वह घड़ी जब भी आपके पिता देखेंगे तो उन्हें आपकी याद जरूर आएगी.

Fathers Day Importance (Pic: today.com)

अंतः बस इतना कहना चाहूँगा कि फादर्स डे को मनाने के लिए आप कोई भी तरीका अपनाएं इससे फर्क नहीं पड़ता. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उनको उस ही तरह से ट्रीट करे, जिस सम्मान के वह हकदार हैं. वह भले ही आपके साथ थोड़े गुस्से में रहे, पर असल में वह आपका ही भला चाह रहे हैं. यह बात जब आप महसूस करेंगे तो सिर्फ एक दिन ही नहीं, बल्कि साल के प्रत्येक दिन आप फादर्स डे मनाएंगे.

Web Title: Fathers Day Importance, Hindi Article

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