यूं तो आये दिन कॉरपोरेट ऑफिसों से सेक्सुअल हरासमेंट की खबरें आप सुनते रहते हैं. पर क्या आपको पता है कि ऐसे मामले मुगलों के जमाने में भी होते थे. मुगल शासकों के लिए तो राज्य की महिलाएं महज एक सामान की तरह होती थी, जिन्हें उनके अनुसार वह जब चाहे यूज कर सकते थे! सुना है कि उस पीरियड में उस समय के राजाओं का जिस किसी पर भी दिल आ जाता था. वह उसे पाने के लिए पागल हो जाते थे, बिल्कुल बॉलीवुड की पिक्चरों की तरह…

अब चूंकि वह राजा होते थे, तो उनसे पंगा लेने के लिए हिम्मत भला कौन कर सकता था? फिर क्या था, महिलाएं घर के किसी कोने में आंसू बहाकर, यह कहते हुए खुद को तसल्ली दे लेती थी कि यही हमारी किस्मत है. पर उस जमाने में भी कई नाम ऐसे हुए, जिन्होंने बुरी नीयत रखने वालों का मुंह काला करने का साहस दिखाया था. ऐसी ही एक वीरांगना थीं ‘किरण देवी’, जिन्होंने फेमस मुगल किंग अकबर की छाती पर पैर रखकर उससे पूछा “बताओ बादशाह! तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है?”

कौन थीं ‘किरण देवी’?

किरण देवी मेवाड़ के राजा उदय सिंह के छोटे पुत्र शक्ति सिंह की पुत्री थीं. शक्ति सिंह का व्यवहार थोड़ा ठीक नहीं था, इसलिए पिता उदय सिंह समय-समय पर उनको फटकार लगाते रहते थे. इसी से नाराज होकर वह अकबर की सेना में चले गए थे. शक्ति सिंह ने अपनी बेटी का विवाह बीकानेर के राजपूत वंश में पृथ्वीराज राठौर के साथ किया था. पृथ्वीराज भी अकबर के अधीन काम करते थे.

सुन्दरता देख पागल हो गया था अकबर

हमने देखा तो नहीं, लेकिन फिर भी कहानियों की मानें तो किरण देवी बहुत सुंदर थीं. इतनी सुन्दर थीं कि अकबर जैसा शासक उन पर लट्टू हो गया था. पहली बार उसने किरण देवी को नौरोज के मेले में देखा था. असल में वह सुंदरता का पुजारी होगा, तभी तो बुर्का पहनकर वह बाजार में सुंदर स्त्रियों की तलाश कर रहा था, जो किरण देवी पर आकर खत्म हो गई थी.

किसी भी कीमत पर पाना चाहता है, इसलिए…

अकबर, पर किरण देवी की सुंदरता का हैंगओवर इतना ज्यादा चढ़ गया था कि वह जल्द से जल्द उन तक पहुंचना चाहता था. इसी कड़ी में जल्द उसने, उनका पता लगा लिया. एक सेवक ने उन्हें आकर बताया कि वह उनके ही राज्य के पृथ्वीराज राठौर की बीवी है, तो वह फूला न समाया, क्योंकि उसको भरोसा था कि उसके राज्य में उसकी खिलाफ़त कोई नहीं कर सकता. झट से उसने एक प्लान के तहत पृथ्वीराज राठौर को जंग पर भेज दिया और किरण देवी को अपनी दूतों के द्वारा, बहाने से महल में आने का निमंत्रण दे डाला.

जब अकबर ने कहा, हम तुम्हें अपनी बेगम…

निमंत्रण क्या था, एक तरह से राजा का फरमान था. इसलिए किरण देवी का अकबर के महल में पहुंचना तय था. स्वागत के सभी जरुरी इंतजाम भी कर लिए गये थे. जैसे ही किरण देवी पहुंचीं, अकबर ने प्यार भरे लहजे में कहा-‘हम तुम्हें अपनी बेगम बनाना चाहते हैं.’ यह सुनकर वह अवाक थीं. वह कुछ कहतीं, इससे पहले अकबर पिक्चर के विलन की तरह गलत नीयत के साथ उनकी ओर बढ़ा, तो वह पीछे की ओर हट गयीं. लेकिन अकबर नहीं माना… वह और आगे बढ़ते गया और किरण देवी उल्टे पांव पीछे हटती गईं.

वो मना करती रहीं, लेकिन नहीं माना अकबर… और!

अकबर आसानी से मानने वाला नहीं था. उसने तय कर लिया था कि आज वह किरण देवी को हासिल करके रहेगा. किरण देवी लगातार मना करते हुए कह रही थी, राजन मुझे जाने दो पर अकबर ने उनकी एक न सुनी. उसने कहा ऐसा मौका तुम्हें फिर कब मिलेगा, तुम्हारी जगह पृथ्वीराज राठौर की झोपड़ी में नहीं हमारे महल में है’. ऐसे में किरण देवी के सामने दो रास्ते थे. पहले रास्ते के हिसाब से वह अकबर की बात मान सकती थी. जबकि दूसरे रास्ते के हिसाब से उन्हें अकबर का विरोध करना था. फैसला इतना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया और दूसरे रास्ते को चुना.

सब जतन हुए बेकार, तो बन गईं ‘चंडी’

उसकी आंखों से आंसू जरुर निकल रहे थे, लेकिन उनका दिमाग इस स्थित से निपटने के लिए उपाय ढूंढ रहा था. अचानक उनकी नजर कालीन पर पड़ी. उन्होंने कालीन का किनारा पकड़कर जैसे ही जोरदार झटका दिया. अकबर सिर के बल जमीन पर गिर पड़ा. इतने में किरण देवी को संभलने का मौका मिल गया और वह उछलकर अकबर की छाती पर जा बैठीं.

Story of Brave Kiran Devi (Pic: indilinks.com)

गर्दन में कटार लगाकर पूछी आखिरी इच्छा

चूंकि किरण देवी हथियार चलाने और आत्मरक्षा में भी पारंगत थीं. उन्होंने जल्दी से कटारी निकालकर अकबर की गर्दन पर रख दी और उससे पूछा बोलो बादशाह, तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है? अकबर की किरण देवी की गिरफ्त से निकलने की सारी कोशिश बेकार रही. उसे यकीन नहीं हो रहा था कि बाजी इतनी जल्दी पलट जाएगी.

गिड़गिड़ाकर मांगी थी अकबर ने माफी

जब अकबर को लगा कि उसका खेल खराब हो चुका है तो उसने गिड़गिड़ाते हुए स्वर में कहा मुझे माफ कर दो, तुम कोई साधारण नारी नहीं, मैं तुमसे प्राणों की भीख मांगता हूं. उसने खुद को जिंदा छोड़ने के कई तर्क भी दिये. जैसे उसने कहा मैं मर गया तो यह देश अनाथ हो जाएगा. लेकिन किरण देवी नहीं मान रही थी.

सशर्त छोड़ा था गया था अकबर

वह फिर गिड़गिड़ाते हुए बोला, मुझे माफ कर दो, जरा सोचो अगर मुझे कुछ हो गया तो इस देश का क्या होगा. किरण देवी ने दुत्कारते हुए उसके सामने कुछ शर्ते रखी, इनको मानने के बाद उन्होंने अकबर को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया था, ताकि वह पश्चताप की आग में जीवन भर जल सके. साथ ही दोबारा किसी स्त्री पर बुरी नज़र डालने से पहले सौ बार सोच सके.

Story of Brave Kiran Devi (Pic: revoltpress.com)

इस प्रकार एक किरण देवी ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर न सिर्फ अकबर को अपने कदमों में झुकाया, बल्कि इस बात को भी चरितार्थ कर दिया कि जब औरत पर मुसीबत आती है तो वह चंडी का रौद्र रुप भी ले सकती है. किरण देवी के साहस और वीरता को कोटि-कोटि प्रणाम.

Web Title: Story of Brave Kiran Devi, Hindi Article

Keywords: Kiran Devi Bikaner, King Akbar, Story Of Kiran Devi, Akbar Said Sorry, Indian History, India, History, Brave lady

Featured image credit / Facebook open graph: thefamouspeople.com