जमशेदजी टाटा उद्योग जगत के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहे हैं. उन्होंने ना सिर्फ़ शून्य से सृजन किया, बल्कि एक ऐसे औद्योगिक घराने की स्थापना भी की, जो वर्षों से व्यवसाय के साथ-साथ नैतिकता का भी ध्यान रखता आ रहा है. अनेकों बार टाटा-ग्रुप ने व्यावसायिक लाभ-हानि को दरकिनार कर देश और समाज की जरूरतों को समझा. इसका उदाहरण टाटा के नैनो प्रोजेक्ट के साथ-साथ होटल ताज पर हुए हमलों के बाद पीड़ितों की मदद करना गिनाया जा सकता है. और भी कई उदाहरण दिए जा सकते हैं. यही कारण है कि टाटा सबसे भरोसेमंद ब्रांड बनकर उभरी और लोगों के दिल-ओ-दिमाग पर छा गयी. आइए टाटा के रुप में देश को बड़ी सौगात देने वाले जमशेदजी टाटा के जीवन के कुछ पहलुओं से रु-ब-रु होते हैं:

21,000 रुपए के साथ कारोबार में इंट्री

13 की उम्र में पिता के बुलावे पर जमशेदजी बम्बई आए थे. पढ़ाई के लिए उनका दाखिला एक स्थानीय स्कूल में करा दिया गया था. इसके बाद जब वह 16 के हुए तो उनकी शादी दस वर्षीय हीराबाई डाबू से कर दी गई, जो कुरसेतजी डाबू की बेटी थीं. शादी के बाद जमशेदजी ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर अपने पिता के कारोबार में शामिल हो गए.

29 साल की उम्र तक वह पूरी मेहनत के साथ पिता का कारोबार में हाथ बंटाते रहे, पर उन्हें कहींं और पहुंचना था, इसलिए अपनी बचत के 21,000 रुपये की पूंजी के साथ उन्होंने एक ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना की. इसके बाद तो जमशेदजी टाटा आगे-आगे और कामयाबी उनके पीछे-पीछे चलती रही.

Inspirational story of Jamshed ji Tata, First Mill (Pic: bbc.com).

पहली स्वदेशी कंपनी के सूत्रधार

साल 1874 में जमशेदजी टाटा ने वो कारानामा कर डाला, जिसने भारतीयों का सीना चौड़ा कर दिया. उन्होंने सैन्ट्रल इण्डिया स्पिनिंग, वीविगं एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग नाम की एक कंपनी बनाई. यह एक भारतीय द्वारा शुरू की गई पहली कंपनी थी, जिस के शेयरों का बम्बई स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार होता था. इस कंपनी की पूंजी पांच लाख रुपये थी, जबकि टाटा ने इस में एक लाख पचास हज़ार रुपए का निवेश किया था. शायद इसीलिए टाटा, कंपनी के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्ति किए गये. निदेशक बनते ही उन्होंने इस कंपनी के बैनर तले एक कपास मिल लगाने का फैसला किया और इस उद्देश्य के लिए उन्होंने नागपुर को चुना.

नागपुर को दी कपड़ा मिल की सौगात

नागपुर ने कभी नहीं सोचा होगा कि कोई उनके यहां कपास मिल जैसा कोई उद्योग लगाएगा, लेकिन 37 की उम्र में जमशेदजी टाटा ने यह कर दिखाया. इस मिल की स्थापना से लोगों को रोजगार के ढ़ेरों अवसर मिले, जिस कारण जमशेद जी टाटा रातों-रात हीरो बन गए. इस मिल का उद्घाटन पहली जनवरी 1877 को किया गया था. टाटा ने इस मिल का नाम “ऐम्परैस” रखा था. ऐम्परैस मिल जल्द ही भारत में सबसे प्रमुख कपड़ा मिल बन गई. टाटा ने कई और टेक्सटाइल मिल्स भी स्थापित किए,  जिनमें से कई को उन्होंने लाभ के साथ बेच दिया था.

Inspirational story of Jamsedji Tata, Empress Mill (Pic: livemint.com)

भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना में भूमिका

जमशेद जी टाटा शुरु से ही भारत में एक उच्च-स्तरीय विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहते थे. जानकारों की मानें तो उन्होंने अपने इस सपने के लिए बम्बई में 14 बिल्डिंग और 4 जगहों की ज़मीन तक दे दी थी. जमशेद जी के प्रयासों का ही परिणाम था कि 1909 में ब्रिटिश सरकार को भारतीय विज्ञान संस्थान का स्थापनादेश जारी करना पड़ा था. भारतीय विज्ञान संस्थान सार्वजनिक निजी क्षेत्र की साझेदारी का पहला उदाहरण है. यह एक ऐसा संस्थान है जिसके प्रादुर्भाव की आधार शिला एक शताब्दी से भी अधिक समय तक अपनी दृढ़ता का साक्षी रही है.

इस घटना के चलते बना डाला होटल ताज

मुम्बई की शान कहे जाने वाले होटल ताज के निर्माण के पीछे एक कहानी चर्चित है. कहा जाता है कि 19वीं सदी के अंत में भारत के कारोबारी जमशेद जी टाटा,  मुंबई के सबसे महंगे होटल में गए, तो उन्हे रंगभेद का शिकार होना पड़ा था. उन्हें होटल से बाहर तक जाने को कह दिया गया था. चूंकि वह पहले ही भारत में एक शानदार होटल बनाना चाहते थे, ऐसे में इस घटना ने कैटलिस्ट का काम कर दिया. जमशेदजी टाटा ने तत्काल तय किया कि वे भारतीयों के लिए इससे बेहतर होटल बनाएंगे. 1903 में मुंबई के समुद्र तट पर ताज महल पैलेस होटल तैयार हो गया. यह मुंबई की पहली ऐसी इमारत थी, जिसमें बिजली थी, अमरीकी पंखे लगाए गए थे, जर्मन लिफ़्ट मौजूद थी और अंग्रेज ख़ानसामा भी थे. हर तरीके से यह होटल अन्य की तुलना मेंं बेहतर था, जो आज भी भारत की धरोहर है.

Inspirational story of Jamsedji Tata, Taj Mahal Palace (Pic: luxedb.com)

अधूरे सपने जो उत्तराधिकारियों ने पूरे किए

जमशेदजी टाटा ने जीवन भर चार परियोजनाओं को पूरा करने का सपना देखा – देश में इस्पात का उत्पादन, पनबिजली का उत्पादन, एक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना और मुंबई में एक होटल की स्थापना. उनके जीवनकाल में केवल होटल परियोजना ही पूरी की जा सकी. बाकी के सपनों को उनके उत्तराधिकारियों, दोराबजी टाटा और रतन टाटा ने उनकी मृत्यु के बाद पूरा किया. ‘टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी’ (टिस्को) 1907 में अस्तित्व में आई. बाद में इस का नाम टाटा स्टील हो गया. इसके बाद टाटा हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई कंपनी, आंध्र वैली पावर सप्लाई कंपनी और टाटा पावर कंपनी को भी स्थापित किया गया. साथ ही अन्य दो कंपनियों का वर्ष 2000 में टाटा पावर कंपनी में विलय कर दिया गया.

कर्मचारियों के लिए मसीहा

जमशेदजी को उनके कर्मचारी बहुत मानते थे, क्योंकि उन्होंने अपने कर्मचारियों की हर एक सुविधा का ख्याल रखा. यहीं कारण था कि उनकी मिलें न सिर्फ़ अपने उत्पादों की गुणवत्ता के लिए जानी जाती थीं, बल्कि वह दुनिया भर में सबसे अच्छी तरह संचालित मिलें थीं. जमशेदजी की मिलों में कई ऐसी नीतियां अपनाई गईं जो अपने समय से दशकों आगे थीं. मिसाल के तौर पर इन मिलों ने अपने कर्मियों के प्रशिक्षण का प्रबंध किया.उन्होंने काम के घंटे कम किए, कार्यस्थलों को हवादार बनाया, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी योजना शुरू की. उन्होंने कर्मचारियों को दुर्घटना और बीमारी लाभ देना शुरू किया. कर्मचारियों को छुट्टियों का भुगतान किया और सेवानिवृत्ति पेंशन दी. यह सारी सुविधाएं उस समय पश्चिम के देशों में भी नहीं दी जा रहीं थीं.

विवाद से भी जुड़ा नाता

नमक से लेकर ट्रक और गहनों से लेकर सॉफ्टवेयर तक अनगिनत चीजें बनाने वाले ‘टाटा समूह’ की साख के आगे कोई और कंपनी नहीं टिकती है. अपने कई दशकों के कार्यकाल में टाटा ने बखूबी अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखी है और इकॉनमी के मोर्चे पर भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए दूसरों के सामने एक नजीर प्रस्तुत की है. पर कहते हैं न जहां कामयाबी होती है, वहां कोई न कोई विवाद जन्म ले ही लेता है. हाल ही में जब टाटा ने अपने चेयरमैन सायरस मिस्त्री को अचानक से हटा दिया तो हंगामा खड़ा हो गया. टाटा और सायरस दोनों ने अपने-अपने तर्क दिए. मामला इतना ज्यादा बढ़ा कि कई दिनों मीडिया की सुर्खियां बना रहा. अतत: सायरस को बाहर का रास्ता देखना पड़ा.

Ratan Tata and Cyrus Mistry (Pic: bbc.com)

चलते-चलते एक नज़र

  • जमशेदजी नसरवानजी टाटा 03 मार्च 1839 को दक्षिण गुजरात में एक छोटे से शहर नवसारी में नसरवानजी टाटा और जीवनबाई के घर पैदा हुए थे. यह शहर उस समय बड़ौदा रियासत का हिस्सा था.
  • जमशेदजी टाटा के पिता, नसरवानजी टाटा, पारसी पुजारियों के एक परिवार से सम्बंध रखते थे. यह परिवार 25 पीढ़ियों से पुजारियों का काम कर रहा था, लेकिन उन्होंने व्यापार करने का निर्णय किया और वह बम्बई चले गए. उन्होंने एक छोटे व्यापारी के रूप में काम शुरू किया और सफल हुए.
  • जमशेदजी बहुत धन होने के बावजूद बेहद साधारण इंसान बने रहे. मुंबई में उनका घर, एस्प्लेनेड हाउस, उनके दूर के रिश्तेदारों सहित परिवार के सभी सदस्यों के लिए हमेशा खुला रहता था. वह बच्चों के साथ नरमी का बरताव करते थे, लेकिन उन्होंने बच्चों को समय या पैसा बर्बाद करने की अनुमति कभी नहीं दी.
  • जमशेदजी सब लोगों को इंसान समझते थे और सब की परवाह करते थे. उन्होंने अपने पूरे धन को तीन बराबर भागों में बांटा. एक हिस्सा अपने दोनों बेटों को दिया, दूसरा हिस्सा विश्वविद्यालय परियोजना के लिए दिया और शेष तीसरा हिस्सा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, परिचितों और सेवकों को दिया.
  • छात्रों की शिक्षा के लिए वह बड़ी रकम देते थे.1924 आते आते स्थिति यह हो गई कि भारतीय सिविल सेवा, अर्थात आई.सी.एस. जो अब आई.ए.एस. कहलाता है, के लिए चुने जाने वाले हर पांच भारतीयों में से दो भारतीयों ने टाटा ट्रस्ट से छात्रवृत्ति ली हुई होती थी.
  • जमशेदजी टाटा व्यापार यात्रा पर जर्मनी में गए और वह गंभीर रूप से बीमार हो गए और उनका वहीं 19 मई 1904 को निधन हो गया. उन्हें इंग्लैंड के वोकिंग में ब्रूकवुड पारसी कब्रिस्तान में दफनाया गया.
निश्चित रुप से जमशेदजी के जीवन का हर एक हिस्सा देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हो सकता है. कम से कम कारोबार जगत में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को तो जमशेदजी टाटा से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. जमशेद जी भी कहते थे कि “अगर किसी देश को आगे बढ़ाना है तो उसके असहाय और कमज़ोर लोगों को सहारा देना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि समाज के सर्वोत्तम और प्रतिभाशाली लोगों को ऊँचा उठाना और उन्हें ऐसी स्थिति में पहुँचाना भी जरूरी है, जिससे कि वे देश की महान सेवा करने लायक़ बन सकें.”

Inspirational story of Jamshed ji,TATA Group (Pic: slideshare.net)

Web Title: Inspirational story of Jamsedji Tata, Hindi Article

Keywords: Jamsedji Tata, Iron and Steel Company, Institution, Hotel Taj, A Hydroelectric Plant, The Indian Institute of Science, Tata Group, Business, Father of Indian Industry, Career, Entrepreneur, Industrialist, Indian Industry, Cotton Mill, India, Dorabji Tata, Ratan Tata, Naval Tata, Padma Bhushan, Noel Tata, Youth Inspiration, Business Personalities, Business Leaders

Featured Image Credit / Facebook Open Graph: onlinemirrors