Mahendra Singh Dhoni Success Story, Virat Kohli (Pic Credit: IndianExpress.com)

महेंद्र सिंह धोनी की सफलता अपने आप में एक मिशाल है. न केवल क्रिकेट के खेल में, बल्कि दुनिया भर के तमाम खेलों में सफल खिलाड़ियों की कसौटी पर उन्हें कसा जा सकता है. एक सफल कप्तान के रूप में हर भारतवासी उन्हें प्यार करता है, पर क्या आप जानते हैं कि एम एस धोनी की सफलता इससे कहीं आगे बढ़कर है. आइये उनकी सफलता के कुछ पहलुओं को समझने का प्रयत्न करते हैं:

बेहतरीन कैप्टन के साथ बेहतरीन ब्रांड मैनेजर

बेहतरीन खेल के साथ अपनी ब्रांड वैल्यू को किस तरह से ऊंचाई पर पहुंचाया जाए, इसके बारे में समझने के लिए एम एस धोनी से बेहतर कोई और नहीं! इस देश में कई ऐसे खिलाड़ियों की खबरें अक्सर ही आती हैं, जिसमें बताया जाता है कि खिलाड़ी के अपने खेल में अच्छा होने के बावजूद, उसके पास आर्थिक तंगी बनी रही! ऐसे तमाम खिलाड़ियों को महेंद्र सिंह धोनी की तरफ एक बार देखना चाहिए.

कोई कुछ भी कह ले, किन्तु समाज आपको तब तक सफल नहीं स्वीकार करता है, जब तक अपने काम के साथ-साथ आप व्यवसायिक सफलता भी अर्जित नहीं कर लेते हैं.

महेंद्र सिंह धोनी ने इस बात को पूरे विश्व के सामने प्रमाणित किया. जून 2015 में फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर 100 खिलाडिय़ों की सूची में शामिल अकेले भारतीय धोनी ही थे! गौरतलब है कि जिस सूची में अमरीकी मुक्केबाज फ्लायड मेवेदर गोल्फर टाइगर वुड्स, टेनिस स्टार रोजर फेडरर और फुटबालर रोनाल्डो जैसे खिलाड़ी शामिल हों, उसमें धोनी का 23वें स्थान पर काबिज़ रहना उनकी सफलता की कहानी मजबूती से बताता है.

खेलों के प्रति लोगों की सोच बदल दी

निश्चित रूप से इस बदली ‘सोच’ के कई पहलू हैं. पहले क्रिकेट बड़े शहरों के खिलाड़ियों के लिए एक तरह से आरक्षित हो गया था, किन्तु छोटे शहर से आए माही द्वारा इस खेल में नए कीर्तिमान गढ़े जाने से बड़ा परिवर्तन आया है. अब न केवल क्रिकेट में, बल्कि प्रत्येक खेल में बड़े-छोटे शहरों का अंतर काफी कम हो गया है. इसका बड़ा श्रेय एम एस धोनी को दिया जा सकता है.

Mahendra Singh Dhoni Success Story, Captain Cool (Pic Credit: Twitter)

विवादों से दूरी

हालाँकि, महेंद्र सिंह धोनी को कई बार विवादों में खींचने की कोशिश की गयी, मसलन सौरव गांगुली, वीरेंदर सहवाग और युवराज सिंह से विवाद! इसी तरह कभी बीसीसीआई के चीफ रहे एन. श्रीनिवासन और आईपीएल में उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के विवादों के साथ भी उनका नाम जोड़ा गया. इन सबके बावजूद अनावश्यक विवादों से खेल का यह महायोद्धा दूर ही रहा! ऐसे “जेंटलमैन गेम” कहे जाने वाले क्रिकेट के नाम को धोनी ने सार्थक भी किया है. कप्तानी के तौर पर एम एस धोनी का अद्भुत रिकॉर्ड आप ही बहुत कुछ कह देता है और यह इसीलिए संभव हो सका, क्योंकि एम एस धोनी ने विवादों से दूर रहने की भरसक कोशिश की है.

बुराइयों से बचाव

कहते हैं, एक तो ऊंचाई पर चढ़ना कठिन होता है, किन्तु उस से भी कठिन होता है ‘ऊंचाई पर बने रहना’! बेशक खेल की दुनिया में हमारा देश आगे कदम बढ़ा रहा है, किंतु विवादों से दूर रहकर, गुटबाजी से दूर रहकर, व्यर्थ की बुराइयों (नशा, मारपीट इत्यादि) से बचकर अपने ब्रांड को कैसे मैनेज किया जाना चाहिए, इस फील्ड में धोनी ने हर क्षेत्र के खिलाड़ियों को राह दिखलाने का कार्य किया है. वह लोग जो थोड़ी सी शोहरत, दौलत मिलते ही बहक जाते हैं, वहीं दौलत-शोहरत की बुलंदी पर होने के बावजूद धोनी अपने पैर ज़मीन पर टिकाये रहे!

संघर्ष के बिना कुछ भी नहीं

पिछले साल ही महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी पर बनी मूवी ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ आई, जिसमें दिखलाया गया था कि उनकी जिंदगी शुरुआत से ही इतनी सफल नहीं थी, बल्कि उसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया. किस तरह एक मध्यम वर्गीय लड़का नौकरी और रोजी-रोजगार के चक्करों में उलझकर अपनी राह से भटक जाता है, किन्तु अपार लगन से वह वापसी भी कर सकता है, यह धोनी की बायोपिक में सुन्दर ढंग से दर्शाया गया है. भारतीय क्रिकेट में तमाम खिलाड़ी आएंगे और जाएंगे पर क्रिकेट के तमाम फोर्मेट्स में धोनी ने इंडियन क्रिकेट टीम को निर्विवाद रुप से शीर्ष जिस प्रकार बनाए रखा है, वह आने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों और कप्तानों को लंबे समय तक चुनौती देती रहेगी!

भविष्य का नेतृत्व तैयार करने में सहयोग

महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी रिटायरमेंट के बाद बयान दिया कि ‘उन्होंने विराट कोहली के एक कप्तान के तौर पर तैयार होने का इन्तजार किया और उसके बाद रिटायरमेंट लिया.’ धोनी का यह बयान समझने वालों के दिल को छू लेता है. कहाँ तो लोगबाग कुर्सी से चिपके रहने को मृत्युपर्यन्त तक अपना अधिकार समझते हैं और कहाँ धोनी जैसे महायोद्धा अपने नेतृत्व में भविष्य की राह खोजते हैं. अच्छी बात यह भी है कि कप्तानी छोड़ने के बाद 2019 का विश्व कप कोहली की कैप्टनशिप में खेलने की इच्छा माही ने व्यक्त की है. अन्यथा जूनियर के नेतृत्व में सीनियर, वह भी धोनी जैसा बड़ा नाम खेले, ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं. इसके पीछे शायद यही सोच रही होगी कि वर्ल्ड कप के लिए नए कप्तान को तैयारी का भरपूर समय मिले तो माही ने अपने विस्तृत अनुभव को भी नए कैप्टन के प्लान के हिसाब से उपलब्ध रखने का विकल्प खुला छोड़ दिया है!

Mahendra Singh Dhoni Success Story, Sachin Tendulkar (Pic Credit: IndianExpress.com)

टीम पर अटूट भरोसा

आप अकेले काम करते हो तो फिर बड़ा काम नहीं कर सकते. महेंद्र सिंह धोनी और सचिन तेंदुलकर की तुलना की जाए तो बेशक सचिन एक महान खिलाड़ी रहे हों, किन्तु अपने क्रिकेट कैरियर में वर्ल्ड कप जैसी सफलता दिलाने के लिए वह खुद धोनी के अहसानमंद होंगे. जाहिर तौर पर वर्ल्ड कप के विभिन्न फॉर्मेट्स में सफलता अकेले धोनी की भी नहीं है, बल्कि उनके द्वारा निखारी गयी टीम की है.

टीम पर धोनी किस कदर भरोसा करते हैं, इसके लिए अगर कुछ वाकयों का ज़िक्र करें तो आप याद करें, जब 2007 वर्ल्ड टी-20 के फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी ने हरभजन सिंह की बजाय जोगिंदर शर्मा से आख़िरी ओवर कराया था. इसी तरह, इसी वर्ल्ड टी-20 कप के लीग राउंड में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत का मैच टाई हुआ था और मैच का फ़ैसला बॉल आउट के जरिए होना था. यहाँ, पाकिस्तान ने रेगुलर गेंदबाज़ों को चुना जबकि धोनी ने हरभजन सिंह के अलावा वीरेंद्र सहवाग और रॉबिन उथप्पा जैसे पार्ट टाइम गेंदबाज़़ों पर दांव खेला और मैच जीता.

ऐसे ही, स्पेशलिस्ट बल्लेबाज होने के बावजूद, धोनी ने 2011 वर्ल्ड कप में युवराज को रेगुलर गेंदबाज़ की तरह इस्तेमाल किया और इस दांव से विरोधियों को घेरने में कामयाब भी रहे. तब धोनी के भरोसे से युवराज ने 9 मैचों में 75 ओवर डाले और 15 विकेट लिए, तो उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल, सेमीफाइऩल और फ़ाइनल में दो-दो विकेट हासिल किए. इसी तरह, 2011 वर्ल्ड कप में धोनी ने सुरेश रैना और आर अश्विन को शुरुआती मैचों में ‘छुपाए’ रखा और नॉकआउट दौर में ‘सरप्राइज़ पैकेज’ की तरह इस्तेमाल किया, जिनका ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल और पाकिस्तान के खिलाफ सेमी फ़ाइनल में टीम इंडिया को भरपूर फायदा मिला!

अपनी टीम पर भरोसा करने की धोनी की कहानी अनंत है और वह ‘पारस पत्थर’ की तरह, युवा खिलाड़ियों को निखारने में अपनी ऊर्जा लगातार लगाते रहे थे! कम सफल या तात्कालिक रूप से सफल न होने वाले खिलाड़ियों पर भी धोनी ने लगातार भरोसा दिखलाया.

उदाहरण दें तो, 2011 वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों में तेज़ गेंदबाज़ आशीष नेहरा प्रभावी साबित नहीं हुए, लेकिन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में धोनी ने उन्हें मौका दिया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी नेहरा सफल साबित हुए थे.

जाहिर तौर पर अगर इतने सारे गुण किसी एक खिलाड़ी के भीतर हों, तो ही वह मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह सफलता के परचम लहरा सकता है. महेंद्र सिंह धोनी के इन गुणों में से अगर कुछ पर भी हम अमल कर सकें, तो अपने जीवन में क्रांति ला सकेंगे, इस बात में दो राय नहीं!

Web Title: Mahendra Singh Dhoni Success Story

Keywords: Indian Cricket, World Cup Winner Captain, M S Dhoni, Mahi, Team Leader, Controversy, Virat Kohli, Sports, Brand Management, Struggle Stories, Captain Cool, Hindi Articles, Cricket, Sport Articles, Sport Articles in Hindi, Cricket Facts, Celebrities, Celebs