अगर आप फ़िल्मी दुनिया में तनिक भी दिलचस्पी रखते हैं तो ऑस्कर से जुड़ी ख़बर आपके लिए महत्वपूर्ण बन जाती है. यक़ीनन हर साल आपके ज़ेहन में ये सवाल कौधतें होंगे कि इस बार कौन  बनेगा सिकंदर, किसके हाथ लगेगी बेस्ट फ़िल्म की ट्राफ़ी और किसके सिर बंधेगा बेस्ट एक्टर का सेहरा. आपके इन सवालों का जवाब होता है सिर्फ़ व सिर्फ़ ऑस्कर के पास, जिसका हर साल रहता है आपको इंतज़ार. भारत से जुड़े लोगों के लिए यह और भी उत्सुकता का विषय रहा है, किन्तु दुर्भाग्य से हमारा इन्तजार ऑस्कर को लेकर बेहद लम्बा होता जा रहा है. पर ऑस्कर में भारत ने समय-समय पर अपना दम जरूर दिखाया है. यूं तो अब तक आयोजित ऑस्कर अवार्ड में भारत ने कई दावेदारियां ठोकी हैं, लेकिन इसमें महज पांच में ही जीत हासिल हुई है. एक मौका ऐसा भी आया जब ऑस्कर ने अपनी ओर से एक भारतीय सिनेमाई हस्ती को बुलाकर सम्मानित किया. भारत को कौन-कौन से ऑस्कर अवार्ड मिले हैं, ऑस्कर में भारत की किस फिल्म ने दी दूसरों को चुनौती, ऐसी ही कुछ और दिलचस्प बातें हैं जो आप एक भारतीय और फिल्मप्रेमी होने के नाते अवश्य जानना चाहेंगे:

सत्यजीत रे का योगदान अविस्मरणीय

साल 1992 में ऐसा भी मौका आया जब भारतीय सिनेमाई हस्ती सत्यजीत रे को ऑस्कर ने खुद बुलाकार मानद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. राय ने अपने जीवन में 37 फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं. गौरतलब है कि राय फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे, जैसे पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना इत्यादि. फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे. राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार ही नहीं, बल्कि भारत रत्न शामिल हैं. जाहिर है, इतनी महान हस्ती को ऑस्कर के माध्यम से याद किया जाना हमारे लिए फख्र की बात है.

रेड कारपेट पर ‘प्रियंका चोपड़ा’ का जलवा

पिछले साल की तरह इस बार भी प्रियंका चोपड़ा की मौजूदगी ने ऑस्कर में भारतीय सिनेप्रेमियों को मुस्कराने का एक अवसर तो दे ही दिया. वह भारत की पहली ऐसी अभिनेत्री हैं जो ऑस्कर में अवार्ड की प्रजेंटर बनीं हैं.  बताते चलें कि पिछले साल ही प्रियंका चोपड़ा ने हॉलीवुड में इंट्री ली थी. वो अमेरिकी टीवी शो क्वांटिको में मुख्य भूमिका में नज़र आईं. जिसके बाद उन्हें इस अवार्ड नाइट में शामिल होने का मौका मिला.

India in Oscar awards , Dev & Priyanka (Pic: deccanchronicle.com)

मदर इंडिया ने लूटी थी वाहवाही

महबूब ख़ान की मदर इंडिया भारतीय सिनेमा की सबसे महत्त्वपूर्ण और सराही जाने वाली फ़िल्मों में से एक है. मदर इंडिया की पटकथा ज़बर्दस्त थी, जिसका योगदान  फ़िल्म की कामयाबी में भी माना जाता है. अपनी इन्हीं खूबियों के कारण साल 1958 में यह फिल्म ऑस्कर तक पहुंचने में कामयाब रही थी. इस फिल्म को ऑस्कर के सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म में नामांकन मिला था, जिसके बाद फिल्म ने खूब वाहवाही लूटी. फिल्म पुरस्कार जीतने के काफी करीब भी पहुंची, लेकिन कामयाबी उसके हाथ नहीं लगीं.

लगान ने दी कड़ी टक्कर

लगान जब पर्दे पर उतरी तो अपने देशी टच के कारण खूब सराही गई. आशुतोष गोवारिकर एवं आमिर खान के लगान की कामयाबी ही थी कि 2002 के ऑस्कर के लिए उसे नामित किया गया था. जानकारी के मुताबिक बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म की श्रेणी में यह फिल्म जीतते-जीतते रह गई थी. जिन दिनों ऑस्कर में लगान प्रतिद्वंदियों को चुनौती दे रही थी, हिन्दुतानियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया था.

India in Oscar awards, Lagaan Movie (Pic: technoflix.com)

पर जारी रहा ‘असफलता का सिलसिला’…

  • सन् 1961 में इस्माइल मर्चेंट की फिल्म द क्रिएशन ऑफ वुमन को बेस्ट शॉर्ट सब्जेक्ट की श्रेणी में नामांकन मिला.
  • सन् 1979 में केके कपिल की ऐन इनकाउंटर विद फेसेस को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में नामांकित किया गया, लेकिन यह फिल्म भी ऑस्कर पाने में असफल रही.
  • इसके बाद साल 1987 में ‘इस्माइल मर्चेंट‘ ने एक बार फिर ऑस्कर नामांकन में जगह बनाई. लेकिन सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़ सकी.
  • 1989 में मीरा नायर की फिल्म सलाम बांबे का आस्कर में चयन हुआ था, लेकिन वह भी कुछ खास नहीं कर सकी.
  • साल 1993 और 1994 दोनों ही में लगातार इस्माइल मर्चेंट की फिल्मों हॉवर्ड एंड, द रिमेंस ऑफ द डे को फिर से बेस्ट पिक्चर श्रेणी में नामांकन मिला था.
  • लगान के बाद सन् 2005 में अश्विन कुमार की लिटिल टेरेरिस्ट को बेस्ट शॉर्ट सब्जेक्ट और सन् 2007 में दीपा मेहता की वाटर को बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म में नामांकित किया गया था. लेकिन इन दोनों का भी कुछ खास कर नहीं पाईं.

भारतीय टच लिए ‘हॉलीवुड’ फिल्में, जिन्हें ऑस्कर मिला

साल 1983 में आई फिल्म गांधी भी खूब चर्चा में रही. फिल्म की पृष्ठभूमि भारतीय होने के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कलाकारों को इसमें अभिनय करने का मौका मिला, जो देश के लिए गर्व की बात थी. फिल्म ऑस्कर में सफ़ल भी रही. बेन किंग्सले और रोहिणी हट्टागदी को इस फिल्म के लिए आकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के अकादमी पुरस्कार के साथ आठ अन्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे. हालाँकि, मूलतः यह फिल्म हॉलीवुड की थी, पर इसका सब्जेक्ट पूर्ण रूप से भारतीय था.

साल 2009 भारते के लिए सौगात भरा रहा. फिल्म स्लम डॉग जब आस्कर के लिए नामित हुई तो किसी को अंदाजा नहीं था कुछ ऐसा होगा. फिल्म की धमक ऐसी रही कि भारत झूम उठा. इरफान खान और अनिल कपूर जैसे भारतीय एक्टर्स और संगीतकार ए आर रहमान की इस फिल्म  ने आठ ऑस्कर जीते थे. जिनमें ए आर रहमान को बेस्ट ओरिजनल म्यूजिक अवॉर्ड मिला था. इस फिल्म में एक भारतीय मूल के 18 वर्षीय एक्टर ने भी काफी धूम मचाई थी. जिसका नाम था देव पटेल.

यहीं नहीं रुका कारवां

  • साल 2011 में फिल्म 127 आवर्स के लिए उन्हें दो श्रेणियों (बेस्ट ओरिजनल स्कोर व बेस्ट ओरिजन सॉन्ग) में नामांकन मिला
  • साल 2013 में बांबे जयश्री ने लाइफ ऑफ पाई में शानदार गाना दिया. उन्हें बेस्ट ओरिजन सॉन्ग श्रेणी में नामांकन मिला.
  • साल 2016, एक बार फिर से एक भारतीय को जीत. इस साल राहुल थक्कर को उनके ड्रीम वर्क एनिमेशन मीडिया रिव्यू सिस्टम के लिए स्काई-टेक ऑस्कर अवार्ड दिया गया है.
  • साल 2017 यानी इस साल वेत्रीमारन द्वारा निर्देशित और अभिनेता धनुष अभिनीत तमिल थ्रिलर फिल्म ‘विसरानाई’ को ऑस्कर  के लिए ‘फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी’ में भारत की ओर से आधिकारिक एंट्री मिली थी. साथ ही,  फिल्म ‘लायन’ में अपने दमदार अभिनय से छाप छोड़ने वाले अभिनेता देव पटेल इस साल ऑस्कर अवॉर्ड में बेस्ट सपॉर्टिंग ऐक्टर के लिए नॉमिनेट हुए थे. लेकिन ‘विसरानाई’ और पटेल दोनों ही अवॉर्ड जीतने में असफल नहीं रहे.

चलते-चलते एक नज़र इन पर भी

सिनेमा जगत की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि ऑस्कर पुरस्कार का इतिहास क़रीब 88 साल पुराना है. फ़िल्मों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ऑस्कर पुरस्कारों से सम्मानित करने का सिलसिला 1929 से जारी है. तब सिनेमा जगत अपने शुरुआती दौर में था. सुश्री भानु अथैया प्रथम भारतीय थीं, जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया था. इसे एकेडेमी अवार्ड के नाम से भी जाना जाता है. इस पुरस्कार समारोह का प्रसारण दुनिया के क़रीब 200 देशों में किया जाता है.

  • ऑस्कर के इतिहास में सबसे ज्यादा पुरस्कृत फिल्मों में बेन-हर (1959), टाइटेनिक (1997) और ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग (2003) रही हैं.
  • टाटूम ओ नील सबसे कम उम्र में ऑस्कर सम्मान पाने वाले एक्टर हैं, जिन्हें 1973 में ‘पेपर मून’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का ऑस्कर मिला था.
  • सबसे ज्यादा उम्र में यह सम्मान क्रिसटोफर पल्मर को मिला. उन्हें 82 साल की उम्र में 2012 में फिल्म बिगिनर्स  में उनके सहायक किरदार के लिए यह पुरस्कार दिया गया था.
  • बेस्ट पिक्चर अवॉर्ड पाने वाली सबसे लंबी अवधि की फिल्म के तौर पर ‘गॉन विद द विंड’ का नाम शामिल है. यह फिल्म  234 मिनट की है.
  • इटली ने विदेशी भाषा वाली फिल्मों में सबसे ज्यादा (10 बार) अवॉर्ड जीते हैं.
  • इंडविजुएल रूप में वाल्ट डिज्नी को सबसे ज्यादा अवॉर्ड हासिल करने का रिकॉर्ड प्राप्त है. बता दें कि इसने 26 ऑस्कर्स जीते हैं.
  • ऑस्कर जीतने के बाद सबसे लंबी स्पीच देने का रिकॉर्ड गरीर गार्सन के नाम है जिन्होंने 1943 में पांच मिनट से ज़्यादा का भाषण दिया था, जबकि जॉन मिल्स ने सबसे छोटी स्पीच दी. उन्होंने कुछ कहा ही नहीं कहा.
  • बॉब होप सबसे अधिक 19 बार ऑस्कर नाइट को होस्ट कर चुके हैं.
  • 1953 में पहली बार ऑस्कर समारोह का प्रसारण यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा के लिए किया गया था.
ऐसे में अब सवाल यह कि आखिर क्यों ऑस्कर जीतने में भारतीय फिल्में पिछड़ती गयी हैं. इसके पीछे के सही कारण क्या है? क्या हमारी फिल्मों में तकनिकी खामी होती है या फिर सही फ़िल्मों को ऑस्कर पुरस्कारों के लिए भेजा ही नहीं जाता. देखा जाये तो कई मुश्किलों से जूझती हमारी इंडस्ट्री क्वालिटी की बजाय क्वांटिटी पर कहीं ज्यादा ध्यान देती है. हालाँकि, हाल फिलहाल कई बेहतरीन फिल्में बनी हैं और इसलिए ‘उम्मीद’ अभी बाकी है.

India in Oscar awards, A.R. Rahman (Pic: moviesdrop.com)

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