क्या कभी आपको पल भर के लिए भी ऐसा महसूस हुआ है कि जो दृष्य आप देख रहे हैं वह आप पहले भी देख चुके हैं? हू-ब-हू वही चीज़ें, वही लोग, वही माहौल सब कुछ जैसे कोई सपना हकीकत बनकर आपके सामने आ गया हो… ऐसे में आप हैरान हो जाते होंगे कि ऐसे कैसे हो सकता है? आपको जिंदगी कुछ देर के लिए किसी फ़िल्मी सीन जैसी लगने लगी होगी. वैज्ञानिक भाषा में ऐसी स्थिति को ‘डेजा वू‘ या ‘पूर्वानुभव’ कहा जाता है. तो आईये इससे जुड़े कुछ और पहलुओं को जानते हैं:

क्या है डेजा वू?

डेजा वू फ्रेंच भाषा का एक शब्द है, जिसका मतलब होता है ‘पहले देखा हुआ’. अपने नाम से ही ‘डेजा वू’ अपना काम बता रहा है. यह इंसान को एहसास दिलाता है कि, जो चीज़ वह अभी देख रहा है, बोल रहा है या महसूस कर रहा है वह पहले भी उसके साथ हो चुकी हैं. इसका एहसास इतना शक्तिशाली होता है कि हमारा दिमाग यह समझ ही नहीं पाता ऐसा पहले सच में हुआ है भी या नहीं!

‘डेजा वू’ को किसी दिमागी बीमारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता. क्योंकि यह किसी प्रकार की बीमारी न होकर मानसिक स्थिति है. यह किसी के भी साथ हो सकती है. आमतौर पर ऐसा 15 से 25 साल की उम्र के लोगों के साथ होता है. 

हालांकि, समय दर समय वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की वजह ढूंढनी चाही पर वह नाकाम रहे. डेजा वू को काफी लोगों ने दिमागी बीमारी जैसे डिप्रेशन, मानसिक तनाव, मिर्गी आदि प्रकार की बिमारियों से जोड़ना चाहा, जो एक वक़्त तक सही भी साबित हुईं, पर पूर्ण रूप से कोई भी बात सच नहीं हो पाई. समय के साथ डेजा वू के होने के पीछे कई प्रकार की बातें सामने आती रहीं.

सपने का सच हो जाना

एक थ्योरी की मानें तो ‘डेजा वू’ के पीछे हमारे सपनों का हाथ होता है. इसके मुताबिक कभी-कभी हम सोने से पहले कुछ बातें सोचते हैं, जो हमारे सपने में तब्दील हो जाती है. असल में हम जो सपने देखते हैं, वह हमारी निजी जिदंगी से काफी मेल खाती हैं. उदाहरण के लिए आपने  सपने में देखा कि आप कहीं जा रहे हैं या किसी दोस्त से कोई बात कर रहे हैं. चूंकि, यह सब हमारी दिनचर्या का हिस्सा होती हैं. इसलिए हमारा दिमाग इनको यादों के रूप में संजो कर रख लेता है. बाद में जब असल जिंदगी में हमारे साथ वैसे ही कुछ घट रहा होता है, तो हमें ऐसा लगता है कि यह सब पहले भी कहीं देखा है.

Interesting Facts of  Deja Vu (Pic: geekpause.com)

पूर्व जन्म की यादें

कई लोग जो पूर्व जन्म में विश्वास रखते हैं. उनका कहना है कि डेजा वू के पीछे की वजह हमारे पूर्व जन्म की यादें हैं. माना जाता है कि हम मरने के बाद एक नया जन्म लेते हैं, और जब हमारा नया जन्म होता है, तो हम अपने पूर्व जन्म के बारे में सब भूल जाते हैं. पर ‘शांति देवी’ जैसे कुछ लोग हैं, जिन्हें अपने पिछले जन्म की सारी बातें याद हैं! पूर्व जन्म में मानने वालों का कहना है कि हमारी नई जिंदगी में भी हमारा दिमाग पिछले जन्म की कुछ यादें रखता है. ऐसे में जब हम पिछले जन्म से जुड़ी किसी चीज़ को देखते या महसूस करते हैं तो हमें डेजा वू होता है.

What Is Dejavu (Pic: kids.frontiersin.org)

‘ग्लित्च’ थ्योरी

ग्लित्च थ्योरी कुछ सबसे दिमाग घुमाने वाली बातों में से एक है. आमतौर पर डेजा वू हमारे लिए एक छोटा सा हादसा होता है, जिसको हम जल्द ही भूल जाते हैं. पर इस थ्योरी की मानें तो डेजा वू असल में हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अनुसार डेजा वू कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत है. कुछ धारणाओं की मानें तो समय जैसा कुछ नहीं होता. इसे महज़ जीवन को सरल बनाने के लिए बनाया गया है. समय एक छल है और डेजा वू हमें इससे निजात दिलाता है. भूत, भविष्य, वर्तमान हम तीनों को एक साथ जीते हैं. इसलिए जब डेजा वू का आभास हमें होता है, तो हमें ऐसा लगता है कि यह पहले भी कहीं हो चुका है.

Interesting Facts of  Deja vu (Pic: wonderopolis.org)

यादों का हकीकत से मेल

डेजा वू के दौरान हमारा दिमाग दो तरह की यादों पर काम करता है. एक तो जिनका हमें पहले से ज्ञान हो, मतलब जो हमने पहले भी कहीं देखी हो. जैसे कोई दोस्त, कोई जगह, जहां हम अक्सर जाते हों. दूसरी जिसे हमने पहले भले ही न देखा हो पर हमें उसे देखकर ऐसा महसूस होता है, जैसे कि वह पहले भी हो चुकी है. पहली स्थिति में दिमाग हमें सही जानकारी देता है, क्योंकि हमने वह चीज़ पहले भी देखी हुई है और उसकी यादें हमारे दिमाग में होती है. पर दूसरी स्थिति में ऐसा नहीं होता क्योंकि इसमें हमारा दिमाग उस चीज़ को अपना सा महसूस करवाता है, जिसकी असल में हमारे पास कोई याद है ही नहीं.

समांतर ब्रह्मांड

समांतर ब्रह्मांड की थ्योरी काफी समय से चर्चा में रही है. काफी लोगों का मानना है कि अन्तरिक्ष में बहुत सारे ब्रह्मांड हैं, जिनके आधार पर सभी कि जिंदगी चलती है. इस समय हमारे ब्रह्मांड में जिस तरह हमारी जिदंगी चल रही है, ठीक उसी तरह दूसरे ब्रह्मांडों में दूसरी जिंदगियां चल रही होंगी. बस अंतर इतना है कि हमारे और उनके जीवन जीने के तरीके में थोड़ा अंतर होता होगा. इस थ्योरी को मानने वालों का कहना है कि डेजा वू का हमें एहसास इसलिए होता है, क्योंकि उस वक़्त दूसरे ब्रह्मांड की और हमारी समय रेखा एक दूसरे को काटती हुई गुज़रती है. इस कारण जो वाकया दूसरे ब्रह्मांड में हो चुका होता है. वह हमें यहां डेजा वू के रूप में दिखता है. इस थ्योरी को डेजा वू के रहस्य से काफी करीबी माना जा सकता है. पर वैज्ञानिकों के पास इसके भी पक्के सबूत नहीं हैं.

What Is Deja vu (Pic: higherperspectives.com)

अचेत मन के कारण

ग्रांट एट एल नाम के एक प्रयोग से पता चला है कि हमारे अचेत मन में कुछ यादें कैद रहती हैं, जो फिर से उजागर हो सकती हैं. माना जाता है कि अगर किसी माहौल को फिर से वैसे ही बनाया जाए जैसा कि पहले कभी हुआ हो तो यादें दोबारा ताजा हो सकती हैं. उदाहरण के रूप में अगर आप किसी जगह पर बार-बार जाते हो तो आपका अचेत मनन उस जगह की यादें बना लेगा और अगर फिर आपक कभी किसी वैसी ही जगह पर जाते हैं तो, अचेत मन उन यादों को दोबारा जीवित कर देता है और आपको आभास होता कि यहां आप पहले भी आ चुके हैं.

Interesting Facts of  Deja vu (Pic: viralthread.com)

विभाजित ध्यान

विभाजित ध्यान की थ्योरी थोड़ी बहुत अचेत मन से ही मिलती जुलती है. इस थ्योरी में जब हमारा सचेत और अचेत मन दोनों एक साथ काम करते हैं तो हमें डेजा वू का एहसास होता है. इस थ्योरी में अचेत मन हमें एहसास दिला रहा होता है कि यह चीज पहले हो चुकी हैं. जबकि, सचेत मन इस बात को मानने से इंकार करता है. इस कारण हमें डेजा वू होता है और हम दुविधा में आ जाते हैं कि यह सच है या झूठ.

तो यह था डेजा वू. उम्मीद है कि आप जान गए होंगे कि असल में क्या होता है डेजा वू? और क्या कहती हैं इससे संबंधित थ्योरी! हां एक बात तो तय है कि यह कोई मानसिक बीमारी तो बिलकुल नहीं हो सकती. इसलिए अगर आपने कभी ‘डेजा वू’ का ऐहसास किया है तो तो घबराइयेगा नहीं, बल्कि बाकियों को भी इसकी जानकारी दीजिएगा, ताकि वह किसी प्रकार की गलतफहमी पालने की गलती न करें.

Web Title: Interesting Facts of  Deja vu, Hindi Article

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