कुछ सालों पहले एक फिल्म आई थी ‘थ्री ईडियट्स’, जिसे सभी ने खूब चाव लेकर देखा. इस फिल्म का एक डायलॉग है जिसमें आमिर खान कहते हैं कि बच्चा काबिल बनो फिर देखो कामयाबी झक मार के पीछे भागेगी. आज से नहीं, काफी पहले से देश के कई लोगों ने इस डायलॉग को सच साबित करके दिखाया है. शुरुआत में बेशक उनके साथियों और बड़ों ने उनके इस कदम को नादानी कहते हुए उपहास उड़ाया हो, लेकिन आज वही सब उनके सजदे में खड़े होकर कहते हैं, गुरु तुस्सी ग्रेट हो! तो आइये मिलते हैं कुछ ऐसे ही उद्यमियों से, जिनकी जिंदगी बताती है कि नामुमकिन कुछ भी नहीं होता:

रमेश बाबू

रमेश बाबू भारत के एक ऐसे नाम हैं जिन पर देश के नाई नाज करते हैं. जी हां नाई! रमेश बाबू पेशे से भले ही नाई हों, लेकिन उनका रुतबा किसी भी बड़े उद्योगपति से कम नहीं है. उनके बारे में कहा जाता है कि यहां तक आने के लिए उन्हें बहुत पापड़ बेलने पड़े. वह महज 7 साल के थे जब उनके सिर से पिता का साया हट गया. घर चलाने के लिए मां ने दूसरों के घरों में काम करना शुरु कर दिया. जैसे-तैसे रमेश बाबू ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 12वीं में असफल होने के बाद इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा कर लिया.

अब रमेश बाबू के सामने दो रास्ते थे, एक नौकरी की तरफ जाता था औऱ दूसरा खुद का व्यवसाय शुरु करने की ओर. रमेश बाबू ने ज्यादा न सोचते हुए दूसरा रास्ता चुना, यानी वो अपने व्यवसाय के लिए आगे बढ़े.

इसी कड़ी में उन्होंने अपनी पिता की पुस्तैनी दुकान में बाल काटने का काम शुरु किया. कुछ वक्त बाद जब कुछ पैसे इकट्ठे हो गए तो उन्होंने रमेश टूर एंड ट्रेवल्स नाम से एक कंपनी की नींव डाल दी. आज उनके पास 256 कारें हैं, जिनमें रॉल्स रॉयस, मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू, जगुआर, ऑडी जैसी महंगी कारें शामिल हैं. इसके बावजूद आपको जानकर हैरानी होगी वह अब भी अपनी दुकान पर रोज शाम को बाल काटने के लिए जाते हैं. आखिर, ज़मीन से जुड़े रहना भी तो इतना आसान नहीं है.

Top Entrepreneur of India, Ramesh Babu (Pic: outoftheordinary)

महेश गुप्ता

केन्ट आरओ सिस्टम के चेयरमैन डॉ. महेश गुप्ता को भारत में अपनी क्रांतिकारी वाटर प्यूरिफिकेशन उद्योग की वजह से विश्व भर में जाना जाता है. साउथ दिल्ली की पॉश कॉलोनी में रहने वाले महेश गुप्ता की जिंदगी में मोड़ तब आया, जब उनके बेटे को 1998 में खराब पानी की वजह से पीलिया हो गया. चूंकि बेटे की तबियत खराब पानी पीने की वजह से हुई थी, इसलिए उन्होंने तय किया कि वह ऐसा आरओ बनायेंगे, जिससे फिर किसी को पीलिया न हो. इसके बाद

वह अपने इस सपने के लिए उन्होंने जल्द ही अपनी अच्छी खासी नौकरी को अलविदा कह दिया और शोध में लग गए. जल्द वह देश को केंट आर.ओ. के रुप में नया आर.ओ. देने में कामयाब हुए.

आज केंट भारत की बड़ी वाटर प्युरिफाई करने वाली आर ओ बनाने वाली कंपनियों में से एक है. कम्पनी 580 करोड़ का सालाना व्यापार करती है. यह कंपनी अन्य उत्पाद जैसे कि एयर प्यूरीफायर, सब्जी और फलों के प्यूरीफायर भी बना रही है.

Top Entrepreneur of India, Dr.Mahesh Gupta (Pic: PHD / youtube.com)

प्रेम गणपति

डोसा वाला प्रेम गणपति तमिलनाडु से मुम्बई सिर्फ इसलिए आए थे, क्योंकि उनके दोस्त ने उन्हें नौकरी दिलाने का वायदा किया था, लेकिन वह दोस्त धोखा देकर उन्हें बांद्रा रेलवे स्टेशन छोड़कर भाग निकला. प्रेम के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि वह मुम्बई की भाषा नहीं जानते थे. मुम्बई में उनका कोई परिचित भी नहीं रहता था. इस सबके बावजूद उन्होंने मुम्बई में ही रहने का फैसला किया. वहां उन्होंने एक छोटी सी बेकरी पर बर्तन धोने का काम किया. अतिरिक्त पैसे मिलते थे ओवर टाइम काम करने के इसलिए रात में वह रसोईया भी बन गए.

कुछ पैसे इकट्ठे करने के बाद 1992 में उन्होंने रेहड़ी खरीदी और डोसा बेचना शुरु कर दिया. चूंकि वह डोसा बनाने में हुनरमंद थे, इसलिए जल्द ही उनकी दुकान मशहूर हो गई.  

1997 में उन्होंने 5000 रुपये माह किराये पर एक स्थाई दुकान ली और प्रेम सागर डोसा प्लाजा के नाम से एक रेस्टोरेंट खोला. उनकी डोसे की दुकान वेराइटी और स्वाद की वजह से काफी मशहूर हुई. आज के समय में प्रेम गणपति के देश और विदेशों में 105 तरह के डोसे बिक रहे हैं. मौजूदा समय में डोसा प्लाजा के भारत में 45 आउटलेट्स हैं. विदेशों में जैसे न्यूजीलैंड, मध्यपूर्व और दुबई समेत 10 देशों में डोसा प्लाजा के कई आउटलेट्स चल रहे हैं.

Top Entrepreneur of India, Prem Ganapathy (Pic: motivateme.in)

संदीप महेश्वरी

कॉलेज ड्रॉपआउट संदीप महेश्वरी ने अपने करियर की शुरुआत 19 साल की उम्र में मॉडल के रूप में की थी. विफलताओं से सीखने के बाद महेश्वरी ने फोटोग्राफी करने का निर्णय लिया. उन्होंने कई कंपनियों में एक फ्रीलांसर के रूप में काम किया. 2003 में संदीप महेश्वरी ने एक वर्ल्ड रिकॉड बनाया, जिसमें उन्होंने 120 मॉडल के 10,000 शॉट्स केवल 12 घंटे में लिए थे, उस समय इनकी उम्र केवल 21 साल थी. 26 साल की उम्र में इन्होंने इमेजेज बाजार  नामक कम्पनी की शुरुआत की. यह कम्पनी पूरी दुनिया की सबसे ज्यादा भारतीय इमेज का कलेक्शन रखती है. इमेजेज बाजार के पास 7000 से भी ज्यादा ग्राहक हैं.

संदीप महेश्वरी को बहुत लोग मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में जानते हैं. इनको यह पॉपुलैरिटी यूट्यूब और फेसबुक से हासिल हुई है. जो लोग अपनी जिंदगी में फेलियर से हार मान कर बैठे हैं उनको मोटीवेट करने के लिए संदीप महेश्वरी बहुत सारे सेमिनार्स भी देते हैं. खास बात तो यह है कि महेश्वरी अपने सारे सेमिनार फ्री में करते हैं.

Top Entrepreneur of India, Sandeep Maheshwari (Pic: btechallsolutions.com)

विजय शेखर

पेटीएम जैसी कंपनी के मालिक विजय शेखर शर्मा भले ही आज एक बड़ा नाम हो, लेकिन उनके जीवन में भी एक समय था, जब उनके पास खाने तक के लिए पैसे नहीं थे. दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद उन्होंने कई जगह नौकरी की, लेकिन अपनी बिजनेस करने के इरादे ने उन्हें ज्यादा कहीं टिकने नहीं दिया.

आखिरकार विजय ने 2 लाख रुपए लगाकर 2001 में वन-97 नाम की एक कंपनी की शुरुआत की, जो मोबाइल से जुड़ी वैल्यू ऐडेड सर्विसेस देती थी, लेकिन कंपनी की हालत एक साल में ही खराब होने लगी. पैसे बचाने के लिए विजय बस की बजाय पैदल ही चलने लगे.

जैसे-तैसे वह कंपनी को जिंदा रख पाए और 2005 में पहली बार उनकी कम्पनी को प्रोफिट हुआ. इस मुनाफे ने उन्हें बल दिया और छुट्टे की समस्या को देखते हुये उन्होंने पे-टीएम जैसी कंपनी बनाने का निर्णय किया, जिसने उन्हें नई पहचान दे दी. मौजूदा समय में पे-टीएम करोड़ों का टर्नओवर करने वाली कंपनी बन चुकी है, जिसमें अलीबाबा जैसी बड़ी कंपनी का इन्वेस्टमेंट लगा हुआ है.

Top Entrepreneur of India, Vijay Shekhar Sharma (Pic: linkedin.com)

नितिन गोडसे

सब्जी बेचने वाले से करोड़पति बने नितिन गोडसे का जन्म महाराष्ट्र के अकोला गांव में हुआ. उनके पिता एक सेल्समेन थे. जहां उन्हें 400 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था. यह रकम कम थी, इसलिए नितिन गोडसे ने पढ़ने के लिए सब्जियां बेचना शुरु कर दिया. ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद गोडसे सुपरवाइजर की नौकरी करने लगे. यहां ग्रोथ न देखते हुए उन्होंने आगे पढ़ने का निर्णय लिया और पुणे विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई पूरी की.

एमबीए के बाद वह एक ऐसी कंपनी में नौकरी करने लगे, जो ताजी सब्जियों को साफ-सुथरे ढंग से पैक करके बाजार में बेचती थी. चूंकि नितिन ने बचपन में सब्जियां बेची थी, इसलिए उन्हें यह काम अच्छा लगा. जल्द ही उन्होंने इस व्यापार के सारे हुनर सीख लिए और सब्जियों का बिजनेस शुरू कर दिया.

शुरुआत में उन्हें कोई ख़ास मुनाफा नहीं और कुछ दिनों यह धंधा बन्द हो गया. इसके बाद नितिन ने एक गैस कंपनी में नौकरी करनी शुरू की,  पर उनका वहां भी मन नहीं लगा. बाद में 1999 के आसपास उन्होंने एक्सेल गैस इक्विपमेंट्स नाम की एक कंपनी शुरू की, जिसने उन्हें ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. मौजुदा समय में इस कंपनी का टर्नओवर करीब 25 करोड़ रुपए है. इस कंपनी में करीब 150 से ज्यादा स्थायी कर्मचारी काम करते हैं, जबकि रिलायंस, आईआईएसआर, सिपला व बार्क जैसी कंपनियां इनकी ग्राहक हैं.

Top Entrepreneur of India, Nitin Godse (Pic: yourstory.com)

रीतेश अग्रवाल

23 साल के रीतेश अग्रवाल फेमस कंपनी ओयो के मालिक हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि उन पर बिजनेस करने का फीवर इतना तेज था कि उन्होंने अपना कॉलेज तक ड्रॉपआउट कर दिया था. रीतेश को ट्रैवल करना बहुत पसंद था, जिस कारण वह यहां-वहां घूमने जाते रहते थे. अपने ट्रैवेल के अनुभव को ही उन्होंने अपने बिजनेस का आधार बनाया, जिसके तहत उन्होंने एक ऑनलाइन रूम बुकिंग कम्युनिटी शुरू करने का प्लान किया.

वर्ष 2012 में उन्होंने “ओरावेल स्टे” नाम से एक कंपनी शुरु कर दी. यह कंपनी ट्रैवलर्स को छोटी या मध्य अवधि के लिए कम दामों पर कमरों को उपलब्ध करवाती थी. इससे कोई भी आसानी से ऑनलाइन बुक कर सकता था. कुछ समय बाद उनका ये बिजनेस मॉडल आपेक्षित लाभ देने में असफल रहा और “ओरावेल स्टे” घाटे में चली गई.

इसके कारण कंपनी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. अपने स्टार्ट-अप में असफल होने के बाद रीतेश निराश नहीं हुए और उन्होंने स्वयं द्वारा अपनाई गई योजनाओं पर विचार किया. फिर 2013 में ‘ओरावेल स्टे’ को ‘ओयो रूम्स’ के रुप में रीलांच किया. इस बार वह सफल हुए और ‘ओयो रूम्स’ बड़ी कंपनी के रुप में स्थापित हुई.

Top Entrepreneur of India, Ritesh Aggrawal (Pic: quora.com)

यह तो महज कुछ नाम हैं, देश में न जाने कितने ऐसे नाम हैं जिनसे आज के युवा प्रेरणा लेते हुए अपने लिए एक नई डगर बना सकते हैं. एक ऐसी डगर जिस पर कितना चलना है, कब चलना और क्यों चलना है, सब वह खुद तय कर सकते हैं. जीरो से हीरो बनने की यह कड़ी अनंत है और लगातार चलती रहने वाली है. अपने आस पास देखिये, आपको भी ‘जीरो से हीरो‘ का सफ़र तय करने वाले अवश्य नज़र आ जायेंगे.

Web Title: Top Entrepreneur of India, Hindi Article

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