कहते हैं सिनेमा और विवाद साथ-साथ चलते हैं. इसी कड़ी में इस बार अनुराग कश्यप की फिल्म पद्मावती कटघरे में है. फिल्म पर रानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताने और रानी से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप है. विरोध कितना ज्यादा है, इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि प्रदर्शनकारियों ने निर्देशक भंसाली को थप्पड़ तक जड़ दिया. फिल्म की शूटिंग तक रुक चुकी है. आइये इस विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयत्न करते हैं:

रानी पद्मिनी से जुड़ा गौरवशाली इतिहास

Queen Padmini Controversy Hindi Article, Pride of Rajasthan (Pic: ghumakkar.com)

राजस्थान का गौरवशाली इतिहास भला कौन नहीं जानता होगा. इसी गौरवमयी इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ रही हैं रानी पद्मिनी! प्रचलित लोक कथनों के अनुसार उनकी सुंदरता की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी और उसे सुनकर दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अलाउद्दीन खिलजी पद्मिनी को पाने के लिए लालायित हो उठा था. उसी के लिए उसने चित्तौड़ दुर्ग पर चढ़ाई कर दी थी लेकिन युद्ध में वह किले में नहीं घुस पाया, तब उसने कूटनीति का सहारा लेते हुए अपने दूत को चित्तौड़ के महाराणा रत्न सिंह के पास संदेश लेकर भेजा है कि “हम आपसे मित्रता करना चाहते हैं.” शर्त थी ‘केवल एक बार रानी का मुंह देखने की!

चित्तौड़ के राजपूतों का व्यर्थ में खून ना बहे, इसलिए रानी पद्मिनी ने अपना चेहरा आईने में दिखाना स्वीकार कर लिया था, क्योंकि उन्हें पता था कि अलाउद्दीन की विशाल सेना के आगे उनके राज्य की सेना बेहद छोटी है.

सरोवर के पानी में रानी के मुख की परछाई देखकर अलाउद्दीन मन ही मन कुटिल चाल चलने की ठान चुका था. जब रत्नसिंह सभ्यता बस अलाउद्दीन को वापस जाने के लिए किले के द्वार तक छोड़ने आए तो अलाउद्दीन ने अपनी सैनिकों को संकेत कर रत्नसिंह को धोखे से बंदी बना लिया. इसके बाद अलाउद्दीन का प्रस्ताव था कि रानी को उसे सौंपने के बाद ही वह रत्न सिंह को कैद से मुक्त करेगा. रानी ने भी कूटनीति का सहारा लेते हुए अलाउद्दीन खिलजी को संदेश भेजा कि “मैं मेवाड़ की महारानी अपनी सात सौ दसियों के साथ आपके सम्मुख उपस्थित होने से पूर्व अपने पति के दर्शन करना चाहूंगी. अलाउद्दीन इसे सुनकर खुश हो गया, किंतु रानी ने अपने काका गोरा व भाई बादल के साथ रणनीति तैयार कर 700 डोलियों में हथियारबंद राजपूत सैनिक बिठा दिए, तो उनके कहारों के रूप में श्रेष्ठतम सैनिकों को लगाया गया. इस तरह जब महाराणा रत्न सिंह को रानी पद्मिनी से आखिरी मिलान के लिए ‘कैद’ से बाहर लाया गया, तो सभी राजपूत वीर अलाउद्दीन की सेना पर टूट पड़े और रत्न सिंह सकुशल चित्तौड़ के दुर्ग में पहुंचा दिए गए. इस हार से अलाउद्दीन बेहद लज्जित हुआ और उसने अब चित्तौड़ विजय करने की ठान ली. 6 माह से ज्यादा समय तक उसने चित्तौड़ दुर्ग को घेरा था और दुर्ग के भीतर राशन-रसद की कमी हो गयी. इस तरह राजपूत सैनिकों  और रानी पद्मिनी समेत राजपुतानियों ने केसरिया बाना पहन कर जौहर और शाका करने का निश्चय किया.

इस तरह का उदाहरण समूचे विश्व भर की किवदंतियों में भी नहीं मिलता है, जहाँ आन बान शान के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रवृत्ति देखी गयी हो. तत्पश्चात, मैदान में एक विशाल चिता का निर्माण हुआ और अपनी मर्यादा एवं धर्म रक्षण हेतु रानी पद्मिनी के नेतृत्व में 16000 राजपूत रमणियों ने जौहर किया.

जौहर के ज्वाला की लपटों को देखकर अलाउद्दीन खिलजी भी हतप्रभ हो गया था, तभी महाराणा रतन सिंह के नेतृत्व में केसरिया बाना धारण कर 30000 राजपूत सैनिक किले के द्वार खोल भूखे शेरों की भांति खिलजी की सेना पर टूट पड़े थे. उनका लक्ष्य खिलजी की सेना को अधिकतम नुक्सान पहुंचाकर आत्म बलिदान करना था. महाराणा रत्न सिंह युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हुए और रानी पद्मिनी राजपूत नारियों की कुल परंपरा मर्यादा की रक्षा कर युगों युगों तक अमर हो गयीं. जाहिर है, ऐसे में राजस्थान और शेष भारत के लिए रानी पद्मिनी किसी देवी से कम नहीं हैं और यह बेहद स्वाभाविक है कि अगर किसी की आस्था से खिलवाड़ का प्रयास होगा तो लोग भड़केंगे ही! हालिया ‘भंसाली को थपड विवाद’ भी इसी कड़ी से जुड़ा हुआ है.

इस सीन के कारण बरपा है हंगामा…

Queen Padmini Controversy Hindi Article, Pride of Rajasthan (Pic: Youtube)

फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच प्रेम-प्रंसग को लेकर विवाद बताया जा रहा है. हालांकि भंसाली प्रोडक्शन की ओर से राजपूत सभा को लिखित में सफाई दी गई है. संजय लीला भंसाली की प्रोडक्शन टीम अब किसी तरह की अश्लीलता व अलाउद्दीन खिलजी के रानी पद्मावती के साथ सपने में भी प्रेम प्रसंग नहीं दिखाने जैसे मुद्दों पर सहमत है. राजपूत सभा ने भी कहा कि यदि बताई गई शर्तों पर भंसाली प्रोडक्शन काम करता है, तो हमें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है.

भंसाली को थप्पड़ मारने वाली करणी सेना के बारे में जानें

‘पद्मावती’ का विरोध करने वाली करणी सेना राजस्थान के लिए नई नहीं है, न ही नया है उनके विरोध का यह तरीका! इससे पहले ‘जोधा अकबर’ का प्रदर्शन रोकने की भी यह संगठन कोशिश कर चुका है. करणी सेना के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी स्थापना और सक्रियता के सन्दर्भ में एक लम्बा सफर तय कर चुकी है. इसने अपने संगठन की शुरुआत राजपूतों के लिए आरक्षण की मांग से की थी, फिर धीरे-धीरे उसने अपना दायरा बढ़ाया और दूसरे मुद्दों पर भी मुखर होने लगी. जानकारों की मानें तो करणी सेना में अभी साढ़े सात लाख सदस्य पंजीकृत हैं, जिनका सियासत से प्रत्यक्ष तौर पर कोई लेना-देना नहीं है. इसका मकसद राजपूत बिरादरी के हितों की रक्षा करना बताया जाता है, किन्तु गाहे बगाहे उठ रहे विवाद बताते हैं कि राजनीति से भी संगठन का प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष जुड़ाव संभव है. करणी माता को जगदम्बा का अवतार माना जाता है और वे कुछ प्रमुख राजघरानों की कुल देवी हैं, जिनकी आस्था और शक्ति से प्रेरित होकर संगठन का नाम करणी रखा गया. हालिया ‘भंसाली को थप्पड़’ विवाद में यह एंगल भी सामने आया है कि चम्बल घाटी में डकैत से आत्मसमर्पण कर सांसद रहीं फूलन देवी के हत्यारों में से एक शेर सिंह राणा का नाम भी जोड़ा जा रहा है. भास्कर.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भंसाली पर हमला उसी के इशारे पर कराया गया प्रतीत होता है.

Queen Padmini Controversy Hindi Article, Karni Sena (Pic: PTI)

फिल्म के विरोध पर अनुराग ‘राग’ एवं बॉलीवुड की प्रतिक्रिया

तमाम राजनीतिक मुद्दों पर टीका-टिपण्णी करने के मामले में सक्रिय हो चुके निर्देशक अनुराग कश्यप ट्वीट में लिखते हैं कि मुझे करणी सेना पर शर्म आती है, तुम्हारी वजह से मुझे खुद को राजपूत कहने में शर्म आ रही है.”बिना रीढ़ वाले डरपोक लोग”. हिंदू चरमपंथ अब ट्विटर की दुनिया से निकलकर असल दुनिया में आ गया है. हिंदू आतंकवाद अब मिथक नहीं रहा. जाहिर तौर पर अनुराग को अपनी पिछली फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के विरोध की याद आ गयी होगी, जिस कारण उन्होंने यह कटु स्टेटमेंट दिया होगा.

ऋतिक रोशन ट्वीट में लिखते है, “भंसाली सर, मैं आपके साथ खड़ा हूं. ये सब गुस्सा दिलाने वाला है.

करन जौहर लिखते हैं भंसाली के साथ जो हुआ उससे दुखी हूं. अपने लोगों और साथियों के साथ एक इंडस्ट्री के रूप में एकजुट होकर खड़े होने का वक्त आ गया है. ये हमारा भविष्य नहीं हो सकता.

फरहान का भी छलका दर्द, वह लिखते हैं फिल्म इंडस्ट्री के साथियों, अगर हम डराने धमकाने की बार-बार हो रही इन घटनाओं के खिलाफ अब एक नहीं हुए तो हालात बदतर होते जाएंगे.

आलिया ने लिखा, पद्मावती के सेट पर जो हुआ वह शर्मनाक है. रचनात्मक स्वतंत्रता और सिनेमाई लाइसेंस जैसी भी चीज होती है. कलाकार (या कोई भी) गुंडों की दया पर निर्भर नहीं हो सकता.

विशाल ददलानी ट्वीट कर कहते किया संजय बॉलीवुड के सबसे सम्मानित फिल्ममेकर्स में से हैं, उनके सेट पर अटैक होना शर्मनाक है. आशा करता हूं कि फिल्म इंडस्ट्री एकजुट होकर इसका विरोध करे.

Queen Padmini Controversy Hindi Article, Pride of Rajasthan, Rani Palace (Pic: gyandarpan.com)

Web Title: Queen Padmini Controversy Hindi Article, Pride of Rajasthan

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