यूं तो आपने अपने कई दोस्तों की शादियों में खूब आनंद किया होगा. किन्तु तब आप आश्चर्य से भर उठे होंगे, जब इंसानों और पेड़ों की शादी के बारे में देखते या सुनते होंगे!

पर भारतीय समाज में यह एक सच्चाई है, जो आज भी जीवित है.

अगर आपने ऐसा नहीं देखा है तो दिमाग पर ज़रा और जोर डालिए. फिर भी आपको याद नहीं आये, तो याद कीजियेगा बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की शादी की कहानी. जी हाँ, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पुत्र और पुत्रबधू की बात ही यहाँ की जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से मांगलिक दोष होने के कारण पेड़ से शादी की थी. हालाँकि, इस पर कई बयान आये, पर अभिषेक और ऐश्वर्या की कहानी तो महज एक उदाहरण भर है.

भारत में ऐसे ढ़ेर सारे किस्से आपको मिल जायेंगे, जो इंसानों के साथ पेड़ों की शादी की अनूठी परंपरा को बताते हैं, तो आईये इस परंपरा से जुड़े दिलचस्प पहलुओं और किस्सों को जानने की कोशिश करते हैं:

क्या कहती है प्रचलित परंपरा?

पीपल के पेड़ और केले के पेड़ के साथ शादी करना भारत में प्रचलित एक सामान्य परंपरा है. कुछ हिन्दू समुदायों के अनुसार, मांगलिक दोष के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए महिला को अपने जीवनसाथी से पहले एक पीपल या केले के पेड़ से शादी करना अनिवार्य होता है. माना जाता है कि ऐसा करने से उसका दोष खत्म हो जाता है. यह परंपरा उन मामलों के लिए है, जहां दुल्हन मांगलिक दोष का शिकार होती है, और दूल्हा एक गैर-मांगलिक होता है.

हिंदू ज्योतिष के अनुसार, वह व्यक्ति मांगलिक माना जाता है, जिसकी कुंडली में मंगल पहले, द्वितीय, चौथी, सातवीं, आठवीं या 12 घरों में बैठा होता है. मंगल की यह स्थिति विवाह के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. वह बात और है कि इस परंपरा को कई जगह अंधविश्वास माना जाता है, लेकिन जनधारणाओं में इसे बढ़-चढ़ माना जाता है.

Weird Marriage Ritual in India (Pic: newlovetimes)

क्या था अभिषेक-ऐश्वर्या का मामला…

नवंबर 2006 में मीडिया की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि ऐश्वर्या एक ‘मांगलिक’ महिला हैं. इस कारण अगर वह अभिषेक से शादी करती हैं, तो अभिषेक के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ सकता था. ज्योतिष के जानकारों ने इसका तोड़ निकलाते हुए, उन्हें प्रचलित परंपरा के हिसाब से पहले किसी पेड़ से शादी करने की सलाह दी थी. इसके हिसाब से मांगलिक होने के दोष को दूर करने के लिए ऐश को ‘पीपल’ या ‘केले’ के पेड़ से शादी करनी थी.

चन्द्रशेखर स्वामी नामक एक ज्योतिषी ने पत्र लिखकर इस बात को स्वीकारा था कि अभिषेक और ऐश्वर्या उनके ही सुझाव पर वाराणसी में थे, जहां दोनों परिवारों की मौजूदगी में एक प्राचीन शिव मंदिर में उन्होंने इस सुधारात्मक पूजा को संपन्न कराया था.

मिलता-जुलता है ‘तोलिनी ब्याह’!

तोलिनी ब्याह असम की एक प्रचलित परंपरा है. इसके अनुसार यहां दुल्हन तो होती है, लेकिन दूल्हा एक केले का पौधा होता है. यह ब्याह तब किया जाता है, जब कोई लड़की पहली बार पीरियड्स का अनुभव करती है. परंपरा के अनुसार लड़की को सूर्य की रोशनी से बचाया जाता है. खाने के लिए फल व कच्चा दूध दिया जाता है. उनके पके हुए खाना खाने पर रोक होती है. यही नहीं दूसरी रस्मों के पूरा होने तक उसे ज़मीन पर ही सोना होता है.

इस दौरान किसी भी पुरुष को लड़की का चेहरा देखने की इजाजत नहीं होती. केवल महिला और लड़कियां ही उसके पास रह सकती हैं. ब्याह के पहले लड़की की मां अपने कंधों पर बैठाकर उसे स्नान के लिए जाती है. फिर, लड़की को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. सोने और चांदी के जेवरों के साथ उसको वहां कि पारंपरिक मेखला चादर पहनाई जाती है. इस सबके बाद उसे दूल्हा बने केले के पास बिठाया जाता है और आगे की रस्में पूरी की जाती हैं.

ब्याह संपन्न होने के बाद दूल्हा बने केले के पत्ते को पारंपरिक गमछे में बांधा जाता है. इसके साथ आगे महिलाएं खेलती हैं. वह एक अलग किस्म के उत्सव में लीन हो जाती हैं.

Tiloni Bia (Pic: bbc)

इस ब्याह की असल वजह की बात की जाये तो, यहां की महिलाएं असल में पुरुषों को यह संदेश देना चाहती हैं कि उनकी लड़की शादी लायक हो चुकी है. दूसरा कि वहां के मशहूर बिहू उत्सव के दौरान अगर कोई लड़का-लड़की एक दूसरे को पसंद कर लेता है और समाज के डर से भाग कर शादी कर लेता है, तो ऐसे में माता-पिता की इच्छाएं मर न सकें… मतलब तोलिना ब्याह के माध्यम से अपनी इच्छाएं पहले ही पूरी कर लेते हैं.

वैसे तो यह पंरपरा असम में आम है, लेकिन फिर भी इलाके बदलते ही इसके रीति-रिवाज़ो में थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिलता है.

कई फिल्मों में दिखी है इस परंपरा की ‘छाप’

इस अनूठी परंपरा की एक झलक मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की फिल्म फिल्लौरी में भी देखने को मिली. हालांकि, उनकी यह फिल्म रोमेंटिक, ड्रामा कॉमेडी फिल्म थी. बावजूद, इसके इसमें अभिनेता सूरज शर्मा को मांगलिक दोष से शिकार दिखाया गया था.

बाद में एक साक्षात्कार में अनुष्का शर्मा ने बताया कि फुल्लौरी की कहानी निर्देशक अंशाई लाल के एक करीबी दोस्त की सच्ची कहानी पर आधारित है. असल में वह मांगलिक होते हैं, और बाद में इस दोष से मुक्त होने के लिए एक पेड़ से शादी कर लेते हैं. फिल्म की सह-निर्माता कर्नाश को यह कहानी दिलचस्प लगी, तो उन्होंने इस पर काम करने का मन बनाया था.

Marriage With Tree ( Representative Pic: list25)

कई बार परंपरायें अच्छी होती हैं, तो कई बार इनका स्वरुप बेहद ही अजीबो-गरीब और हैरान करने वाला होता है. भारत में प्रचलित पेड़ों के साथ इंसानों की शादी वाली परंपरा इसी का एक उदाहरण है. इस परंपरा को लोग अनूठी भले ही कहें, लेकिन सच तो यह है कि एक बड़ी संख्या में यहां के लोग इसमें आस्था रखते हैं, जो अंधविश्वास ही प्रतीत होता है. दिलचस्प बात यह कि पढ़े लिखे और समाज के संपन्न लोग भी इसके जाल में वैसे ही उलझे हैं, जैसे सामान्य जन.

बच्चन परिवार द्वारा इसका अनुसरण किया जाना, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. हालांकि, इसके लिए उनको मीडिया समेत कई जगह सवालों के कटघरे में खड़ा होना पड़ा. किन्तु, कहते हैं न कि परंपराओं की जड़ों का तोड़ना आसान नहीं होता.

आप क्या कहते हैं इस परंपरा को… उत्सव या अन्धविश्वास! कमेन्ट-सेक्शन में अपने विचार से अवगत कराएं.

Web Title: Weird Marriage Ritual in India, Hindi Article

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