यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहां से ।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशां हमारा ।।
इकबाल का यह शेर जब भी सुनते हैं तो रोम के सम्राज्य की तस्वीरें खुद-ब-आंखों के सामने तैरने लगती हैं. वैसे तो रोम एक महान सम्राज्य रहा, लेकिन इसके तमाम शासकों के क्रूरता के किस्से मन में गुस्सा भर ही देते हैं. गजब के थे इस साम्राज्य के शासक, जो अपने गुलामों को तब तक एक-दूसरे से लड़वाते थे, जब तक उन दोनों में से किसी एक की मौत ना हो जाए! इतना ही नहीं… अपनी सभा या किसी महफिल में रोशनी भरने के लिए वह इंसानों तक को जिंदा जला देते थे. तो आईये जानते हैं रोमन सम्राज्य के एक ऐसे ही क्रूर सम्राट ‘नीरो’ के बारे में, जिसके हाथ अपनी मां, अपनी पत्नी और फिर खुद अपने प्राण लेते वक्त नहीं कांपे.

कौन था नीरो?

‘नीरो’ रोम के प्रथम सम्राट् आगस्टस का वंशज था, जो आगे चलकर रोम का सम्राट भी बना. नीरो की माता का नाम ऐग्रिप्पिना था. वह रोम के प्रथम सम्राट् आगस्टस की प्रपौत्री थीं. वह बड़ी ही महत्वाकांक्षी महिला थीं. इन्होंने बाद में अपने मामा सम्राट् क्लाडिअस प्रथम से शादी कर ली और अपने नए पति को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह नीरो को अपना दत्तक पुत्र मान ले.

Nero Watching The Burning of Rome (Pic: frankzumbach.)

इस तरह बैठा था रोम की गद्दी पर

आखिरकार नीरो की मां क्लाडिअस को मनाने में कामयाब रही और इस तरह नीरो राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया. पर नीरो को शीघ्र ही सम्राट बनाने और गद्दी पर बैठाने के लिए ऐग्रिप्पिना इतनी उतावली थी कि उसने जहर दिलवाकर देकर अपने पति क्लाडिअस की हत्या करवा दी थी. इसके बाद नीरो को रोम का सम्राट के तख्त पर बैठा दिया गया.

सबसे पहला शिकार बना ब्रिटेनिकस

अपने शासन के शुरूआती दिनों में नीरो ने सत्ता की बागडोर बेहद सही तरीके से संभाली लेकिन कुछ ही सालों में उसके दुर्गुण सामने आने लगे और उसने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया. सबसे पहले उसने अपने प्रतिद्वंद्वी और गद्दी के असली वारिस ब्रिटेनिकस को मौत के घाट उतार दिया, ताकि उसकी गद्दी सुरक्षित रह सके.

अपनी मां और पत्नियों का हत्यारा

‘नीरो’ की कार्यशैली को लेकर जब उसकी मां ने किन्तु-परंतु करना शुरु कर दिया तो, उसने तनिक भी देरी न करते हुए अपनी उस मां की हत्या कर दी, जिसने उसे सम्राट बनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी थी. यहां तक कि उसकी माँ ने अपने पति तक को जहर दे दिया था.

इसके कुछ वक्त बाद किसी मतभेद के चलते नीरो ने अपनी पत्नी आक्टेविया को मार दिया. उसकी क्रूरता का अंत यहां पर भी नहीं हुआ. आगे उसने अपनी दूसरी को भी तोहफे में मौत दे दी. बाद में वह किसी लड़की के सौंदर्य में पागल सा हो गया और जब उसने विवाह करने से मना कर दिया तो उसको भी मौत के घाट उतार दिया.

Nero Murders his Own Mother (Pic: history by kyle)

षड़यंत्र की खबर मिली तो गुरु को दे दी मौत

नीरो की बर्बरता से रोम के लोगों में डर बढ़ता जा रहा था. उसके अपने गुरु भी उससे खुश नहीं थे. अब चूंकि ‘नीरो’ को सामने से मारना आसान नहीं था. इसलिए उसके गुरु ने एक षड़यंत्र बनाया. वह इसमें सफल हो पाते, इससे पहले नीरो ने उन्हें खत्म कर दिया. अपने गुरु के अलावा और भी कई नामी लोगों को नीरो ने मृत्युदंड दिया. वह किसी भी चीज को पाने के लिए इतना ज्यादा जिद्दी था कि जिंदगियों को खत्म करना उसका खेल बन गया था. अपनी पत्नियों की हत्या के बाद उसके जीवन में एक और स्त्री आई, जिसकों पाने के लिए उसने उसके पति को मरवा डाला ताकि वह उसे अपनी पत्नी बना सके.

मांफी के बावजूद फांसी पर लटका दिया

पोप सेंट पीटर प्रभु यीशु से बहुत प्रभावित थे. वह अपने समय में ईसाई धर्म के बड़े पैरोकार माने जाते थे. ईसाईयों से नफरत करने वाला रोमन शासक ‘नीरो’ एक बार पोप सिमोन पीटर से नाराज हो गया. उसके आदेश पर पोप को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, लेकिन वह किसी तरह भाग निकले. ‘पीटर’ को बाद में पश्चाताप हुआ और वापस लौटकर उन्होंने  सम्राट ‘नीरो’ के सामने आत्मसर्मपण कर मांगी मागी, लेकिन ‘नीरो’ का दिल नहीं पसीजा. उसने पोप को फांसी पर लटकवा दिया.

‘रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजा रहा था’

‘नीरो’ की जिंदगी की सबसे बड़ी क्रूरता सन 64 में रोम में लगी रहस्यमय आग को माना जाता है. इसकी लपट में पूरा का पूरा रोम लगभग 6 दिनों तक जलता रहा और इस आग में तकरीबन सबकुछ जलकर राख हो गया था. यह भी कहा जाता है कि जब रोम जल रहा था, तब ‘नीरो’ इस विनाश लीला को देख रहा था और सारंगी बजा रहा था.

रोशनी के लिए लोगों को जिंदा जला दिया

माना जाता है कि जब रोम जल रहा था. तब लोगों का ध्यान बंटाने के लिए ‘नीरो’ ने अपने बाग में एक बड़ी पार्टी रखी थी. इसके लिए उसे रोशनी की जरुरत थी. चूंकि उस वक्त रोशनी का अभाव था, इसलिए सवाल था कि इसका इंतजाम कहां से किया जाये. पर ‘नीरो’ के पास इसका समाधान था. उसने रोम के कैदियों और गरीब लोगों को बाग के इर्द-गिर्द इकट्ठा किया और उन्हें जिंदा जला दिया. इधर रोम के कैदी और गरीब लोग जिंदा जल रहे थे और उधर इसके प्रकाश में नीरो की ‘शानदार पार्टी’ आगे बढ़ रही थी. हालांकि इस घटना के पुख्ता सबूत नहीं मिले, जो नीरो को गुनहगार साबित कर सके.

खुद को भी मारने से नहीं चूका ‘नीरो’

आग बुझ जाने के बाद ‘नीरो’ ने नगर को दोबारा बसाने का कार्य आरंभ किया और अपने लिए ‘स्वर्ण मंदिर’ नामक एक भव्य जगह बनवाई. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी. लोग ‘नीरो’ की शासन संबंधी बुराइयों और क्रूरताओं के कारण विद्रोह का मन बना चुके थे. इसी को भांपते हुए स्पेन के रोमन गवर्नर ने अपनी फौजों के साथ रोम पर हमला बोल दिया. इसके परिणाम स्वरुप ‘नीरो’ को अपने राज्य से पलायन करना पड़ा. इसी बीच सिनेट ने उसे फांसी पर चढ़ा देने का निर्णय किया. ‘नीरो’ पकड़ा जाता इससे पहले उसने खुद मौत को गले लगा लिया.

Painting of Nero and Rome Burning (Pic: express.co.uk)

तो यह थे रोम के क्रूर सम्राट नीरो की जिदंगी से जुड़े कुछ किस्से, जिन्हें याद करने भर से हमारे और आपके शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उस समय के लोगों की किस्मत अजीब ही रही होगी, जिन्होंने ‘नीरो’ जैसे क्रूर सम्राट के शासन काल में जन्म लिया. आज के दौर में भी किंग जोंग जैसे, कुछ ‘नीरो’ आपको देखने को मिल जायेंगे. लेकिन सच तो यह है कि अंधेरा कितना ही गहरा क्यों न हो, सूरज की एक किरण उसके लिए काफी होती है. जिस तरह से हर रात के बाद सुबह को आना ही होता है और वैसे ही हर ‘नीरो’ को उसके किये कीमत चुकानी ही पड़ती है.

Web Title: Nero a Brutal Leader of Roman, Hindi Article

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