सामान्य रूप में देखा जाए तो रत्न पत्थर का टुकड़ा मात्र होता है, लेकिन अपनी विशेषताओं के चलते उसे रत्न का दर्जा मिल जाता है. ठीक इसी तरह जो मनुष्य श्रेष्ठ होते हैं, वो रत्न कहलाते हैं. बचपन में जब भी आपने अकबर के बारे में पढ़ा होगा तो आपने उनके समय के नवरत्नों के बारे में अवश्य सुना होगा और उनसे जुड़े किस्सों ने आपको जरुर गुदगुदाया होगा. तो आइये आज फिर लौट चलें बचपन की यादों में और जाने अकबर के नवरत्नों के उन ख़ास गुणों के बारे में, जिससे वह अकबर के ‘नवरत्न’ कहलाये:

बीरबल

बीरबल अपनी चतुराई, वाक् पटुता और स्वामिभक्ति के कारण अकबर के सबसे पसंदीदा रत्न थे. उनके बारे में कहा जाता है कि उनमें हास्य और हाजिर जवाबी का अद्भुत गुण था, जिसके चलते वह अपने चुटकुलों के लिए हमेशा प्रासंगिक रहे. बीरबल से प्रभावित होकर अकबर ने उन्हें न्याय विभाग का उच्चाधिकारी तक नियुक्त कर रखा था. बीरबल अपनी प्रतिभा के लिए राजा की पदवी से भी विभूषित किए गए. जानकारों की मानें तो युसुफजाइयों के खिलाफ लड़ते हुए बीरबल मारे गये थे, जिसकी खबर सुनकर अकबर को काफी दुख हुआ था. यहां तक कि वह कई दिनों तक शोक में थे.

Akbar Navratan, Birbal (Pic: thelallantop.com )

अबुल फज़ल

अबुल फज़ल को उनकी कुशाग्र बुद्धि और चतुराई के लिए अकबर का खास नवरत्न कहा जाता है. वह साहित्य इतिहास और दर्शन शास्त्र के विद्वान थे. वाद विवाद में अबुल का कोई मुकाबला नहीं कर पाता था. वह विद्वान इतिहासकार और लेखक होने के साथ ही योग्य राजदूत और सेनानायक भी थे. इसी वजह से अकबर अबुल फजल से बहुत प्रभावित था. अबुल फज़ल ने आइने-अकबरी जैसे कई सारे तोहफे अकबर के समयकाल को दिए, लेकिन इसके बावजूद शहजादे सलीम के कहने पर वीर सिंह बुंदेला ने उनकी हत्या कर दी थी. इस बारे में जब अकबर को पता चला तो उन्होंने सलीम को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि आखिर फजल की हत्या क्यों कराई? यदि वह कहता तो मैं उसको राज सिंहासन स्वयं दे देता.

राजा टोडरमल

राजा टोडरमल को वित्तीय मामलों के बारे में काफी अनुभव था जिसके चलते अकबर उनसे ख़ास प्रभावित था. बाद में अकबर ने उन्हें अपना वित्त मंत्री बना दिया. अकबर के सेवा में आने से पहले वे शेरशाह सूरी के यहां नौकरी करते थे. अकबर के शासन-काल में भूमि बंदोबस्त और मालगुजारी में जो मत्त्वपूर्ण सुधार  किये गए थे, उसके सूत्रधार राजा टोडरमल ही थे. बता दें कि राजा टोडरमल ही थे, जिनके द्वारा विश्व की प्रथम भूमि लेखा-जोखा एवं मापन प्रणाली तैयार की गई थी.

Akbar Navratan , Raja Todarmal (Pic: dewantodarmal )

मानसिंह

अपनी बुद्धिमानी साहस और उच्च वंश के होने के नाते मान सिंह की गिनती अकबर के खास दरबारियों में होती थी. राजा मान सिंह अकबर का प्रधान सेनापति भी था. कहा जाता है कि अकबर मान सिंह के कार्य और व्यवहार से बड़ा खुश रहता था और मान सिंह को कभी फर्जद (बेटा) तो कभी मिर्ज़ा राजा के नाम से बुलाता था. जानकारों की मानें तो हिन्दुओं के प्रति अकबर के दृष्टिकोण को अधिक उदार बनाने में मानसिंह ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

Akbar Navrata , Maan Singh (Pic: warfare.meximas )

तानसेन

जब बात संगीत की हो तो तानसेन का जिक्र होना लाजमी है. संगीत सम्राट तानसेन का अकबर के नौ रत्नों में महत्त्वपूर्ण स्थान था. वह अपनी संगीत कला के लिए ही अकबर के खास माने जाते थे. अकबर उनका बड़ा ही सम्मान करता था. अकबर के ही नवरत्नों में से एक अबुल फजल इनकी संगीत से बड़ा प्रभावित था. बाद में उसने अकबर को सुझाव दिया कि तानसेन को दरबार का नवरत्न होना चाहिए. अकबर संगीत और कला प्रेमी तो था ही, फिर जब उसने तानसेन का संगीत सुना तो वह मंत्र मुग्ध हो गया.

Akbar Navratan, Tansen (Pic: saaranimusic.org)

अब्दुर्रहीम खान खाना

अपने व्यक्तित्व के कारण  बादशाह अकबर के सबसे खास माने जाने वाले अब्दुर्रहीम खान-खाना की गिनती अकबर के दरबार में उच्च कोटि के विद्वान और कवि के रूप में होती थी. वह अकबर के संरक्षक बैरम खां का पुत्र था. वह फारसी, अरबी, तुर्की, संस्कृत, हिन्दी तथा राजस्थानी भाषा का बड़ा जानकार माना जाता था. अकबर ने गुजरात को जीतने के बाद अब्दुर्रहीम को खान खाना की उपाधि से नवाजा था. अब्दुर्रहीम के दोहे आज भी हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि के रूप में जन-जन की वाणी से सुने जा सकते हैं.

Akbar Navratan , Abdur Rahim Khan Khana (Pic: reckontalk.com )

अबुल फैजी

अबुल फैजी अपने बड़े भाई अबुल फजल की तरह ही अकबर के बड़े खास थे. उनकी फ़ारसी भाषा मेंं अच्छी पकड़ थी. वह फ़ारसी में कविता भी लिखा करता था. अकबर ने अबुल फैजी को अपने बेटे के लिए गणित शिक्षक के रूप में नियुक्त किया था और साथ ही वह अकबर के दरबार में राज कवि के पद पर भी आसीन रहे. जानकारों के मुताबिक अकबर द्वारा चलाये गए दीन ए इलाही का बहुत बड़ा समर्थक माना जाता था .

मुल्ला दो प्याजा

अपनी मेहनत और लगन के वजह से  बादशाह अकबर को प्रभावित करने वाला मुल्ला दो प्याजा अरब का रहने वाला था. वह हुमायूं के शासनकाल में ही भारत आया था. उसका असली नाम अब्दुल हसन था. कहा जाता था कि उसे साधारण जीवन जीने में दिलचस्पी नही थी. वह चाहता था कि वह भी अकबर के दरबारियो में शामिल हो. अतत: उसे शाही परिवार के मुर्गी खाने का प्रभार मिल गया. जहां उसने शाही परिवार के बचे हुए खाने को मुर्गीयों को खिलाने में इस्तेमाल किया. जिससे अकबर बहुत प्रसन्न हुआ और उसको शाही परिवार के पुस्तकालय का प्रभारी बना दिया. लेकिन मुल्ला तो कुछ और चाहता था, इसलिए उसने जी तोड़ मेहनत की ओर पुस्तकालय में ढेर सारे बदलाव कर दोबारा अकबर को प्रसन्न करने मेंं कामयाब रहा. जिसके फलस्वरुप वह शाही परिवार में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा. कहा जाता है कि उसे भोजन में दो प्याजा पसंद थी. इसलिए अकबर ने उसे दो प्याजा की उपाधि दे दी थी.

Akbar Navratan, Mulla Do pyaja (Pic: junglekey.in)

हकीम हमाम

हकीम हमाम की गिनती अकबर के मुख्य सलाहकारों में होती थी. जानकारों की मानें तो इसका नाम हुमायूं बुली खान था, जो बाद में हकीम हमाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ. हकीम हमाम शाही परिवार के बावर्ची खाने का प्रधान था. कहा जाता है कि यह लिपि पहचानने और कविता समझने में  विशेष रुप से माहिर था. इसके साथ ही वह आचारवान, उदार और मीठा बोलने वाला व्यक्ति था. अकबर इस वजह से इससे बड़ा खुश रहता था.

अकबर के सभी रत्नों में एक बात बिलकुल आम थी कि सभी के सभी बेहद प्रतिभावान थे. इसके लिए अकबर की भी तारीफ की जानी चाहिए कि उसने अपने राज्य के प्रतिभावान लोगों को पहचानने में कोई गलती नहीं की, जिसके फलस्वरुप अकबर के पास बुद्धजीवियों की कमी नहीं रही. निश्चित रुप से अगर हम गुणवान बनने में सफल हो जाते हैं तो हमारी पहचान रत्नों की भांति सबसे अलग हो जाती है.

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