‘फोबिया’ एक ऐसा शब्द है, जिसे आपने आम बोलचाल की भाषा में अक्सर सुना होगा. कुछ एक साल पहले यह एक फिल्म का शीर्षक भी बना, जिसमें राधिका आप्टे मुख्य किरदार के रुप में पर्दे पर नज़र आई थीं. अब अगर आपसे पूछा जाएं कि यह ‘फोबिया’ क्या हैं, तो आप कहेंगे कि यह एक बीमारी है. पर क्या आपको पता है कि इस बीमारी के कई औऱ अजीबों-गरीब स्वरुप भी हैं, जिन्हें देखकर सभी कहते हैं कि कुछ भी हो, लेकिन फोबिया न हो. तो आइये बात करते हैं इसके अजीबो-गरीब स्वरुपों के बारे में:

सोम्नीफोबिया

नींद व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत होती है, जो हर किसी को प्यारी होती है. नींद से पूरे दिन की थकान और तनाव कब ख़त्म हो जाता है, पता नहीं चलता. लेकिन जरा सोचिए अगर यही नींद आपके तनाव का कारण बन जाए तो ऐसी स्थिति को क्या कहेंगे? निश्चित रुप से यह फोबिया का ही स्वरुप है, जिसे सोम्नीफोबिया कहते हैं. सोम्नीफोबिया वाले व्यक्ति के मन में ये डर रहता है कि अगर वो सोया तो कही उसकी मौत न हो जाए! उसका डर इतना गहरा होता है कि वो निरंतर जागे रहने की कोशिश करता है और नींद के लिए दवाईयों का सहारा लेने लगता है.

Somniphobia (Pic: curemysleepapnea.com)

हय्लोफोबिया

हय्लोफोबिया एक प्रकार का पेड़ पौधों का डर है. इसमें व्यक्ति को पेड़ पौधे या जंगल जैसी जगह को देख कर घबराहट होती है. ये डर उनमें बचपन से नहीं होता. पर वक़्त के साथ ये उनके दिमाग में उत्पन्न होता रहता है. जरा सोचिये जो पेड़ पौधे हमारा सिर्फ भला चाहते हैं, कोई उनसे कैसे डर सकता है?

ओम्फलोफोबिया

नाभि को स्त्रियों में आकर्षण का केंद्र माना जाता है. मशहूर अभिनेत्री कटरीना कैफ की नाभि को भी बॉलीवुड में सबसे अच्छा कहा जाता है. पर कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें कटरीना क्या खुद की नाभि भी पसंद नहीं होती. ओम्फलोफोबिया के रोगी के साथ कुछ ऐसा ही होता है. उन्हें इस बात से डर लगता है कि कहीं कोई उनकी नाभि को छुएगा तो नहीं और उन्हें दूसरों की नाभि छूने से भी डर लगता है.

नोमोफोबिया

यह एक ऐसा फोबिया है, जिसके लक्षण आजकल हर दूसरे व्यक्ति में देखे जा सकते हैं. नोमोफोबिया में व्यक्ति को बिना मोबाइल फ़ोन के रहने से डर लगता है. मोबाइल की हमारे जीवन में एक अलग ही जगह बन गयी है. हम उसकी चिंता में अक्सर परेशान रहते हैं. जैसे- सुबह उठते ही फ़ोन को ढूंढना, बार-बार जेब से फोन निकाल कर देखना. यह नोमोफोबिया के कुछ एक लक्षण हैं.

मोनोफोबिया में व्यक्ति को फ़ोन से जुड़ी छोटी-छोटी चीज़ें भी परेशान कर देती हैं जैसे कहीं नेटवर्क का चले जाना, बैटरी के ख़त्म होने का डर, फोन का आखों के पास से पल भर के लिए गायब होना आदि. इस बीमारी से ग्रसित लोग दिन भर फ़ोन में लगे रहते हैं और समाज में जाने से बचते हैं.

पोगोनोफोबिया

अगर आप इस फोबिया के ग्रस्त हैं तो,  बीतें कुछ सालों में तेजी से प्रचलित हुए ‘नो सेव नवम्बर’ आपके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता होगा. असल में इस फोबिया के लोगों को दाढ़ी पसंद नहीं होती, उन्हें दाढ़ी वाले व्यक्ति को देखकर घबराहट होती है. वह ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनाना पंसद करते हैं.

एरगोफोबिया

कामचोर शब्द तो आपने सुना ही होगा. इस शब्द का नया नाम है एरगोफोबिया. इस फोबिया के मरीज़ कुछ भी काम करने से डरते हैं. इनके लिए नौकरी करना किसी इंजीनियर की नौकरी पाने से भी ज्यादा मुश्किल है. ये अक्सर कार्यालय में दबे-दबे व घबराए हुए दिखते हैं. काम में इनका मन नहीं लगता. हां अगर आप के पास पैसे की कमी नहीं है तो आपको इस फोबिया से शायद फर्क न पड़े, पर अगर आप एक आम घर से हैं तो यह आपके लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकता है.

Ergophobia (Pic: hiveminer.com)

हेलिओफोबिया

इन दिनों दिल्ली में गर्मी का पारा बहुत ज्यादा चढ़ा हुआ है, इसलिए लोग धूप में जाने से बचते हुए दिखते हैं. पर हेलिओफोबिया से ग्रसित लोग किसी भी मौसम में धूप में जाने से बचते हैं. बताते चलें कि सूरज की धूप से मिलने वाली विटामिन डी हमारे लिए बहुत जरूरी होती है पर फोबिया के शिकार लोग इसको बीमारी के चलते नहींं मानते और इनमें आम तौर पर इसकी कमी पाई जाती है. इस फोबिया के लोग रात बहुत पसंद करते हैं. साथ ही सुबह के समय यह ज्यादा से ज्यादा अंधेरे में रहने की कोशिश करते हैं.

ओइकोफोबिया

ये फोबिया अगर घरेलू औरतों में हो गया तो सच में प्रलय आ जाएगा. दरसल ओइकोफोबिया में व्यक्ति को घरेलू समान जैसे, जूसर-मिक्सर, वाशिंग मशीन, टोस्टर, फ्रिज जैसी कोई भी वस्तु को देखकर डर लगता है. ओइकोफोबिया में लोग अक्सर रसोईघर जैसी जगह जाने से बचते हैं. अब भला यह भी कोई बात हुई कि कोई अपने घर की चीज़ों से ही डरने लग जाए. वो वस्तुएं निर्जीव हैं भला उनसे कैसा डर, पर क्या किया जाए फोबिया तो फोबिया है.

बिब्लिओफोबिया

बिब्लिओफोबिया में लोग अपनी किताबों के दुश्मन हो जाते हैैं. यह ज्यादातर स्कूली बच्चों में होता है. इस फोबिया में बच्चों को किताबों से इतनी नफरत हो जाती है कि वे पढ़ने से बचने के लिए इन्हें छुपा देते हैं. कक्षा से दूर भागते दिखते हैं और कोई-कोई तो किताबों को जला भी देता है. ऐसे लोगों की स्कूली जिंदगी काफी कठिनाई भरी होती है. वैसे ये कोई बिमारी जैसी नहीं लगती, क्योंकि हर बच्चा किताबों से अक्सर दूर भागता दिखता है. पर इसका पता तब चलता है जब बच्चा अपनी सीमाएं लांघ जाता है.

बिब्लिओफोबिया वाले लोगों को अगर बोल-बोल कर पढ़ने के लिए बोला जाए तो वो ऐसा भी नहीं कर पाते. ऐसी स्थित में वह या तो जोर-जोर से रोने लगते हैं या फिर बहाने मारने लगते हैं.

सैंथोफोबिया

सैंथोफोबिया के लोगों को पीले रंग से बहुत परेशानी होती है. आम लोगों के लिए यह भले ही कोई ख़ास बात न हो, पर इस फोबिया वाले व्यक्ति के लिए तो ये रंग बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला होता है. माना जाता है कि अतीत में बीते किसी हादसे में पीले रंग के होने की वजह से दिमाग में इस रंग से के प्रति घृणा का भाव आ जाता है. वैसे तो कई लोगों को पीला रंग नहीं पसंद नहीं होगा, पर पसंद न आना और सहन न कर पाना दोनों में बहुत अंतर है.

Various Forms Of Phobias, Anthophobia (Pic: mfmpwnshxc)

तो ये थे कुछ अजीब-गरीब फोबिया जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना होगा.  यह भले ही सुनने में मजाकिया लगे, पर जो लोग इस प्रकार के फोबिया के शिकार होते हैं,  उनके लिए यह बात मजाक नहीं है. इनकी वजह से कई बार उन्हें समाज में  हंसी का पात्र बनना पड़ता है. चूंकि यह फोबिया के कारण अपने जीवन में बड़ी कठिनाइयों से गुजरते हैं, इसलिए अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति हो तो उनकी परिस्थिति को समझें, न कि उसका उपहास करें.

Web Title: Various Forms Of Phobias, Hindi Article

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