जब तलक हैं जिंदा हम तुम्हें मरने न देंगे, खो दिया हमने तुम्हें तो पास अपने क्या रहा, कौन फिर चांद से बात धरती की कहेगा, तुम लड़कों की लड़कपन, तुम जवानों की जवानी, बोलती थीं न तुम, बोलता था तुममें जग सारा.
किसी कवि की ये पंक्तियां देश की उस बेटी के नाम सटीक बैठती है, जो दुनिया में सिर्फ जीने के लिए नहीं आई, बल्कि दूसरों को सदा सदा के लिए प्रेरित करने का दम भरना उनकी ज़िन्दगी का छिपा मकसद था. मौत ने महज उनके शरीर को खत्म किया, किन्तु असल काम तो वह कर ही गयीं. हम बात कर रहे हैं देश को हौसलों की उड़ान देने वाली बेटी कल्पना चावला की, जो दुर्भाग्य से अब हमारे बीच नहीं है. आइये जानते हैं देश की इस बहादुर बेटी के कुछ किस्से:

अंतरिक्ष की परी

हरियाणा के करनाल में जन्मीं कल्पना चालवा के मन में बचपन से ही ऐसी उड़ान भरने का जज्बा था, जिसमें वह आसमान छू सकें. यह आसान नहीं था, लेकिन अपने हौसले के साथ वह आगे बढ़ीं. कल्पना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा टैगोर बाल निकेतन से पूरी की. इसके बाद उन्होंने 1982 में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से ली.

डिग्री लेते ही कल्पना ने देरी नहीं की और 1982 में यूएसए की तरफ उन्होंने अपना रुख कर लिया, जहां 1984 में उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आरलिन्गटन से प्राप्त की.

वह यहीं नहीं रुकीं, अंतरिक्ष यात्री बनने के सपने को पूरा करने के लिए उनका सतत प्रयास जारी रहा. जिसके परिणाम स्वरुप वह देश की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनी.  इससे पहले भारत के राकेश शर्मा ने 1984 में यह इतिहास रचा था. कल्पना को उनकी इस सफलता के बाद दुनिया ने अंतरिक्ष की परी कहकर बुलाया.

Interesting Facts on Kalpana Chawla (Pic: pinterest.com)

नासा की यादगार इंट्री

1988 का वो दिन कल्पना अपने जीते जी कभी नहीं भूल पाईं, जब उन्हें नासा के लिए काम करने का मौका मिला. जहां रहकर उन्होंने कई शोध किए और अपने सपनों को हक़ीकत बनाने में जुट गईं. उनकी जी-तोड़ मेहनत का ही नतीजा था कि वह बहुत जल्द फ्लुइड डायनामिक्स में सबसे महत्वपूर्ण अनुसंधान करने में सफल हुई थी. इस सफलता के बाद उनमें गजब की ऊर्जा देखने को मिली और फिर वह दिन आ गया जिसका उन्हें लम्बे समय से इंतजार था. साल 1995 में उन्हें नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल किया गया और साल 1996 में उन्हें एसटीएस- 87 में ‘मिशन विशेषज’ का पदभार सौंपने की घोषणा कर दी गई थी.

हौसलों की उड़ान

19 नवंबर 1997 का वो दिन था जब कल्पना चावला अपने सपने की उड़ान को सफलता पूर्वक पूरा कर चुकी थीं. उन्होंने अपनी यह उड़ान एसटीएस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की, जो कि 5 दिसंबर 1997 तक थी. इस पहली अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए थे और धरती की 252 परिक्रमाएं की थीं.

इसके बाद कल्पना के मन में ‘दिल मांगे मोर’ का कौतूहल उमड़ने लगा और उन्होंने 16 जनवरी 2003 को एक बार फिर से कोलंबिया शटल से उड़ान भरी, जिसमें उन्होंने करीब 80 शोध पूरे किए थे.

जानकारी के अनुसार यह कोलंबिया का 28वां अभियान था. जिसमें धरती की परिक्रमा के दौरान इसकी 400 किलोमीटर की ऊंचाई थी और यान की गति करीब 17 हजार 500 मील प्रति घंटा थी.

Interesting Facts on Kalpana Chawla (Pic: cliparts)

जब नहीं लौटीं कल्पना

अपनी दूसरी उड़ान के साथ इतिहास की एक नई इबारत लिखने वाली इस बेटी का देश मिशन से लौटने का इंतजार कर रहा था. ताकि वह कल्पना का सत्कार कर सके, लेकिन फरवरी 2003 को आई एक खबर ने देश को गम में डुबो दिया.

खबर यह थी कि कल्पना जब अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा से लौट रही थी तो 63 किलोमीटर की ऊंचाई से उनका यान धमाके के साथ टूटकर बिखर गया, जिसमें उनके साथ गए अन्य 6 अंतरिक्ष यात्री भी काल के गाल में चले गए.

जिसके बाद अब तक सफल कहलाया जाने वाला ये अभियान एक भीषण दुखदायी सत्य बनकर रह गया. हालांकि इस हादसे के कुछ दिन बात यह भी खबर आई कि जिस दिन कल्पना चावला ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी, उसी दिन कल्पना और उनके साथियों की मौत हो चुकी थी.

मरणोपरांत सम्मान

जेआरडी टाटा से प्रभावित और प्रेरित होने वाली कल्पना चावला को मरणोपरांत उनकी उपलब्धियों के लिए कांग्रेशनल अंतरिक्ष पदक का सम्मान, नासा अन्तरिक्ष उड़ान पदक, प्रतिरक्षा विशिष्ट सेवा पदक और नासा विशिष्ट सेवा पदक जैसे सम्मानों से सम्मानित किया गया.

Interesting Facts on Kalpana Chawla (Pic: bp.blogspot.com)

कल्पना चावला की कहानी इस बात को प्रमाणित करती है कि भले ही उन्होंने छोटे से शहर में जन्म लिया था, लेकिन उनमें कुछ करने की चाह थी. इसी के चलते वह अपने सपने पूरे करने मेंं सफल रही. भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से जो मिसाल कायम की है, इससे वह अमर हो चुकी हैं. महिला सशक्तिकरण की राह में भी कल्पना चावला ने नई इबारत लिखी है, जिससे हर एक को प्रेरणा लेनी चाहिए.

Web Title: Know facts about Kalpana Chawla on her Birthday, Hindi Article

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