लोगों के मन में हमेशा यह धारणा रहती है कि शहर गांव से पीछे रहते हैं. लेकिन क्या आप यकीन मानेंगे कि देश में कुछ गांव ऐसे भी हैं, जो बड़े शहरों से कई मायने में कम नहीं हैं. आज हम आपको देश के कुछ ऐसे ही गांवों के बारे में बतायंगे जो शिक्षा, मुद्रा, नौकरशाही और समाज सेवा जैसे कार्यों से देश और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं.

माधोपट्टी (जौनपुर, उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में सिरकोनी ब्लाक के इस गांव की कहानी बड़ी दिलचस्प है. कहा जाता है कि इस गांव में सिर्फ आईएएस और आईपीएस पैदा होते हैं. पूरे जौनपुर में यह गांव अफसरों वाला गांव के नाम से जाना जाता है. 75 घर वाले इस गांव में 47 आईएएस अफसर देश के विभिन्न राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इतना ही नहीं, इस गांव के और लोग भी इसरो, भाभा और विश्व बैंक तक में कार्यरत हैं. गांव के युवकों का प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का सिलसिला काफी पुराना रहा है. 1914 में इस गांव के मुस्तफा हुसैन पीसीएस अधिकारी चुने गए थे. 1952 में इंदू प्रकाश सिंह का आईएफएस में चयन हुआ. उसके बाद तो इस गांव में अधिकारी बनने के लिए होड़ हो गई. देखते ही देखते गांव में अधिकारियों की फ़ौज खड़ी हो गई है. अपनी विशिष्ट उपलब्धि से यह गांव देश के अन्य क्षेत्रों के लिए रोल मॉडल बन गया है.

Story of 10 Villages in India, Madhopatti, Jaunpur ( Pic: patrika )

पिपलांत्री (राजसमंद, राजस्थान)

देश में कई जगह, जहां बेटियों के जन्म लेने को लोग अभिशाप समझते हैं, वहीं राजस्थान का एक गांव ऐसा भी है जो बेटियों के जन्म लेने पर खुशियाँ मनाता है. इस गांव में जब किसी के घर बेटी पैदा होती है, तब माँ बाप 111 पेड़ लगाकर बेटी के पैदा होने का जश्न पूरे गांव भर में मनाते हैं. यही नहीं, गांव के लोग चंदा लगाकर 21 हजार रुपये इकठ्ठा करके बच्ची के नाम से बैंक में जमा भी करवाते हैं. साथ ही गांव की पंचायत के तरफ से भी 10 हजार की राशि बेटी के नाम जमा करवाई जाती है. इस परम्परा की शुरूआत पिपलांत्री गांव के पूर्व सरपंच श्याम सुन्दर पालीवाल ने अपनी बेटी के स्मृति में शुरू की थी, जो आज गांव की परम्परा बन गई है. यह गांव आज देश के लिए रोल मॉडल बन चुका है, जो पर्यावरण बचाने के साथ बेटी भी बचा रहा है.

Story of 10 Villages in India, Piplantri, Rajasthan (Pic: motivateme)

मड़ावग (शिमला, हिमाचल प्रदेश)

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की चौपाल तहसील में बसा मड़ावग गांव आज कल सुर्खिया में है. इस गांव की ज्यादातर आमदनी का जरिया खेती है. गांव के किसानों ने अपनी मेहनत और लगन से आज इस गांव को एशिया का सबसे अमीर गांव बना दिया है. इस गांव की आबादी लगभग 2000 है. गांव में सभी किसान सेब की खेती करते हैं. इस गांव के सेब ज्यादातर विदेशों में भेजे जाते हैं. जिस कारण गांव के किसानों की कमाई ज्यादा होती है. गांव के किसान अपनी खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. इंटरनेट के जरिये देश विदेश के बाजार भाव की जानकारी से भी यहाँ के किसान जुड़े रहते हैं. इससे बाजार भाव के मुताबिक वे अपने सेब को बेचते हैं. इन किसानों की सेब से होने वाली कमाई अरबों रुपये में होती है. आज यह गांव पूरे देश में किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुका है.

हिवेरा बाजार गाँव (अहमदनगर,महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का यह गांव हिवेरा बाजार कभी बहुत गरीब हुआ करता था. गरीब होने के बाद भी इस गांव के लोग पढाई करने शहर चले गये. वहां पढ़ाई के बाद उन्हें कोई अच्छा रोजगर नहीं मिला, तो सब अपने गांव वापस आ गए. गांव में ही वह लोग खेती करने लगे. गांव के युवाओं ने खेती के तरीके में नई तकनीक का इस्तेमाल किया और धीरे धीरे गांव में ही जैविक खेती का सफल प्रयोग कर डाला. उसके बाद गांव के युवकों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.अपने जोश और लगन से पूरे गांव की तस्वीर बदल डाली और सफल किसान बन गए. आज इस गांव में 80 किसान करोड़पति हो चुके हैं और गांव की पहचान करोड़पतियों के किसान वाले गांव के रूप में हो गई है. कभी दाने-दाने के लिए मोहताज रहने वाला यह गांव आज करोड़पति हो गया है और देशभर के किसानों का रोल मॉडल बन गया है.

धर्माज (आनंद ,गुजरात )

गुजरात के आणंद जिले का धर्माज गांव की गिनती देश के अमीर गांवों में होती है. इस गांव की आबादी लगभग 11,333 है. इस गांव के ज्यादातर लोग विदेशों में व्यापार या काम करते हैं. गांव में कुल 13 बैंक हैं. खबरों की मानें तो इस गांव के एन आर आई भारत के बैंकों में पैसा जमा करने में ज्यादा रूचि रखते हैं. यह गांव साक्षरता के मामले भी काफी आगे निकल गया है. गांव में ज्यादातर पाटीदार समुदाय (पटेल) के लोग रहते है. यहाँ के लोगो की जिंदगी किसी राजा महाराजा से कम नहीं है. गांव के 1,700 परिवारों के सदस्य ब्रिटेन में रहते हैं, जबकि 300 के परिवार अमेरिका में, 160 के न्यूजीलैंड में, 200 के कनाडा में और 60 परिवारों के सदस्य ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं. कुल मिलाकर यहां 3,120 परिवार विदेश में रहते हैं और झोली भर भरकर गाँव में पैसा भेजते हैं. काश, ऐसे ही सभी लोग गाँव में पैसा भेजें तो गाँव गरीब क्यों हों?

Story of 10 Villages in India, Dharmaj, Gujrat ( Pic: 3.bp.blogspot )

उत्तरसंडा (खेड़ा  ,गुजरात )

गुजरात का उत्तरसंडा गांव अपने आप में मिसाल है. यह गाँव  पापड़, मठिया ओर चोलाफली जैसे खाने-पीने की चीजों के लिए जाना जाता है. बता दें कि दीवाली के अवसर पर इन सब चीजों की बहुत खपत होती है. यहाँ की महिलाएं तकरीबन 70 करोड़ रुपयों का कारोबार एक महीने के दौरान करती हैं. गांव की महिलाएं इस काम में पुरुषों से आगे हैं. इस गांव से बड़ी मात्रा में पापड़, मठिया ओर चोलाफली  देश और विदेश में भेजा जाता है. अपने इस बिज़नेस के चलते   अब यह गाँव एक बहुत बड़ी मार्केट में बदल गया है. आज यह गांव महिलाओं के बल बूते काफी आगे निकल गया है. इस गांव की महिलाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं.

माधापुर (कच्छ ,गुजरात)

गुजरात के कच्छ जिले का यह गांव भी धर्माज की तरह करोड़पति गांव है. 15000 आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर लोग विदेशों में रहते है. इस गांव की गिनती पहले एशिया के सबसे धनी गांव के रूप में होती थी, लेकिन इस गांव की जगह हिमाचल के गांव मड़ावग ने ले ली है. इस गांव में लगभग 10 से ज्यादा बैंक हैं जिनमें गांव वालों का करोड़ो रुपये जमा है. इस गांव की सबसे खास बात यह है कि अमीर होने के बावजूद भी इस गांव के लोग बहुत सरल तरीके से जीवन यापन करते है. गांव के लोग अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के तमाम देशों में बसे हैं.

Story of 10 Villages in India, Madhapar, Gujrat (Pic: mapio )

बेरी (नागौर ,राजस्थान)

राजस्थान के नागौर जिले का बेरी गांव राजस्थान का सबसे अमीर गांव माना जाता है. लगभग 10,000 आबादी वाले इस गांव में सभी धर्म के लोग रहते हैं. इस गांव में करीब 200 से ज्यादा सैनिक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. करीब 500 से ज्यादा सैनिक उच्च पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इस गांव का हर दूसरे घर का एक सदस्य सरकारी सेवा में है. भाभा परमाणु संस्थान के जाने माने वैज्ञानिक खान मोहम्मद खान इसी गांव के निवासी हैं. इसी तरह, राजस्थान की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस इसी गांव की हैं. गांव की साक्षरता करीब 90 फीसदी है. इस गांव की सबसे खास बात यह है कि इस गांव में एक भी शराब, पान, बीड़ी, गुटके की दुकान नहीं है. गांव में शादी और किसी अन्य अवसर पर डी जे बजाना मना है. गांव में एक भी मकान कच्चा नहीं है. जाहिर है, सम्पन्नता और शिक्षा के मामले में इस गाँव की मिसाल दी जा सकती है.

बघौनिया (बांका, बिहार)

बिहार के बांका जिले का बघौनिया गांव आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. 400 घर वाले इस गांव में हर घर का सदस्य सरकारी सेवा में है. पिछले तीन साल के दौरान इस गांव में लगभग 200 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है. इस गांव में करीब 150 लोग तो सिर्फ देश की विभिन्न सुरक्षा सेवा में ही हैं और दूसरे सबसे ज्यादा लोग रेलवे में अपनी सेवा दे रहे हैं. गांव के युवाओं की सबसे ज्यादा दिलचस्पी सरकारी नौकरियों के भर्ती और आने वाले रिजल्ट की रहती है. आज यह गांव देश के अन्य गावों का रोल मॉडल बन चुका है. वह दिन दूर नहीं जब यह गांव शहर को मात देगा.

असोला-फतेहपुर (दिल्ली)

दिल्ली के नजदीक बसे इस गांव को लोग बाउंसरो का गांव कहते हैं. इस गांव का हर बच्चा बाउंसर बनना चाहता है. इस गांव की आबादी लगभग 3500 के आस पास होगी. गांव के ज्यादातर युवा दिल्ली में जाकर बाउंसर्स की नौकरी करते हैं. गांव के युवाओं का ज्यादातर लक्ष्य सिक्यॉरिटी गार्ड की नौकरी करने का होता है. इस समय गांव के लगभग 200 बच्चे कुश्ती सीखने की क्लास लेते हैं. गांव के युवा शराब आदि के सेवन से बहुत दूर रहना चाहते हैं. आज इस गांव के युवा दिल्ली समेत देश के नामी गिरामी हस्तियों के अंग रक्षक हैं.

Story of 10 Villages in India Asola Fatehpur Delhi (Pic: entertales)

ये तो महज कुछ गांव है जो देश सहित पूरी दुनिया में अपनी समृद्धि और विकास का परचम लहरा रहे हैं. देश में ऐसे और भी गांव हैं, जो देश और समाज के लिए अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं. इन गांवों  ने यह साबित कर दिया है कि गांव किसी भी मुकाबले में शहर से कम नहीं है. उम्मीद है कि यह गांव देश के दूसरे गांव के लिए रोल मॉडल बनेंगे और सिलसिला जारी रहेगा.

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