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आधुनिक स्कूल कहीं ‘किलिंग मशीन’ तो नहीं बन रहे?

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Mithilesh

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इस लेख का शीर्षक भावुकता में कतई नहीं लिखा गया है, बल्कि इसके पीछे पर्याप्त वजहें सामने आ रही हैं.

रयान इंटरनेशनल स्कूल, जिसकी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह इंडिया का ‘मोस्ट रेस्पेक्टेड स्कूल’ है, जिसके पास 2 लाख सत्तर हज़ार स्टूडेंट्स, 15 हज़ार स्टाफ मेंबर्स के साथ विश्व भर में कुल 130 स्कूल हैं.

मतलब एक बड़ा एजुकेशन जायंट, जिसके बाथरूम में एक 7 साल के बच्चे का मर्डर कर दिया जाता है और पुलिस के आने से पहले ही खून इत्यादि साफ़ करने की कोशिश की जाती है. इसके साथ अन्य कई प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं.

इससे पहले इसी ग्रुप के एक दूसरे स्कूल में एक बच्चा पानी की टंकी में मृत पाया जाता है.
कार्रवाई के नाम पर अगर आप गौर से अपना दिमाग इस्तेमाल कर के देखेंगे तो शायद आपको हंसी आ जाएगी.

इस मुद्दे को समझने के लिए सिर्फ इतना समझना ही पर्याप्त है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बच्चे के पिता की याचिका पर सीधा हस्तक्षेप किया है.

आखिर यह पूरा मामला है क्या और जांच की सुई किस दिशा में जा रही है, इसे समझने के लिए ‘रयान इंटरनेशनल स्कूल’ में हुई इस जघन्य हत्या को व्यापक दृष्टिकोण से देखे जाने की आवश्यकता है. इसके अतिरिक्त, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और स्कूलों में बढती हिंसा पर विचार भी समाज के इस हिस्से को समझने में कुछ हद तक ही सही, मदद अवश्य कर सकेगा…

‘रयान इंटरनेशनल’ जैसे स्कूल का मतलब?

इस हत्याकांड की कहानी जितनी सीधी नज़र आती है, उतनी ही उलझी हुई भी है. तमाम दूसरे प्रभावशाली संस्थानों की तरह इस स्कूल ने शुरुआत में मामले की लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

हत्याकांड के बाद जिस आसान ढंग से एक कंडक्टर को पुलिस गिरफ्तार करती है और वह बेहद आसानी से न केवल अपना जुर्म कबूल कर लेता है, बल्कि यह भी बयान देता है कि वह हर तरह की सजा भुगतने के लिए भी तैयार है, इससे भारी शक पैदा होता है.

मृतक बच्चे का परिवार इस केस की सीबीआई जांच की मांग करते हुए साफ़ कह रहा है कि इस पूरे मामले में कंडक्टर को मोहरा बनाया गया है.

परिवार रो रहा है, बिलख रहा है और अपने मासूम बच्चे की लाश लेकर चारों ओर ‘इन्साफ’ की गुहार लगा रहा है और राज्य सरकार के स्तर पर टालमटोल देखकर मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाना पड़ा.

प्रशासन को समझना चाहिए कि भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में ‘मर्डर’ का मतलब क्या होता है, वह भी एक सात साल के मासूम बच्चे का! क्या शुरुआत में ही प्रिंसिपल और स्कूल मैनेजमेंट के लोग गिरफ्तार नहीं हो जाने चाहिए थे?

लेकिन, एक कंडक्टर के ऊपर गाज गिरा दी गयी और मामले को रफा दफा करने की पुरजोर कोशिश भी शुरू हो गयी. संभव है कि कन्डक्टर दोषी भी हो, किन्तु क्या इससे स्कूल-प्रबंधन की जवाबदेही समाप्त हो जाती है?

क्या उस कंडक्टर के भरोसे माँ-बाप स्कूल में अपने बच्चों को छोड़ कर जाते हैं?

रयान इंटरनेशनल जैसे लापरवाह स्कूल प्रबंधन पर तो जितनी कड़ी कार्रवाई की जाए, कम होगी, लेकिन आधुनिक स्कूलिंग प्रणाली कहीं ‘किलिंग मशीन’ तो नहीं बनती जा रही है, इस बाबत विचार करना भी उतना ही आवश्यक है. इस विचार से ही आगे की राह निकलेगी, इस बात को याद रखना पड़ेगा.

मुश्किल यह है कि बड़े स्कूलों का प्रभाव भी व्यापक है, इसलिए वह निश्चिन्त होते हैं कि कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा. इस तरह की मानसिकता पर लगाम लगाया जाना बेहद आवश्यक है, अन्यथा इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी.

उम्मीद की जानी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर कहीं ज्यादा ध्यान देने की कवायद की जायेगी और यही शायद न्याय होगा, उस मृतक मासूम की आत्मा के साथ!

मॉडर्न स्कूलों में बढ़ती हिंसा की घटनाएं

Ryan International School Murder Case (Pic: youtube)

मामला सिर्फ रयान इंटरनेशनल का ही नहीं है, बल्कि तमाम प्राइवेट स्कूल आर्थिक लाभ के चक्कर में लड़कों का एडमिशन ले तो लेते हैं, किन्तु उनका प्रबंधन कर पाने में खुद को नाकाम पाते हैं. नतीजा होता है, अव्यवस्था, जो कई बार हिंसा में परिवर्तित हो जाती है.

खुद छात्रों में कई बार आपसी रंजिश इतनी भयानक हो जाती है, जिससे मामला उलझाऊ होता चला जाता है. कई बार छात्र अपने साथियों ही नहीं, बल्कि अध्यापकों तक को निशाना बना बैठते हैं. चाकू, पिस्तौल तक का इस्तेमाल वास्तव में हमारी शिक्षा व्यवस्था की पोल ही खोलता है. आखिर यह कौन सी शिक्षा दी जा रही है, जिसके माध्यम से छात्र को जिम्मेदार नागरिक बनने की बात तो छोड़ दीजिये, वह एक साधारण नागरिक की श्रेणी में भी फिट नहीं बैठ रहे हैं? छात्र वर्ग में हिंसा, कुंंठा व अपराधों की प्रवृत्ति दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, इस बात में दो राय नहीं.
ऐसी घटनाओं की भी कमी नहीं, जिसमें छात्र छोटी छोटी बातों पर आत्महत्या तक कर बैठते हैं, तो किसी और की हत्या भी कर बैठते हैं.

2017 में ही फ़रवरी की आखिर में दिल्ली के सराय रोहिल्ला स्थित नव भारती पब्लिक स्कूल में चौकीदार (तकरीबन 35 वर्ष) की लाश मिलने से सनसनी फ़ैल गयी थी. चौकीदार के पास पड़ी ईंट और पत्थरों से अंदाजा लगाया गया कि इन्हीं से पीट-पीटकर उसकी हत्या की गई है. खबरों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस को पड़ोस में रहने वाले एक लड़का और लड़की नजर आए थे. हत्या का शक होने पर पुलिस ने दोनों से पूछताछ भी किया था.
ऐसे अनगिनत वाकये हैं जो हमारी व्यवस्था पर बड़ा क्वेश्चन मार्क खड़ा करते हैं.

और भी गम हैं ज़माने में…

प्राइवेट स्कूलों में सिर्फ हिंसा ही एक मुद्दा हो ऐसा भी नहीं है, बल्कि दूसरे मोर्चों पर भी इन स्कूलों ने कुछ कम प्रोब्लम्स क्रियेट नहीं किया है. वह चाहे लगातार बढती फीस का मामला हो अथवा बात-बेबात अभिभावकों को धमकाना हो, इन पर नकेल कसना नामुमकिन की हद तक मुश्किल हो गया है.

अभी दिल्ली सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की बढती मनमानी पर फीस वापसी का प्रस्ताव दिल्ली के उप राज्यपाल ने मंजूर किया था, जिसके खिलाफ प्राइवेट स्कूलों द्वारा जबरदस्त ढंग से लोबियिंग की कोशिश की गयी. इस प्रस्ताव में फीस वापस न लौटाने पर स्कूलों के टेकओवर की बात कही गई थी. समझा जा सकता है कि नौबत कहाँ तक पहुँच चुकी है.

यह तो रही सीधे सीधे फीस वापसी की बात, किन्तु रयान इंटरनेशनल जैसे तमाम स्कूलों के बारे में भारी डोनेशन चलने की बात ख़बरों में चलती ही रहती हैं. अपुष्ट मगर यह बातें सच्चाई के काफी करीब हैं कि एक-एक एडमिशन के लिए यह बड़े स्कूल लाखों रूपये की डोनेशन लेने में ज़रा भी संकोच नहीं करते हैं.

हद तो तब हो जाती है, जब फीस के बोझ तले दबकर कई घर बर्बाद हो जाते हैं. 2011 में दिल्ली में ही एक ऐसी घटना सामने आयी थी, जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया था. पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में फीस नहीं दे पाने पर स्कूल से निकाल दिए गए किशोर ने तब अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

Ryan International School Murder Case (Pic: youtube)

आखिर इस तरह की स्थिति किसी सभ्य समाज के लिए कलंक नहीं कही जायेगी तो क्या कही जाएगी.

यदि गौर से सोचा जाए तो समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के बड़े वाहक ‘प्राइवेट स्कूल’ भी हैं. आप कहेंगे, यह कोरी कल्पना है तो इसे कुछ यूं समझिये.

कोई सरकारी अधिकारी या प्राइवेट कर्मचारी अपने बच्चे को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहता है. यहाँ ‘अच्छे स्कूल’ का सीधा मतलब वह स्कूल, जिसमें ज्यादे से ज्यादे फीस लगती हो.
इस तरह की होड़ मची है समाज में और इस होड़ में आदमी गलत-सही देखे बिना, यहाँ-वहाँ से कमाई करने के जुगाड़ में लगा रहता है. इसके लिए वह सुविधा शुल्क, यानी ‘घूसखोरी’ भी करता है. कुछ स्कूलों में दस-दस लाख से अधिक तक डोनेशन ली और दी जा रही है.

आज चुनाव में खर्च नियंत्रित करने की बात कही जा रही है, किन्तु स्कूल प्रबंधकों / प्रमोटर्स की ‘आय से अधिक आमदनी’ पर सरकार आखिर शिकंजा क्यों नहीं कस रही है?

स्कूलों/ कॉलेजों में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की इसी होड़ का नतीजा है कि वहां मैनपावर के नाम पर अयोग्य लोगों को रखा जाता है या फिर उसका निगरानी-तंत्र ढीला छोड़ा जाता है और परिणाम होता है किसी रयान इंटरनेशनल स्कूल में किसी मासूम की जान से खिलवाड़ होना!

फीस न चुकाने पर कई बार परीक्षा परिणाम रोकने तक की बातें ख़बरों में आयी हैं, जिससे शर्मनाक कुछ और हो नहीं सकता.

इस सन्दर्भ में गुजरात-मॉडल की बात चली, जिसे पूरे देश में लागू किये जाने से संभवतः कुछ राहत मिलती, पर यह मामला ‘रात गयी, बात गयी’ की तर्ज़ पर ठन्डे बस्ते में गया दिख रहा है.

सच कहा जाए तो एजुकेशन के नाम पर समूचे तंत्र की ओवरहालिंग की ज़रुरत साफ़ दिखाई दे रही है, जिसमें प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा-व्यवस्था और प्रबंधन की पूरी जवाबदेही और बढ़ती हिंसा जैसे विषयों को समग्र रूप में शामिल किया जा सकता है.
वैसे हर एक माँ बाप को रयान इंटरनेशनल स्कूल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का सार्थक परिणाम आने की उम्मीद है, क्योंकि कहीं एक जगह से रौशनी तो आये, फिर राह अवश्य बनेगी, इसमें दो राय नहीं!

हाँ, जब तक ये सिस्टम बदलने की शुरुआत नहीं होती है, तब तक गार्जियंस को खुद ही बेहद जागरूक रहना पड़ेगा और कुछ संदिग्ध नज़र आने पर तत्काल एक्शन लेना पड़ेगा. सावधानी में स्कूल और ट्रांसपोर्ट में सीसीटीवी, बराबर पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में सक्रियता से सहभागिता और बच्चों से कम्युनिकेशन करके स्कूल की व्यवस्था को उसकी नज़र से समझा जा सकता है. हालाँकि, यह प्रयास आपको पूरी तरह सुरक्षित होने का अहसास तो नहीं दिला सकते हैं, किन्तु क्या करें…

हाथ पर हाथ धरे बैठा भी तो नहीं जा सकता.

Ryan International School Murder Case (Pic: ryanwebsite)

Web Title: Ryan International School Murder Case, Hindi Article

Keywords: Schooling, Education System, Private Schools, Violence, Security in Schools, Children Security issues, Fees Increment, Donation and Corruption, Government, Gujarat Model of School Fees, Education System in India, Hindi Article on Education, Current Educational Scenario

Featured image credit / Facebook open graph: scoopnestyoutube

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