जैसा कि हम सब जानते हैं कि प्लेन हवा में उड़ते हैं और एयरपोर्ट पर लैंड करते हैं. कभी-कभी कुछ फिल्मों में प्लेन के इस क़ानून को नजरअंदाज करके अलग भी दिखाया जाता है, पर सच क्या है सभी को पता होता है. बावजूद इसके अगर आप किसी प्लेन को समंदर या नदी में लैंड होते हुए देखते हैं, तो आपका रिएक्शन कैसा होगा. निश्चित रुप से उस नजारे को देखकर आप आश्चर्यचकित ही होंगे!

15 जनवरी 2009 को कुछ ऐसा ही नजारा दुनिया ने देखा था. प्लेन का नाम था ‘यूएस एयरवेज 1549’ और इसको चला रहे थे पायलट चैस्ले और उनके सहायक थे पायलट जेफरी. आईये पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं:

आम दिनों जैसी ही थी 15 की सुबह, मगर…

15 जनवरी 2009 की सुबह रोज की तरह थी. हर दिन की तरह रूट लोगार्डिया से शेर्लोट के लिए निकला था. प्लेन से जुड़ी हर एक जांच पूरी की गई. प्लेन उड़ान भरने के लिए तैयार था. कप्तान ने भी हरी झंड़ी दे दी थी. घड़ी में दोपहर के तीन बजे के आसपास का समय रहा होगा. सभी यात्री अपनी-अपनी सीट पर बैठे थे. विक्की बेन नाम की एक महिला जो खुद का व्यवसाय चलाती थी, वह भी प्लेन में थी. विक्की अपने पति और बच्चों से मिलने के लिए जा रही थी. उसकी बेटी ने पूरे हफ्ते का होमवर्क किया हुआ था, जो वह विक्की को दिखाना चाहती थी.

प्लेन की यात्रा दो घंटे की थी. सभी मुसाफिर बस उड़ान के इंतजार में थे. तभी प्लेन ने उड़ान भर दी. सभी के चेहरे पर राहत की सांस थी. उन्हें यकीन हो चला था कि वह समय से अपने गंतव्य पर पहुंच जायेंगे. प्लेन को उड़ान भरे हुए तीन-चार मिनट ही हुए थे कि प्लेन पर खतरा मंडराने लगा. प्लेन जमीन से 2818 फीट ऊपर आ चुका था.

एक पक्षी प्लेन के ऊपर मंडरा रहा था. कप्तान चैस्ले के मुताबिक़ प्लेन के ऊपर अचानक से पक्षी गिरने लगे और बहुत जोर से आवाज़ होने लगी. हर दूसरी आवाज़ ऐसी प्रतीत हो रही थी, जैसे मानो कोई कड़कड़ाती बिजली हो. कुछ पक्षी प्लेन के दोनों तरफ के इंजन में जाकर घुस गए. जिस चीज का डर था, वही हुआ. इंजन में उनके जाते हीं आग की लपटें निकलने लगी. जिसमें वह थोड़ी ही देर में नष्ट हो गए. प्लेन के अंदर बात होने लगी की इतनी आवाज़ आखिर क्यों हो रही है? थोड़ी ही देर में यात्रियों को आग की लपटें निकलती दिखने लगी. ईंधन की महक भी उन्हें आने लगी थी.

Hudson River Plane Landing (Representative Pic: vocativ.com)

जब आफत में फंस गई जान

थोड़े ही समय में चैस्ले और उसके सह पायलट को भी पता चल गया कि उनके दोनों ही इंजन काम नहीं कर रहे हैं. यात्रियों के मुताबिक़ विमान के अंदर सन्नाटा छा गया था. इंजन से आने वाली आवाजें भी बंद हो गई थी. यात्रियों को एहसास था कि किसी चीज़ की आवाज़ तो आ रही थी, लेकिन वह क्या था? यह कोई नहीं जानता था. इंजन के बंद हो जाने के बाद प्लेन हवा में था. वह तेजी से ऊपर की ओर जा रहा था. असली परेशानी यह थी कि प्लेन 3,000 फीट से ज्यादा ऊपर नहीं जा सकता था. अब समय आ चुका था, जब किसी भी कीमत पर प्लेन को नीचे उतरना था.

66 टन का वजनी प्लेन, इंजन के पूरी तरह रुकते ही तेजी से नीचे गिरने लगा. प्लेन घनी जनसंख्या वाली जगह के ऊपर से गुज़र रहा था. उस समय सुबह के तीन बजे थे और चैस्ले ने कंट्रोल रूम में फ़ोन करके उन्हें इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ‘प्लेन 1539’  (चैस्ले ने शायद घबराहट में प्लेन को 1549 की जगह 1539 कह दिया था) किसी चिड़ियाओं के झुंड से टकरा गया है. दोनों इंजन नष्ट हो चुके हैं. हम लोगार्डिया की तरफ वापस जा रहे हैं.

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर पैट्रिक ने तुरंत ही लोगार्डिया से उड़ान भरने वाले सभी विमानों को हटाने का आदेश दे दिया, क्योंकि प्लेन 1549 कभी भी रनवे नंबर 13 लैंडिंग के लिए आ सकता था. सब चैस्ले के वापस लौटने की राह देख रहे थे. चैस्ले ने एयरपोर्ट पर लैंड का मन बनाया. कंट्रोलर ने भी इसकी अनुमति दे दी थी, लेकिन चैस्ले ने बाद में इसके लिए मना कर दिया. चैस्ले ने कहा कि ‘हम यह नहीं कर सकते हैं. हमें इसे हड़सन नदी में उतारना पड़ेगा. नहीं तो हममें से कोई नहीं बचेगा.

आखिरी फैसला आया काम

हड़सन एक नदी है, जो अमेरिका के न्यूयॉर्क से न्यू जर्सी तक होकर गुज़रती है. चैस्ले ने निर्णय लिया कि वह हड़सन में ही लैंड करेंगे. यह काम हो जाता, लेकिन सामने एक और अड़चन आई. 600 फीट ऊंचा जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज था, जिसे चैस्ले ने महज 900 की ऊंचाई से पार किया. यात्री खिड़कियों से प्लेन को हर पल नीचे गिरते हुए देख रहे थे. कई यात्री मान चुके थे कि वह मरने वाले हैं. तभी अचानक से कप्तान की आवाज़ आई. ‘खुद को सिकोड़ लो’

यह वह बात थी, जिसे कोई भी नहीं सुनना चाहता था. प्लेन का क्रू भी इसे पहली बार सुन रहा था. इसका सीधा मतलब था कि प्लेन क्रेश होने वाला है. माना जाता है की प्लेन हादसे के समय सिकुड़ कर बैठने से चोट लगने का खतरा कम हो जाता है.

नौ सेकंड बाद करीब 3:31 बजे हड़सन नदी पर प्लेन लैंड की तैयारी की गई, न कि एयरपोर्ट पर. प्लेन कर्मियों के मुताबिक़ लैंडिंग बहुत ही मुश्किल थी. सबसे पहले प्लेन का पिछला हिस्सा पानी से टकराया, उसके बाद बाकी प्लेन. चैस्ले ने तुरंत ही प्लेन के दरवाजे खोले और सबको जल्दी से बाहर निकलने को कहा. आपातकालीन दरवाजे भी खोल दिए गए. एक-एक करके सब नदी में कूद गए. तभी मौके पर वहां कुछ नौका आ गई. चैस्ले ने उन्हें कहा कि यात्रियों को पहले बचाया जाए. थोड़ी ही देर में यात्रियों को बचा लिया गया. 140 दमकल कर्मियों के साथ पुलिस का एक बड़ा दल यात्रियों को सही सलामत बचाने के लिए तैयार था.

Hudson River Plane Landing (Representative Pic: Plane Excellence)

बुलंद हौंसलों ने बचाई जान

चैस्ले और 154 यात्री उस दिन प्लेन से बचकर बाहर निकले थे. उनमें से सिर्फ पांच लोगों को ही चोटें आई थीं. जान तो बच गई थी, लेकिन असली मुजरिम के बारे में अभी भी कुछ नहीं पता था. इस हादसे के बाद काफी लोग सदमे में थे. इस घटना के कुछ दिन बाद जब कप्तान चैस्ले से पूछा गया, तो रोते हुए उन्होंने बताया कि ‘मुझे ऐसे किसी काम का कोई अनुभव नहीं था. मुझे कार्यमुक्त होने का एहसास तब हुआ, जब अस्पताल में मुझे इस काम के लिए पुरस्कार मिला. उसके बाद मुझे पता चला की सब यात्री बच गए.’

जब सब ठीक हो गया तो, राष्ट्रीय यातायात सुरक्षा संघ ने अपना कम शुरू किया. उन्होंने प्लेन को कंप्यूटर से चेक कराया. इस परीक्षण में सामने आया कि उस हालत में वह 13 में से सिर्फ 7 बार ही एयरपोर्ट तक जा सकते थे. यानी उनके पास आधे चांस थे एयरपोर्ट तक पहुंचने के. असल में प्लेन की हालत ज्यादा ख़राब थी. वह इतनी दूर नहीं जा सकता था. आखिर में संघ ने फैसला सुनाया कि हड़सन नदी में प्लेन लैंड करने का निर्णय बिलकुल सही था. संघ के लोगों के मुताबिक़ यह लैंडिंग हवाई इतिहास की सबसे सफल लैंडिंग में से एक थी.

Hudson River Plane Landing (Pic: newsweek.com)

प्लेन के सारे कर्मचारियों को मैडल देकर सम्मानित किया गया. इस घटना ने उन सबको बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय बना दिया था. कप्तान चैस्ले तो सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो गए थे. उन्हें टीवी चैनलों से फ़ोन आने लगे थे. इसके बाद चैस्ले के इस कारनामे पर एक फिल्म भी बनाई गई थी.

Original Article Source / Writer: Roar Bangla / Syed Monzur Morshed

Translated by: Vimal Naugain

Web Title: Hudson River Plane Landing, Hindi Article

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