वैसे तो आपने तरह-तरह के पौधे देखे होंगे पर आज कल राजधानी दिल्ली में एक अलग ही प्रकार के पौधे का राज चल रहा है. इस पौधे के कई नाम हैं, जैसे- मैरीजुआना, केनेबीस और इन सबमें जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय है उसका नाम है ‘वीड’. देशी भाषा में कहा जाय तो गांजा. जी हां गांजा, जिस तरह से युवाओं में इसके लिए दीवानगी कुछ एक सालों में बढ़ी है, वह खतरनाक है. गजब की बात तो यह है कि इसके नशे के लिए उनके पास अजब-गजब बहानों का अंबार है. आप कुछ भी कर लीजिए, पर इसकी गिरफ्त में आये लोग इसको आसानी से छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते. तो आईये जानते है इससे जुड़े कुछ पहलुओं को:

आखिर क्या है गांजा?

अब कुछ लोग यहां ऐसे भी होंगे जिन्होंने गांजे के बारे में सुना तो होगा, पर इसके बारे में उनको सही से कुछ पता नहीं होगा. आपको बताते चलें कि होली पर जिस भांग को मिलाकर आप ठंडाई में मिलाकर पीते हैं, वह और गांजा दोनों एक ही मां के दो बेटे हैं. बस थोड़ा सा अंतर है इन दोनों में. भांग को जहां हम त्यौहार के दिन थोड़ी मस्ती के लिए इस्तेमाल करते हैं, वहीं लोग गांजे को रोजाना नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

कभी एक समय था जब गांजे का सेवन चरसी और नशाखोर लोग किया करते थे. पर आज कल तो सब कुछ बदल गया है. लोग इतने ‘डाउन टू अर्थ’ हो गये कि गरीब से लेकर अमीर, हर कोई इसका का सेवन करता मिल जाता है.

भारत में किस तरह से गांजे का व्यापार बढ़ रहा है, शायद इसका जवाब सरकार के पास भी नहीं है. क्योंकि अगर होता तो इसकी मांग तेजी से नहीं बढ़ती. खासकर दिल्ली जैसे मेट्रो शहर में.

हिमाचल जैसे मशहूर पर्यटक स्थल भी अब इस गांजे की बड़ी बिक्री वाली जगह बन गयी है. दिल्ली में तो पचास-पचास रूपए की इसकी पुड़िया बिका करती हैं वह भी मशहूर जगहों में जैसे कनॉट प्लेस, सुभाष नगर, लाजपत नगर, निज़ामुद्दीन और न जाने कहाँ-कहाँ.

Ganja, Smokers And Their Excuses (Pic: mycitypaper.com)

इस वजह से है युवाओं को लगती है लत…

युवाओं को यह इसलिए पसंद आता है, क्योंकि महज़ 50 रूपए में इसकी पुड़िया मिल जाती है. सस्ते दाम के कारण कॉलेज और स्कूली बच्चों में इसकी लत ज्यादा देखी जाती है. गांजा शराब की तरह महकता भी नहीं व आपकी चाल में भी इससे कोई ख़ास बदलाव नहीं देखा जाता. जबकि शराब के नशे में इंसान को आसानी से पहचान लिया जाता है. हालांकि,

गांजे के नशे में आंखे लाल हो जाती हैं, पर इसका सेवन करने वालों के पास इसका भी इलाज होता है. वह अपने पास एक खास किस्म का आई ड्रॉप रखते है, जिसके प्रयोग से पल भर में आंखें मोती जैसी चमकने लगती हैं.  

यह कुछ ऐसे कारण हैं, जो गांजे का नशा करने वालों को इसके प्रत्यक्ष दुष्परिणामों से दूर ले जाते हैं और उनकी सामजिक छवि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. परिणाम यह होता है कि कई बार यह नशा लोगों की जान के लिए घातक बन जाता है.

पश्चिमी देशों का कसूर

गांजे के इस चलन के पीछे इन्टरनेट और पश्चिमी देश भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि इसका आधा क्रेज तो वहाँ की वजह से हुआ है. जैसे वहाँ का एक गायक था श्रीमान बॉब मारली जो वीड के बहुत बड़े प्रेमी थे जिनकी कही बातों में अक्सर गांजे की प्रशंसा सुनने को मिलती थी. अब भारत का यह चलन रहा है कि हम विदेशी चीजों को अपनाने में सबसे आगे हैं. तो लीजिये पहले ड्रग्स को अपनाया अब इसे भी. इन्टरनेट भी इसमें कसूरवार है. फेसबुक पर कई ऐसे पोस्ट दिख जाते हैं जहा गांजे की बात हो रही हो. और फेसबुक से युवा इस नए नशे का पाठ भी पढ़ ही लेते हैं.

जो लोग गांजे के शौक़ीन हैं वह अपने साथ हमेशा एक बहाना तैयार रखते हैं ताकि अगर कोई उनके गांजा पीने पर सवाल उठाए तो वह झट से अपने बहानों की पोटरी से कुछ न कुछ निकालकर परोस दें. बहाने भी ऐसे-ऐसे कि आप सुनकर कहेंगे सच में ऐसा होता है? नहीं मानते तो पढ़िए एक बानगी:

महादेव का प्रसाद होता है गांजा!

आप सभी ने कई प्रकार का प्रसाद खाया होगा. बूंदी, लड्डू, बर्फी और भी भिन्न प्रकार का. पर क्या आपने कभी गांजे को प्रसाद के रुप में ग्रहण किया. हां भाई गांजे का प्रसाद, सुनकर आपको हैरानी हो सकती है. पर सच तो यही है कि इसका सेवन करने वाले नशाखोर इसे भैरो बाबा का प्रसाद बताते हैं. शायद वह जानते है कि वह उस देश में रहते हैं, जहां किसी चीज़ के साथ भगवान का नाम लगा दो और फिर कोई कुछ नहीं कहेगा. फिर चाहे वह चीज नशे के रुप में उन्हें खत्म ही क्यों न कर दे. पर जरा सोचिए महादेव के नाम पर नशाखोर बनना कितना सही है? आपका जवाब जो भी हो, पर यह बिल्कुल सही नहीं है.

Ganja, Smokers And Their Excuses (Pic: vishwagujarat.com)

गांजा बिल्कुल हानिकारक नहीं होता?

हर गांजा पीने वाले को आप अमूमन तौर पर यह बोलते हुए सुन सकते हैं कि गांजा बिल्कुल हानिकारक नहीं है. ऐसे में अगर आपने पूछ लिया कि कैसे? तो यह कहने में देरी नहीं करेंगे कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है. इससे कुछ नहीं होता. अब इन महान लोगों को कौन समझाएं कि प्राकृतिक चीज़ें भी हानि पहुंचा सकती हैं. वैसे भी कौन सी किताब में लिखा है कि गांजा बिल्कुल भी हमें हानि नहीं पहुंचाता? माना इसमें केमिकल नहीं होते पर इसका मतलब यह नहीं कि यह पूरी तरह से शुद्ध है. देर से ही सही पर हर बुरी चीज़ का सेवन हमारे लिए बुरा ही है.

कैंसर से बचने के लिए रामबाण बताते हैं…

सिगरेट और गांजे के बीच की जंग में गांजे के समर्थक यही बोलते हैं कि सिगरेट कैंसर का कारण है, जबकि गांजा तो शरीर में कैंसर होने से रोकता है. भला अब यह क्या बात हुई? डॉक्टर दिन-रात कैंसर से बचने के उपाए सोच रहे हैं और इसका इलाज तो गांजे के नशेबाज पचास रूपए की पुड़िया में लिए घूम रहे हैं. हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर कुछ वक्त बाद यह लोग गांजे को रामायण से जोड़ते हुए यह न कह दें कि गांजे को उस समय में ‘संजीवनी बूटी’ कहा जाता था. माना जाता है कि सिगरेट कैंसर का एक बड़ा कारण है. पर इसका मतलब यह नहीं कि गांजा उसका उपाय है. गांजा भी सिगरेट के रूप में ही पिया जाता है. धुंआ तो इससे भी आता है, तो भला यह कैंसर को कैसे ठीक करेगा?

परेशानी दूर करता है, शांति में सहायक

नशेबाज कहते हैं गांजे का नशा हमें शांति प्रदान करता है. इसको पीने के बाद हमारे दिमाग की कुछ प्रक्रियाएं बदल जाती हैं और हमें शांति की अनुभूति होती है. यह हमें हंसना सिखाता है. यह हमें बिना पंखों के उड़ने का मौका भी देता है. अब इन्हें कौन बताये कि नशा कोई भी हो वह दिमाग में अलग प्रकार की हरकत करता ही है. जैसे, शराब में लोग अपने जज़्बात और चाल नहीं संभाल पाते, वैसे ही गांजा इंसान की सोच को धीमा कर देता है, जिससे हर चीज़ बहुत ही अलग सी लगती है. यह अनुभव उस समय तो लोगों को पसंद आता है पर इसके भावी परिणाम घातक हो सकते हैं.

Ganja, Smokers And Their Excuses (Pic: topsy.fr)

रचनात्मक बनने में मददगार?

रचनात्मक कार्य में लगे, जो लोग इसका सेवन करते हैं उनकी थ्योरी कहती है कि गांजा पीने के बाद वह काम करने में ज्यादा ध्यान लगा पाते हैं, जिससे रचनात्मकता कार्य को बल मिलता है. अब यह कितना सही है, भगवान मालिक है. सच तो यह है कि गांजा हमारी एक से ज्यादा काम करने की सोच को ख़त्म कर देता है. इसलिए यह लोग अगर किसी एक चीज़ पर ध्यान लगाते हैं तो उसे ही करते रहते हैं पर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि इससे उनकी रचनात्मकता बढ़ जाती है.

नशा चाहे किसी भी प्रकार का हो वह नशा ही रहता है. फिर चाहे वह शराब, गांजा, सिगरेट, ड्रग्स कुछ भी हो. अक्सर लोग जिस नशे को करते हैं उसे अच्छा समझ कर उसके बचाव में खड़े हो जाते हैं पर नशा हर प्रकार से आपके और आपके परिवार के लिए बेकार है. गांजे की बढ़ती पहुंच एक बहुत ही चिंताजनक बात है. खासतौर पर जिस तरह से युवाओं में लोकप्रिय ‘माल’ यानी गांजे ने तेजी से अपने पांव देश में फैलाए हैं, उस हिसाब से तो आने वाले वक़्त के बारे में सोचने में भी डर लगता है.

Web Title: Ganja, Smokers And Their Excuses, Hindi Article

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