हम लोग वक़्त के साथ विकसित तो हो गए, पर अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं, जो हमारी इस दुनिया से दूर अपनी एक अलग दुनिया में रहते हैं. हम भी कभी इनके जैसे ही हुआ करते थे, पर हमने विकास के रास्ते को चुना और खुद को स्थापित करने में कामयाब रहे. वहीं  दूसरी ओर यह अपनी पुरानी जिन्दगी को ही जीते रहे. यही कारण है कि जैसे-जैसे शहरों का दायरा तेजी से बढ़ता गया, वैसे-वैसे इन जनजातियों के कबीलों पर बुरा असर भी पड़ा. आज स्थिति यह है कि इनमें से कुछ कबीले खत्म होने की कगार पर हैं, तो आईये आज बात करते हैं, कुछ ऐसी ही कबीलों और वहां रहने वाले लोगों की:

अंडमानी कबीला

अंडमान-निकोबार में बसने वाले इस कबीले के लोग बहुत सालों से यहां पर रह रहे हैं. इन लोगों को ‘नेग्रिटोस’ के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि इस कबीले के लोग 18 वीं सदी में पहली बार किसी बाहर के आदमी से मिले थे. यहां अलग-अलग तरह के अंडमानी, जरावा, जंगिल, ओंगे और सेंटीनेलेसे नाम के गुट काम करते हैं. यहां एक समय पर 7000 से ज्यादा अंडमानी हुआ करते थे, पर दूसरे गुटों से लड़ाई और बीमारियों के चलते इनकी तादात कम होती गई. आज महज़ 400-500 अंडमानी ही बचे हैं. ऐसी ही चलता रहा तो जल्द ही इस कबीले में रहने वाले लोगोंं की जनजाति विलुप्त हो जायेगी.

 Andamanese (Pic: lipstickalley.com)

नुकाक

नुकाक कबीले के लोग  कोलम्बिया में रहते हैं. इस कबीले के लोग शिकार करने में काफी आच्छे माने जाते हैं. इनके पास एक बांस का बना खोखला डंडा होता है, जिससे यह जानवरों का शिकार करते हैं. इस कबीले के लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा. साथ ही बिमारियों के चलते यहां के ढ़ेर सारे लोगों की मृत्यु हो गई. इसके चलते इनकी तादात आधी हो गई है. खबरों की मानें तो इस कबीले के अब महज 200 के आसपास लोग ही बचे हैं. माना जाता है कि यह इस प्रजाति के विलुप्त होने के लक्षण हैं.

बटाक

फ़िलीपीन्स के दूर इलाकों में रहने वाले ‘बटाक’ कबीले के लोगों को काफी शांत स्वभाव का माना जाता है. यह खेतीबाड़ी में बहुत अच्छे होते हैं और अपनी उगाई हुई चीज़ों को बेच कर गुज़ारा करते हैं. इस कबीले के लोग पहले समुद्री तट के पास रहा करते थे, पर 20 वीं सदी में इन्हें समुद्र तट से प्रवासियों ने भगा दिया और इन्हें पहाड़ों पर जाकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. खेती पसंद इन लोगों को पहाड़ों पर उपजाऊ जमीन नहीं मिली और फिर जीवन चलाने के लिए इन्होने जंगल में मिलने वाली चीजें, जैसे- पेड़ की छाल और शहद जैसी चीजें बेचनी शुरू कर दी, पर जरुरी खान-पान और रहन सहन के कारण यह तेजी से कम हुए हैं. कहते हैं कि आज केवल 500 लोग ही इस कबीले में बचे हुए हैं.

एल मोलो

एक समय पर ‘एल मोलो’ कबीले के 2000 से ज्यादा लोग केन्या में रहा करते थे. माना जाता है कि इस कबीले के लोग कई सौ सालों से यहां रह रहे हैं. केन्या में ‘एल मोलो’ में रहने वाले लोग दो प्रकार के होते हैं. एक तो जो पूरी तरह से इस कबीले के हैं और दूसरे वह लोग थे, जिनके माता या पिता में से कोई एक ‘एल मोलो’ का होता था. वक़्त के साथ ज्यादातर ‘एल मोलो’ के लोगों ने दूसरे कबीले वालों के साथ रहना शुरू कर दिया. नतीजन धीरे-धीर असली ‘एल मोलो’ में रहने वालों की संख्या कम होती गयी. इसी कड़ी में एक समय ऐसा भी आया जब ‘एल मोलो’ के बस कुछ मुठ्टी भर लोग ही बचे हुए हैं.

El-Molo (Pic: cnn.gr)

दुखा

मंगोलिया के जंगलों में रहने वाले ‘दुखा’ कबीले के लोगों को हिरण के चरवाहे के तौर पर भी जाना जाता है. इनके पास हर दम एक हिरण या बारहसिंगा जरूर दिखेगा, जोकि इनके कबीले की पहचान के तौर पर जाना जाता है. माना जाता है कि यह हिरण इनके लिए दूध, मीट और यातायात का साधन होते हैं. इनके बारे में यह प्रचलित है कि यह लोग बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखते हैं. ये 7-8 लोगों का गुट बना कर जंगल में रहते हैं. माना जाता है कि कबीले के अब सिर्फ 300 लोग ही बचे हैं, जो धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं.

कलाश

पाकिस्तान में रहने वाला यह सबसे बड़ा अल्पसंख्यक कबीला है. लगभग 3000 लोग  कलाश (पाकिस्तान ) में रहते हैं. यह लोग बंटवारे से पहले से पाकिस्तान में रह रहे हैं. माना जाता है कि यह लोग सिकंदर के वंशज हैं. दिखने में यह लोग अंग्रेजों की तरह ही लगते हैं और कलशा भाषा का प्रयोग करते हैं. कहते है यह लोग कुछ-कुछ हिन्दू रीति-रिवाज को भी मानते थे. पर कुछ कारणो से यह भी तेजी से कम हुए हैं

Tribes Which Are About To Extinct, Kalash (Pic: pinterest.com)

स-ओच

स-ओच कबीला सालों से कम्बोडिया का हिसा रहा है. 1975 में कम्बोडिया में हुए उथल-पुथल के कारण इन लोगों को इसलिए वहां से भागना पड़ा, क्योंकि वह अपनी खुद की भाषा बोलते थे. कहानियां कहती हैं कि इस कबीले के लोगों पर कई जुल्म हुए, जिस कारण इन्हें देश के दूसरे हिस्सों की तरफ पलायन करना पड़ा. आज आलम यह है कि इस कबीले के लोग न कि संख्या में बचे हुए हैं.

गोरोका

गोरोका इंडोनेशिया में रहने वाले कबीले के लोग हैं. इस कबीले के लोग दिन-ब-दिन कम होते जा रहे हैं. माना जाता है कि यह लोग जहां रहते हैं, उस जगह की हालात लगातार खराब होती गई. साथ ही यह आपस मेंं लड़ते-झगड़ते रहे. इस कारण यह दो हिस्सों बंट गए और आज स्थिति यह है कि यह विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं.

नेनेट्स

नेनेट्स रूस में रहने वाला कबीला है. यह बंजारों की तरह किसी एक जगह ज्यादा वक़्त नहीं रुकते. साथ ही यह लोग शहरों से अक्सर दूर रहते रहे. आगे रूस में बढ़ते शहरों के कारण अब यह ज्यादा प्रवास नहीं कर पाते. इस कारण आपस में बंटते गए और धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं.

Nenet (Pic: blogspot.in)

पिराहा

पिराहा कबीले के लोग ब्राजील में बसे अमेज़न के जंगलों में रहते हैं. वैसे तो जंगल में रहने के तरीकों में यह माहिर माने जाने जाते हैं. इन्हें जंगल के बारे में पूरा ज्ञान रहता है कि यह वहा क्या खा सकते हैं, कैसे रह सकते हैं और कैसे जानवरों का शिकार कर सकते हैं. बावजूद इसके इनकी जनसंख्या लगातार घटती जा रही है. अब यह 400 के आसपास की संख्या में बचे हुए हैं.

कायपो

कायपो भी ब्राज़ील का एक कबीला है, जोकि बड़ी नदियों के पास रहता है. यहां के लोगों के लिए जीवन एक मुसीबत तब बन गया, जब सरकार नें इन नदियों पर बांध बनाने का काम शुरू कर दिया. बांध बनने के कारण इस जगह पर पानी ज्यादा हो गया और इन लोगों को वहां से जाना पड़ा. इस कारण धीरे-धीरे इनकी जनसंख्या में कमी का दौर जारी है.

यह थे कुछ ऐसे कबीले, जो दिन-ब-दिन विलुप्त होने के कगार पर हैं. माना जाता है कि इन कबीलों में रहने वाले लोग साधारण जीवन जीते हैं और अपनी संस्कृति को बचाने की कोशिश में रहते हैं. पर तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण ने इनको विलुप्त होने की कगार पर खड़ा कर दिया है.

Web Title: Tribes Which Are About To Extinct, Hindi Article

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