हमारे देश में आर्थिक उदारीकरण के बाद तमाम कंपनियां आयी हैं और तमाम आएँगी भी, किन्तु इन सबके बीच टाटा का नाम अपने आप में ‘विशिष्ट’ है. गाँव से लेकर शहर तक और अमीर से लेकर गरीब तक की जुबान पर इसके नाम और इसकी ब्रांड-वैल्यू में एकरूपता रही है और टाटा ने खुद पर जताए गए विश्वास के साथ कभी खिलवाड़ भी नहीं किया है. उसके एथिक्स और मोरल वैल्यूज सदा से दूसरी कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए भी एक प्रेरणाश्रोत रहे हैं, किन्तु पिछले दिनों इस महान ग्रुप की साख पर कीचड़ उछालने का प्रयास अवश्य हुआ और अब उन दागों से उबरने के लिए इस बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान ने एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया है.

साइरस मिस्त्री एपिसोड

Cyrus Mistry (Pic Credit: Indianexpress.com)

साल 2016 में हुए तमाम घटनाक्रमों पर एक नजर डालें तो उनमें से एक प्रमुख घटना टाटा संस के चेयरमैन ‘साइरस मिस्त्री’ को अचानक पद से हटाये जाने की भी रही. इसको लेकर काफी बवाल मचा, दोनों पक्षों ने जम कर एक दूसरे पर दोषारोपण भी किया और इसकी कानूनी लड़ाई अब भी जारी है.

तमाम तकनीकी बारीकियों से इतर अगर सोचें तो इसके पीछे जो मूल कारण नज़र आया वह यह था कि ‘साइरस मिस्त्री’ ने टाटा ग्रुप के वैल्यूज को ठीक से समझा ही नहीं था. पूरा दोष उनका भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि खुद कई साल जांच-पड़ताल करने के बाद खुद रतन टाटा ने अपना उत्तराधिकारी चुना था. ऐसे में यह भी माना जाना चाहिए कि रतन टाटा द्वारा साइरस मिस्त्री को ठीक से परखा नहीं गया अथवा टाटा समूह की बारीकियों को वह ठीक से समझा ही नहीं पाए.

खैर, उनके कार्यकाल में टाटा को टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र में बड़ा नुकसान हुआ, तो टाटा मोटर्स और टाटा पावर की हालत भी बेहद खराब नज़र आयी. हालाँकि, साइरस को हटाये जाने के तुरंत बाद रतन टाटा ने कार्यवाहक के तौर पर टाटा संस की जिम्मेदारी संभाली और यह भरोसा कायम किया कि अगले 4 महीनों के भीतर नए चैयरमैन की न केवल तलाश पूरी कर ली जाएगी, बल्कि टाटा ग्रुप के वैल्यूज को भी स्थिर रखा जायेगा.

कौन हैं नटराजन चन्द्रशेखरन

अपने वादे के अनुसार रतन टाटा ने नए चैयरमैन के रूप में ‘नटराजन चन्द्रशेखरन’ के नाम की घोषणा कर दी है.

टाटा ग्रुप के इतिहास में वह पहले गैर-पारसी चीफ होंगे, जिनके ऊपर टाटा ग्रुप ने भरोसा दिखलाया है और उम्मीद की जा रही है कि वह बेहतरीन प्रदर्शन के साथ उन छींटों को भी साफ़ करने में सफल होंगे जो दुर्भाग्य से पिछले दिनों टाटा ग्रुप की मजबूत दीवारों पर फैलाये गए हैं.

जिन कुछ कंपनियों के ऊपर संकट की बात की जा रही है, उन्हें भी एक अनुभवी ‘मिस्त्री’ की तरह वह मरम्मत करके संकट टाल लेंगे, ऐसा भरोसा भी उन पर दिखलाया गया है. टाटा जैसे महत्वपूर्ण ग्रुप की कमान सँभालने वाले एन. चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु के मोहनूर में हुआ था. इन्होंने नेशनल इंस्ट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एमसीए की पढाई की है, तो 53 वर्षीय चन्द्रशेखरन टीसीएस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे हैं. गौरतलब है कि टीसीएस टाटा समूह की फ्लैगशिप कंपनी होने के साथ-साथ 16.5 अरब डॉलर नेटवर्थ के साथ समूह की सबसे प्रभावशाली कंपनी है. नटराजन चन्द्रशेखरन 1987 में टाटा समूह के साथ जुड़े थे और उन्हीं के नेतृत्व में टीसीएस टाटा समूह की सबसे बड़ी कंपनी बनने के साथ-साथ मुनाफे के टर्म्स में भी सर्वाधिक कामयाब साबित हुई. नटराजन ने टीसीएस की कमान बतौर सीईओ 2009 में संभाली और तबसे लगातार उन्होंने टीसीएस को आईटी दुनिया की महत्वपूर्ण कंपनी के तौर पर नेतृत्व दिया है. वैसे टीसीएस पहले भी भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी थी, किन्तु एन. नटराजन के पहले इनफ़ोसिस को प्रबंधन और मुनाफे के लिहाज से मानक माना जाता था. चंद्रशेखरन नटराजन, जिन्हें ‘चंद्रा’ के नाम से भी पुकारा जाता है, उन्होंने टीसीएस को बड़े के साथ साथ सक्षम और तेज कंपनी के रूप में लगातार आगे बढ़ाया है.

Ratan Tata (Pic Credit: Awesomeindia.in)

आखिर एन. चंद्रशेखरन ही क्यों?

खबरों के अनुसार, अक्टूबर 2016 में ही टाटा संस के चेयरमैन चुनने हेतु सिलेक्शन पैनल का गठन कर लिया गया था. खुद रतन टाटा के अलावा इस पैनल में टीवीएस चेयरमैन वेनू श्रीनिवासन, बेन कैपिटल के अमित चंद्रा, पूर्व राजदूत रोनेन सेन और वॉरविक यूनिवर्सिटी के कुमार भट्टाचार्या शामिल थे. बता दें कि भट्टाचार्या को छोड़कर पैनल के सभी सदस्य टाटा सन्स बोर्ड में भी शामिल हैं. टीसीएस के सीइओ और एमडी एन चंद्रशेखरन के अलावा इस रेस में जिन नामों की चर्चा थी, उसमें जगुआर लैंड रोवर के रॉल्फ स्पेथ, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के गैर कार्यकारी चेयरमैन हरीश मनवानी जैसे बड़े और मजबूत नाम शामिल थे. मनवानी बड़े उम्मीदवार के तौर पर सामने थे, लेकिन ज्यादे उम्र और कंपनी के भीतर से नहीं होना उनके मार्क्स कम कर गया. रही बात रॉल्फ स्पेथ की तो करीब 100 तरह के बिजनस में दखल रखने वाले ग्रुप के तमाम सीईओज में से जगुआर लैंडरोवर के बॉस राल्फ स्पेथ ही इकलौते ऐसे सीईओ थे, जो चंद्रशेखरन को चुनौती दे रहे थे, क्योंकि टीसीएस और जेएलआर ही समूह की ऐसी दो कंपनियां हैं, जो लगातार ग्रोथ करती रही हैं.

टीसीएस में चंद्रशेखरन का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड और रतन टाटा के साथ सामंजस्य को देखते हुए उनका चयन किया गया. चंद्रा के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड की बात करें तो 2009 में जहाँ टीसीएस कंपनी का टर्नओवर 30,000 करोड़ रुपये था, तो उनकी लीडरशिप में ही 2016 तक यह बढ़कर 1.09 लाख करोड़ रुपये हो गया. यही नहीं, कंपनी का मुनाफा भी तीन गुना बढ़ते हुए 7,093 करोड़ से बढ़कर 24,375 करोड़ हो गया.

अब देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट कंपनी में 3,50,000 एंप्लॉयीज हैं. दिलचस्प है कि टीसीएस देश में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाली प्राइवेट कंपनी है और 116 अरब डॉलर के टाटा ग्रुप के मार्केट कैप में टीसीएस की हिस्सेदारी 60 पर्सेंट है. आगे बात करते हैं तो ‘चंद्रा’ ने टीसीएस की 23 बिजनस यूनिट्स में सर्विस डिलिवरी, ऑपरेशंस और नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने का काम किया. बाद में उन्होंने इस कंपनी को 8 ग्रुप्स में बांट दिया, जिनके हेड उन्हें रिपोर्ट करते थे. ऐंगल ब्रोकिंग के रिसर्च वाइस प्रेजिडेंट सरबजीत के. नांगरा कहते हैं कि, ‘चंद्रा ने कठिन काम को आसान कर दिखाया.’ ऐसे में टाटा की कई सारी इकाईयां जो घाटे में चल रही हैं, उन्हें मुनाफ़े में लाना अब नटराजन की जिम्मेदारी है और साइरस मिस्त्री एपिसोड के बाद भी उनके द्वारा जिम्मेदारी लेना यह साबित करता है कि वर्तमान चुनौतियों को वह भी भली भांति समझ और महसूस कर रहे हैं.

Natrajan Chandrasekaran Tata Sons Chairman (Pic Credit: Indiatimes.com)

बिजनेस लीडर्स क्या कहते हैं?

नटराजन के नाम के घोषणा के बाद बिजनेस जगत की तमाम हस्तियों ने नटराजन के बारे में अपनी राय व्यक्त की है, जिसमें:

  • इंफोसिस के सीईओ विशाल सिक्‍का का कहना है कि ‘चंद्रशेखरन एक काबिल नेतृत्वकर्ता हैं और मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं.’
  • विप्रो के सीईओ अब्दाली जेड. नीमच वाला ने इस सम्बन्ध में कहा कि ‘टाटा की मूल्य प्रणाली के लिए चंद्रशेखरन एक आदर्श प्रतिरुप हैं और देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने के लिए यह एक अच्छा चयन है.’
  • रिलायंस अनिल धीरुभाई अंबानी समूह के प्रमुख अनिल अंबानी ने कहा ‘चंद्रशेखरन की प्रतिबद्धता, धीरज, साहस और फोकस को लेकर उनके मन में उच्चकोटि का सम्मान है और वह एक ‘कम्प्लीट पैकेज’ हैं.’
  • प्रमुख उद्योगपति आनंद महिंद्रा कहते हैं कि ‘अब आप एक भारतीय आदर्श के संरक्षक हैं. आपके पास इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए मजबूत कंधे हैं.’
  • आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर ने कहा कि ‘चंद्रशेखरन ने टीसीएस को वैश्विक कंपनी बनाने का नेतृत्व किया है. उनका वैश्विक अनुभव और टाटा समूह के साथ लंबा जुड़ाव उनकी नयी जिम्मेदारी के लिए अमूल्य सिद्ध होगा.’
  • टीसीएस के पूर्व वाइस चेयरमैन एस रामदुराई का कहना है कि ‘चंद्रशेखरन ने बहुत ही काबिलियत के साथ टीसीएस को लीड किया है. वे ग्रुप को भी अच्छे तरीके से लीड करेंगे.’

Web Title: Natrajan Chandrasekaran Tata Sons Chairman

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