ज़रा विचार कीजिये, जब हम परेशान होते हैं तो हमेंं अकलेपान क्यों चाहिए होता है? जबकि कई बार ऐसा भी होता है कि अकेलापन हमें और ज्यादा निराश कर सकता है. बावजूद इसके हमें अकेला ‘वक्त’ बिताने से परहेज नहीं करना चाहिए, क्योंकि मानव जीवन की अधिकांश समस्याएं हम से ही जुड़ी होती हैं और उसका हल भी हमारी सोच-प्रक्रिया से ही निकालता है. अकेलेपन को लेकर जो भी धारणाएं हो, लेकिन सच तो यह भी है कि अकेलेपन से बहुत सारे फ़ायदे भी जुड़े हैं, जिनका हमें सही समय में एहसास भी होता है. आइये, कुछ एक अनुभवों पर गौर करते हैं…

खुद को खुद से जोड़ता है ‘अकेलापन’

जब आप अकेले होते हैं तो आपको आपके अपनों से जुड़ने का भरपूर समय मिलता है. सबसे बड़ी बात, जो आप हैं, वही रहने का मौका मिलता है. दूसरों से बातें करना बहुत आम है, पर खुद से बातें करना थोड़ा अलग होता है. जिसके अपने अलग फायदे हैं. अकेलापन आपको, आपकी ही खोज में मदद करता है और एक बेहतर इंसान बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है. आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में किसी के पास खुद के लिए समय नहीं होता है और ऐसी परिस्थिति में वह ‘निराश’ सा हो जाता है. कई बार तो उसे पता भी नहीं चलता कि उसे वास्तविक परेशानी है क्या? हमारे भारतीय शास्त्रों में भी ‘एकांतवास’ का कई जगहों पर ज़िक्र आता है. महात्मा बुद्ध की कथा किसे नहीं पता है? जब वह सांसारिक परिस्थितियों से खिन्न हो चुके थे, तब उन्होंने ज्ञान की खोज में ‘एकांतवास’ की शरण ली. पहले के ज़माने के राजा-महाराजा भी किसी समस्या का हल नहीं मिलने पर ‘एकांतवास’ में विचारमग्न होते थे और इस प्रकार तमाम चुनौतियों से पार पाने का साहस उनमें भर जाता था.

गंतव्य को दिखलाता है…

जब आप अकेले में जीवन की यात्रा में होते हैं, तो आपका ‘गंतव्य’ आपका इंतज़ार कर रहा होता है और अपने उस गंतव्य तक पहुँचने के लिए आप कुछ भी करने को तैयार भी रहते हैं. अकेलापन आपके अंदर के संकोच को दूर तो भगाता ही है, साथ ही साथ आपको साहसिक एवं मिलनसार बनाता है. जिसके चलते आप अपने जीवन में नए आयाम गढ़ने के लिए प्रोत्साहित होकर आगे बढ़ते हैं. मुश्किल तब आती है, जब कई बार आप अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं. एक उदाहरण से कुछ यूं समझिये इसे कि आपको किसी एक वस्तु की आवश्यकता है और उसे खरीदने के लिए आप ‘शॉपिंग मॉल’ जाते हैं, पर वहां की चमक-दमक देख कर आप अपने जरूरत की वस्तु तो खरीदते नहीं हैं, हाँ उसकी बजाय कुछ और खरीद बैठते हैं. ठीक इसी प्रकार हमारा जीवन भी कई बार ‘भटकाव’ के दौर से गुजरता है और ऐसे में अकेलापन आपके ‘गंतव्य’ को पुनः प्रकाशित करता है.

प्रकृति से जोड़ने में मददगार

अक्सर, जब हम अकेले होते है, एकांत में होते हैं, तो बाग-बगीचे और पार्कों जैसे स्थल हमारी पंसदीदा जगह होते हैं. जहां हम प्रकृति को महसूस कर सकते हैं. पक्षियों की सुबह की मधुर आवाज, सूरज का उज्ज्वल प्रकाश, फूल का स्पर्श इत्यादि प्राकृतिक सौन्दर्य से हमारा मन प्रसन्न हो उठता है. प्रकृति हमें शीतलता भी प्रदान करती है. अक्सर जीवन की व्यस्तताओं के बीच हम इन छोटी-छोटी बातों का आनंद लेना भूल जाते हैं, लेकिन जब आप अकेले होते हैं, तब प्रकृति के तमाम रूपों का आपको आनंद मिलता है. आखिर कौन होगा, जिसे प्रकृति का साथ नहीं भाता होगा?

Major Benefits of Loneliness, Girl in Nature (Pic: picturefordesktop.com)

ज़रा-ज़रा सी ‘खुशी’…

कहते हैं इन्सान को कोई दूसरा ‘ख़ुश’ अथवा ‘दुखी’ नहीं कर सकता, बल्कि सर्वाधिक जिम्मेदारी खुद व्यक्ति की ही होती है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कई लोग अकेले में जोर से खिलखिलाते हैं. सच कहा जाए तो अकेलापन आपको हर जगह खुशी ढूंढने में मदद करता है. यह हमें एहसास कराता है कि खुशियां छोटे छोटे पलों में बड़ी हो जाती हैं. ऐसे में हमें खुशी के लिए किसी मनुष्य या परिस्थिति पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद के साथ वक्त बिताने से भी काफी कुछ राह खुल जाती है. खुश रहना और खुशनुमा ज़िंदगी हमारे जीवन की सबसे हसीन ‘वास्तविकता’ होती है. ज़रा-ज़रा सी खुशियों को ‘अकेलेपन’ में संजोकर ज़िन्दगी की सुंदरता को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए.

…तो अकेलापन धैर्यवान भी बनाता है ?

जब आप बेचैन होते हैं, हर कोई आपकी मदद नहीं कर सकता. खासकर अलग होते परिवारों के युग में आप को खुद को मजबूत बनाना ही पड़ता है. ऐसे में जब आप अकेलेपन में खुद से मिलते हैं, तो आप खुद से धैर्य रखने में माहिर हो जाते हैं. अकेलापन आपको बिना किताब के धैर्य रखना सिखाता है. हालाँकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप समाज से मिलना जुलना ही छोड़ दें. हाँ, इसका मतलब इतना जरूर है कि भागदौड़ की ज़िन्दगी में खुद से मिलने और बतियाने का समय आप अवश्य निकालें.

समाज को ‘ईमानदार अनुभव’ दे सकते हैं…

किसी भी प्रकार की रचना के लिए आपने लेखकों, कवियों को एकांत ढ़ूढ़ते देखा होगा, क्योंकि जब तक जीवन में ठहराव नहीं होगा, तब तक किसी भी प्रकार की रचना को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल सकता. केवल कवि, लेखक ही क्यों… जीवन के दुसरे क्षेत्र के अनुभव भी आप तभी दे सकते हैं, जब आप अपने अनुभवों को सहेज सकें और सहेजने का काम तो तभी हो सकता है, जब आप खुद के लिए समय निकालें.

इसके साथ जब ज्यादा लोगों से घिर जाने के कारण हमारी ऊर्जा कम होती प्रतीत होने लगे और हम थकान महसूस करते हैं,  ऐसे में यदि हम कुछ समय के लिए ‘अकेले’ रहने की आदत विकसित करें तो निश्चित तौर पर हमेंं शांति महसूस होगी. महज कुछ पल आंखें बंद करके बैठने मात्र से ही हमारे दिमाग को न सिर्फ़ सुकून मिलता है, बल्कि हम दोबारा से ऊर्जावान हो जाते हैं. दिमाग को शांत रखने की यह एक प्रकार की ‘थैरेपी’ भी है, जिसे लोग आजमाते भी रहते हैं.

अमूमन अकेले रहने को लोग बुरा मानते हैं, तो कईयों का मानना होता है कि अकेलापन कमजोरी की निशानी होती है. लेकिन कुछ लोग सच में अकेले रहते हैं! पर वे कभी भी खुद के अकेलेपन को अपनी कमज़ोरी नहीं मानते, बल्कि ‘ताकत’ बनाते हैं. वे लोग खुद में ऐसी क्षमता को खोज लेते हैं, जो बेहद ख़ास होती है. हालाँकि, आज की प्रोफेशनल ज़िन्दगी में बेहद मुश्किल है खुद के लिए ‘एकांत’ के कुछ पल ढूंढना, किन्तु हमारी कोशिश होनी चाहिए कि ज़िन्दगी की तमाम जिम्मेदारियों को निभाते हुए हम ‘सेल्फ डेवलपमेंट’ के लिए अकेलेपन का फार्मूला भी आजमायें.

Major Benefits of Loneliness, Spiritual Article (Pic: badfon.ru)

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