अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग और आजादी का जिक्र होते ही बरबस ऐसे कई क्रांतिकारियों के नाम और चेहरे हमें याद आ जाते हैं, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए एक लंबा संघर्ष किया. भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए जब देश के सभी हिस्सों के क्रांतिक्रारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, तो कोलकाता के विनय वसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता पीछे नहीं रहे. हो सकता है इससे पहले अपने ये नाम पहले न सुने हों, लेकिन यकीन मानिए देश के स्वतंत्रता संग्राम मेंं इनका भी उतना ही योगदान रहा है, जितना अन्य क्रांतिकारियों का. तो आइये जानते हैं इनसे जुड़े हुए क्रन्तिकारी किस्सों को:

अंग्रजों के जमाने में 10 हजार के इनामी थे बसु

वैसे तो विनय बसु ने एक सभ्रांत परिवार में जन्म लिया था, लेकिन जब वह क्रांतिकारी हेम चंद्र घोष के संपर्क में आये तो उनके अंदर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पनपा. फिर उन्होंने अपनी मेडिकल की पढाई बीच में ही छोड़ दी थी और बंगाल वॉलेंटियर्स के ऑपरेशन फ्रीडम में कूद गए थे. आंदोलन में कूदते ही बसु ने बंगाल के आई जी की हत्या की योजना बनाई और उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. जिसके बाद से बसु मोस्ट अंग्रेजों के लिए मोस्ट वांटेट हो गए थे.

अंग्रेजों ने उनके नाम के पोस्टर चस्पा करवा दिए थे. अब वह 10 हजार रुपए के इनामी हो गए थे. विनय के इस कांड ने उन्हें चर्चा के मुख्य बिन्दु पर लाकर खड़ा कर दिया था. बड़ों ने बसु को हिदायत दी कि वह कुछ वक्त शांत रहें, लेकिन वह कहाँ मानने वाले थे. जल्दी ही उन्होंने अपने साथियों दिनेश और बादल के साथ मिलकर अंग्रेजों के एक सीनियर अफसर को मार गिराया.

कहा जाता है कि यह बसु का आखिरी आपरेशन था, क्योंकि वह सिम्पसन का सुरक्षा घेरा तोड़ने में कामयाब नहीं हो सके और अंग्रेजी सैनिक उन्हें पकड़ते, इससे पहले उन्होंने खुद को गोली मार खत्म कर लिया. भारत माता की आज़ादी के लिए एक योद्धा ने खुद का बलिदान कर दिया था.

बादल जिसने, 18 की उम्र में मौत को लगाया गले

बादल गुप्ता का जन्म मुंशीगंज में हुआ, जो आज बंग्लादेश का हिस्सा है. बादल के बारे में कहा जाता है कि वह बचपन से ही क्रांतिकारी स्वभाव के थे. वह अक्सर क्रांतिकारियों की कहानियां पढ़ा करते थे. ऐसे में जब उन्हें अपने समय के क्रांतिकारी शिक्षक निकुंज सेन का साथ मिल गया तो वह खुलकर सामने आए. आत्म विश्वास से लबरेज बादल गुप्ता जल्द ही बंगाल वॉलीयंटर्स के साथ जुड़ गए, जहां उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बना डाली. वह इतने तेज तर्रार थे कि महज 18 साल की उम्र मेंं उन्हें सिम्परन की हत्याकांड में इनामी विनय बसु का साथी बनने का मौका मिला, जिसको उन्होंने बखूबी निभाया. हालांकि इस मिशन को पूरा करते समय उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी.

शस्त्र चलाने में निपुण थे दिनेश गुप्ता

अपने साथी विनय और बादल की तरह दिनेश भी मुंशीगंज के रहने वाले थे. उनके बारे में कहा जाता है कि उनमें शस्त्र चलाने का गजब का हुनर था. वह स्थानीय नवयुवकों औरअपने क्रांतिकारियों भाईयों को शस्त्र चलाना सिखाते थे. उनके शस्त्र चलाने का अंदाज इतना निराला था कि युवा क्रांतिकारी किसी और के पास जाना पसंद नहीं करते थे. वह बंगाल वॉलीयंटर्स में भी ट्रेनिंग देते थे. यही कारण था कि जब सिम्पसन को मारने की योजना बनाई गई तो उन्हें भी इस टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला, जिसको उन्होंने बखूबी निभाया. इस कांड मेंं

वह इकलौते थे जो जिंदा बचे, पर उन पर सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने व सरकारी अधिकारियों की हत्या का मामला चलाया गया था. फांसी से पहले उनके लिखे कई पत्र भी सुर्खियों में रहे. कहा जाता है कि इन पत्नों ने देश के युवकों को देश की स्वतंत्रता की राह पर जीवन समर्पित करने के लिए खूब प्रेरित किया था.

Story Of Vinay Badal Dinesh (Pic:mapio)

क्रूर सिम्पसन की हत्या की गवाह बनी राइटर्स बिल्डिंग

एनएस सिम्पसन जो बंगाल के सारे जेलों का प्रमुख था, वह जेलों में कैद भारतीय कैदियों को यातनाएं देने के लिए कुख्यात था. सिम्पसन को भारतीयों से बहुत घृणा थी. उसके लिए भारतीय होना मानो कोई अपराध हो, इसलिए क्रांतिकारियों ने ठान लिया था कि सिम्पसन को सबक सिखाना बहुत जरूरी है. फिर क्या था सिम्पसन को मारने की जिम्मेदारी दी गई उस वक्त के तीन युवाओं विनय, बादल और दिनेश को. चूंकि उस वक्त

राइटर्स बिल्डिंग ही सत्ता का केन्द्र था, सारे ब़ड़े अंग्रेज अधिकारी वहीं बैठते थे, इसलिए उन तीनों ने सिम्पसन को उसी में घुसकर मारने का मन बना डाला. योजना के तहत इन तीनों युवा क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों जैसी वेशभूषा धारण की ताकि उन्हें पहचाना न जा सके, जिसमें वह कामयाब भी रहे.

सिम्पसन जैसा अंग्रेज भी उन्हें पहचना नहीं पाया. तीनों ने बिल्डिंग में घुसते ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरु कर दिया, जिसमें कई दूसरे अंग्रेज अधिकारी भी बुरी तरह जख्मी हो गए और सिम्पसन मारा गया. हालांकि सुरक्षा घेरे को तोड़कर भाग निकलने में यह तीनों क्रांतिकारी नाकाम रहे.

Story Of Vinay Badal Dinesh, Writers Building (Pic:worldtravelserver)

इन युवाओं के नाम पर बना ‘बीबीडी बाग’

तीनों क्रांतिकारियों विनय, बादल और दिनेश ने अंग्रेजो में जो भय और दहशत का माहौल पैदा किया था, वह उस समय बंगाल ही नहीं सारे भारत में युवाओं के दिल में ललक जगाने और मर मिटने का जज्बा लेकर आया था. चारों तरफ बस इन्हीं के नामों की चर्चा थी. बाद में कलकत्ता में इन तीनों युवाओं के नामपर बीबीडी नाम से एक पार्क बनवाया गया, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह कलकत्ता के विशेष आकर्षण में से एक है.  कलकत्ता में इनके नाम से एक रेलवे स्टेशन भी बनाया गया है.

विनय, बादल और दिनेश ने अपनी छोटी सी उम्न में देश के लिए जो किया, उसकी जितनी भी तारीफ़ की जाए, कम होगा. हां इनके जीवन से देश के युवाओं को प्रेरणा जरुर लेनी चाहिए, जो शौर्य की गाथा से भरा हुआ है. निश्चित रूप से आज देश के लिए मरने की बजाय जीने वाले और कर्म करने वाले युवाओं की आवश्यकता है और देश के युवा बीबीडी से प्रेरणा अवश्य लेंगे, इस बात में दो राय नहीं! जरूरत है क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान के दम पर हासिल की गयी स्वतंत्रता की रक्षा करने की, क्योंकि भ्रष्टाचार, गन्दगी, लूट खसोट जैसी कई बिमारियों से हमारा देश जूझ रहा है और ऐसे में उसे बचाने के लिए विनय बादल और दिनेश की तरह देश के युवाओं को ही आगे आना होगा.

Story Of Vinay Badal Dinesh, BBD Bagh (Pic:blog)

Web Title: Historay Of Vinay, Badal, Dinesh, Hindi Article

Keywords: Vinay Basu, Badal Gupta, Dinesh Gupta, Freedom, Revolutionary,Bengal, Writers Building, Training, Friends, Famous, Dalhuji Squere, Childhood, Soldiers, Arest, Operation, Life, expired, Gun, Childhood, N.S Simpson, British Officer, Goverment, Police, Warant, Hospital, Age, Young, Group, Warntiears , Judge, Subhash Chandra Bose, Dhaka, Branch, Plan

Featured Image Credit / Facebook Open Graph: commons