उत्तर कोरिया और अमेरिका की तनातनी छिपी नहीं है. इस बात की भी पूरी सम्भावना बन रही है कि दोनों देश तेजी से युद्ध की ओर बढ़ चुके हैं. ताकत की बात की जाये तो अमेरिका हर मामले में उत्तर कोरिया से आगे है, बावजूद इसके उसको हल्के में खुद अमेरिका और उसके सहयोगी देश तक नहीं ले रहे हैं. उसके पास परमाणु बम जैसे खतरनाक हथियारों का जखीरा मौजूद है, साथ में दूर तक मार करने वाली मिसाइलें भी. तो आईये इसी कड़ी में उत्तर कोरिया की मिसाइलों के सफर को विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं:

मिसाइलों का शुरुआती सफ़र

उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को ‘स्कड-क्लास’ के साथ शुरु किया था. कथित तौर पर इसकी पहली खेप 1976 (Link in English) में मिस्र से आई थी. बाद में 1984 के आसपास तक उत्तर कोरिया ने अपने ‘हसांग’ संस्करण का निर्माण कर दिया. इसकी अधिकतम सीमा 1,000 किलोमीटर थी. यह मिसाइल पारंपरिक, रासायनिक और जैविक हथियारों का एक स्वरुप थी.

इसक बाद ‘नोदोंग’ को बनाया गया था. यह ‘हसांग’ से बेहतर मानी जा रही थी. इसकी सीमा में बड़ा इजाफा किया गया. यह 1,300 किलोमीटर तक मार करने में कारगर थी. अप्रैल 2016 में स्ट्रैटेजिक स्टडीज के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थान के एक विश्लेषण में यह साबित हो गया है कि यह मिसाइल दक्षिण कोरिया और जापान के अधिकांश क्षेत्रों तक वार करने में सक्षम है.

Missile Power of North Korea (Pic: BBC)

‘मुसुदन’ का खौफ़

मुसुदन‘ (Link in English) को उत्तर कोरिया की खास मिसाइलों में से एक माना जाता है. 2016 में इसका परीक्षण किया गया था. इजरायल खुफिया एजेंसी की मानें तो मुसूदन’ 2,500 किलोमीटर तक जा सकती है. जबकि, संयुक्त राज्य अमेरिका की मिसाइल रक्षा एजेंसी का मानना है कि इसकी सीमा करीब 3,200 किलोमीटर है. वहीं कुछ लोग इसको 4,000 किलोमीटर तक मार करने के लिए जानते हैं. इसको पुकुगुक्ष के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर कोरिया के हिसाब से यह मिसाइल पनडुब्बी आधारित तकनीक पर बनी हुई है.

यहीं नहीं रुका सिलसिला…

2016 में ही उत्तर कोरिया ने हसन -10 (Link in English) मिसाइल का परीक्षण किया. यह 2,500 मील की दूरी तक जाने में सक्षम मानी जाती है. साथ ही इसे 2700 पाउंड वजन का परमाणु बम ले जाने योग्य माना जाता है. अगली कड़ी में हंस-13 के इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण पूरा किया गया था. परमाणु बम तक पहुंचने में सक्षम यह मिसाइल 7,450 मील तक पहुंच सकती है.

उत्तर कोरिया विश्वसनीय लंबी दूरी की मिसाइलों का निर्माण करने की कोशिश में लगा हुआ है, जो कि संयुक्त राज्य के किसी भी किनारे पहुंच सके. उत्तर कोरिया का प्योंगयांग तो यहां तक दावा कर चुका है कि उसने इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का पहला सफल परीक्षण कर लिया है.

Missile Power of North Korea (Pic: businessinsider.in)

हसांग -14 ने दी नई उड़ान

4 जुलाई 2017 (Link in English) को हसांग-14 (आईसीबीएम) नामक मिसाइल के परीक्षण के बाद प्योंगयांग ने दावा किया कि उनकी यह मिसाइल ‘दुनिया को हिला सकती है. कहा गया कि यह हथियार अमेरिका के अलास्का और हवाई द्वीप तक जा सकता है. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने तो यहां तक कहा कि हसांग-14 ‘भारी और विशाल परमाणु हथियार’ ले जाने में सक्षम है. हालांकि, इस दावे की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, किन्तु इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वह आगामी दिनों में इसे जरुर सत्यापित करने की कोशिश करेगा.

बताते चलें कि 2012 की सेना परेड में, प्योंगयांग ने  केएन-8 और केएन-14 नाम के दो आईसीबीएम दिखाए थे. केएन-8 मिसाइल एक विशेष ट्रक को चलाने और लॉन्च करने में सक्षम है, यह 11,500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के लिए जानी जाती है. वहीं केएन-14, महज 10,000 किमी की ताकत रखती है. माना जाता है कि इनका संबंध हसन-14 के साथ है. हालांकि इसके कहीं कोई प्रमाण नहीं मिलते.

‘बैलिस्टिक’ की जरुरत क्यों?

28 जुलाई 2017 को, उत्तर कोरिया ने अपना दूसरा और नवीनतम आईसीबीएम परीक्षण किया, जिसमें लगभग 1,000 किलोमीटर (Link in English) की ऊंचाई तक पहुंचने की क्षमता है. माना जाता है कि यह मिसाइल जापान तक समुद्र में लैंडिंग कर सकती है. वहीं इसकी जद में अमेरिका के कई हिस्से बताये जा रहे हैं. यह एक ऐसा हथियार होता है, जिससे दुश्मन की नाक में आसानी से दम किया जा सकता है. किसी भी देश के पास इसका होना बड़ा माना जाता है. इसको बनाने में उत्तर कोरिया ने ढेर सारा धन लगा दिया. उसको इसकी जरुरत क्यों पड़ी. यह एक बड़ा सवाल हो सकता है!

असल में ‘आईसीबीएम’ बनाने में उत्तर कोरिया ने अपना पैसा, समय और श्रम इसलिए खर्च किया, ताकि वह उसके द्वारा परमाणु बम हमलों का आयोजन कर सके. साथ ही अपने विरोधियों की नाक में दम कर सके. इसी के दम पर उसने अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे गुआम पर बमबारी की धमकी दे डाली थी.

बताते चलें कि उत्तर कोरिया पांच बार परमाणु परीक्षण भी कर चुका है. 2016 में ही उसके द्वारा दो बार परमाणु परीक्षण (Link in English) किए गए थे. ऐसे में इसमें दो राय नहीं कि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइल को रॉकेट से जोड़ने का दुस्साहस कर सकता है. मतलब साफ़ है कि इन दोनों ताकतों से तानाशाही द्वारा प्रशासित यह देश लैस हो चुका है और जो कुछ थोड़ी कसर बाकी है, वह अगले कुछ दिनों में पूरी की जा सकती है.

Kim Jong Un salutes during a visit to the Ministry of the People’s (Pic: elegraph.co.uk)

ऊपर से उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग की सनक का कोई भरोसा नहीं है. इस लिहाज से हथियारोंं के ढेर पर बैठे उत्तर कोरिया को खतरनाक देश माना जाता है. यह नहीं भूलना चाहिए कि ढाई करोड़ की आबादी वाला देश उत्तर कोरिया वस्तुतः युद्ध मानसिकता में रचा बसा, पला बढ़ा देश है. यहां के लोग युद्ध के हालात में रहने के आदी हो चुके हैं.

इस लिहाज से इसकी क्षमता पर संदेह नहीं करना खतरे से खाली नहीं है. यह इतना खतरनाक है कि अमेरिका जैसे बड़े देश को उसके बारे में सोचने की जरुरत पड़ने लगी है. अमेरिकी प्रेजिडेंट डोनॉल्ड ट्रम्प का गुस्से से भरा बयान इसका बड़ा उदाहरण है.

Web Title: Missile Power of North Korea, Hindi Article

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